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आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुतकीर्तिमर्जुनः |
८२ घ
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
श्रुतकीर्तिस्तथा वीरो जय़त्सेनं सुतं तव |
३८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
श्रुतकीर्तिस्तथा शल्यं माद्रीपुत्रः सुतं तव |
१० क
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
श्रुतकीर्तेर्महाराज दृष्टवान्कर्णविक्रमम् ||
४४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
श्रुतकीर्तेस्तथा चापं चिच्छेद निशितैः शरैः ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
श्रुतगाम्भीर्यमाधुर्यसत्त्ववीर्यपराक्रमैः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४०
भीष्म उवाच
श्रुतचारित्रवृत्ताढ्यान्पवित्रं ह्येतदुत्तमम् ||
३५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२
वृहस्पतिरु उवाच
श्रुतधर्मा सत्यशीलो जानन्धर्मानुशासनम् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५८
भीष्म उवाच
श्रुतधैर्यप्रसादेन पश्चात्तापमुपागतः ||
४३ ख
वन पर्व
अध्याय १२
विदुर उवाच
श्रुतपूर्वं मय़ा तेषां कथान्तेषु पुनः पुनः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४२
भीष्म उवाच
श्रुतपूर्वो मय़ा धर्मो महानतिथिपूजने ||
३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४८
भीष्म उवाच
श्रुतमाप्नोति हि नरः सततं वृद्धसेवय़ा ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६
युधिष्ठिर उवाच
श्रुतमेतत्त्वय़ा तात यद्द्रोणस्य चिकीर्षितम् |
४२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
व्राह्मण उवाच
श्रुतमेतत्त्वय़ा राजन्ननय़ोः कथितं द्वय़ोः |
१०४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११५
दिवोदास उवाच
श्रुतमेतन्मय़ा पूर्वं किमुक्त्वा विस्तरं द्विज |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुतमेतन्मय़ा पूर्वं सर्वमेव तपोधन |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
श्रुतर्वा तु ततो भीमं क्रुद्धो विव्याध मारिष |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
श्रुतर्वा विरथो राजन्नाददे खड्गचर्मणी |
२७ क
वन पर्व
अध्याय ९६
लोमश उवाच
श्रुतर्वाणं महीपालं यं वेदाभ्यधिकं नृपैः ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३२
महेश्वर उवाच
श्रुतवन्तो दय़ावन्तः शुचय़ः सत्यसङ्गराः |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुतवाक्यः श्रुतनिधिः श्रुतश्रव्यविशारदः |
२९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १९
वासुदेव उवाच
श्रुतवाञ्श्रद्दधानश्च पराक्रान्तश्च पाण्डव |
५९ क
कर्ण पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
श्रुतवानसि कर्णस्य व्रुवतो वदतां वर |
३ क
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुतवानसि मेधावी धर्मार्थकुशलस्तथा ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
श्रुतवानसि मेधावी वुद्धिमान्प्राज्ञसंमतः ||
९६ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
श्रुतवानसि मेधावी वुद्धिमान्प्राज्ञसंमतः |
१८४ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
श्रुतवानसि वै राज्ञो महोत्साहान्महावलान् |
१६३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११६
नारद उवाच
श्रुतवानस्मि ते वाक्यं यथा वदसि गालव |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५५
च्यवन उवाच
श्रुतवानस्मि यद्राजंस्तन्मे निगदतः शृणु ||
१० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५९
वसुदेव उवाच
श्रुतवानस्मि वार्ष्णेय़ सङ्ग्रामं परमाद्भुतम् |
१ क
विराट पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुतवान्देशकालज्ञस्तत्त्वज्ञः सर्वधर्मवित् ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८
भीष्म उवाच
श्रुतवृत्तोपपन्नानां सदाक्षरविदां सताम् ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७३
वाय़ुरु उवाच
श्रुतवृत्तोपपन्नाय़ धर्मज्ञाय़ तपस्विने ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुतवृत्तोपसम्पन्नं सर्वैः समुदितं गुणैः ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुतवृत्तोपसम्पन्नः सर्वैः समुदितो गुणैः ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय १९८
व्याध उवाच
श्रुतवृत्तोपसम्पन्नाः ते सन्तः स्वर्गगामिनः ||
७७ ख
विराट पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुतवृत्तोपसम्पन्नाः साधुव्रतसमन्विताः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
भीष्म उवाच
श्रुतशीले समाज्ञाय़ वृत्तिमस्य प्रकल्पय़ेत् |
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ११२
भीष्म उवाच
श्रुतश्च स्वामिना पूर्वं यादृशो नैष तादृशः ||
५२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
श्रुतश्रवा द्रोणसुतेन सार्धं; युधामन्युश्चित्रसेनेन चापि ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०३
गरुड उवाच
श्रुतश्रीः श्रुतसेनश्च विवस्वान्रोचनामुखः |
१२ क
विराट पर्व
अध्याय ६३
कङ्क उवाच
श्रुतस्ते यदि वा दृष्टः पाण्डवो वै युधिष्ठिरः |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय ९०
जनमेजय़ उवाच
श्रुतस्त्वत्तो मय़ा विप्र पूर्वेषां सम्भवो महान् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६६
युधिष्ठिर उवाच
श्रुता मे कथिताः पूर्वैश्चत्वारो मानवाश्रमाः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय १२९
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुता मे जल्पतां तात पौराणामशिवा गिरः |
१२ क
विराट पर्व
अध्याय ३९
उत्तर उवाच
श्रुता मे तस्य वीरस्य केवला नामहेतवः ||
१० ग
वन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुता मे राक्षसा ये ये त्वय़ा विनिहता रणे |
३९ क
विराट पर्व
अध्याय ४१
उत्तर उवाच
श्रुता मे शङ्खशव्दाश्च भेरीशव्दाश्च पुष्कलाः |
१३ क
स्त्री पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुतानि च पुराणानि राजधर्माश्च केवलाः ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय ५४
वृहदश्व उवाच
श्रुतानि देवलिङ्गानि चिन्तय़ामास भारत ||
१३ ख