शल्य पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
श्रेय़ः स्यान्न तु मौढ्येन राजन्गन्तुं पराभवम् ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
श्रेय़श्च यदि जानीषे क्रिय़तां मा विचारय़ ||
६६ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
श्रेय़श्चावाप्स्यसीति ||
७५ 6
शान्ति पर्व
अध्याय
२५९
द्युमत्सेन उवाच
श्रेय़सः श्रेय़सीमेवं वृत्तिं लोकोऽनुवर्तते |
२६ क
वन पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
श्रेय़सस्ते परः कालः प्राप्तो भरतसत्तम |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
श्रेय़सस्त्वद्धिते युक्तांस्तत्तद्वक्तुमिहेच्छसि ||
२७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२८
व्राह्मण उवाच
श्रेय़सा योक्ष्यते जन्तुर्यदि श्रुतिरिय़ं तथा ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
श्रेय़सा योक्ष्यसे चैव व्येतु ते मानसो ज्वरः ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३९
विदुर उवाच
श्रेय़सा योक्ष्यसे राजन्कुर्वाणो ज्ञातिसत्क्रिय़ाम् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
नारद उवाच
श्रेय़सा योजय़न्त्याशु श्रेय़सि प्रत्युपस्थिते ||
५६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८४
भीष्म उवाच
श्रेय़सो लक्षणं ह्येतद्विक्रमो यस्य दृश्यते |
११ क
सभा पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
श्रेय़सो ह्यवमन्येह विनेशुः सवला नृपाः ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८६
पराशर उवाच
श्रेय़सोऽर्थे विधीय़न्ते नरस्याक्लिष्टकर्मणः ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
भीष्म उवाच
श्रेय़स्कामं जितात्मानं नारदं गालवोऽव्रवीत् ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६१
स्यूमरश्मिरु उवाच
श्रेय़स्कामः प्रत्यवोचमार्जवान्न विवक्षय़ा |
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
सिद्ध उवाच
श्रेय़स्कामास्तथा गङ्गामुपासन्तीह देहिनः ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
श्रेय़स्कामो यथा व्रूय़ादुभय़ोर्यत्क्षमं भवेत् ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
कृष्ण उवाच
श्रेय़स्तत्रानृतं वक्तुं तत्सत्यमविचारितम् ||
५४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
कृष्ण उवाच
श्रेय़स्तत्रानृतं वक्तुं सत्यादिति विचारितम् ||
५२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
श्रेय़स्तत्रानृतं वक्तुं सत्यादिति विचारितम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
२३८
दुर्योधन उवाच
श्रेय़स्तद्भविता मह्यमेवम्भूतं न जीवितम् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
श्रेय़स्तव विधास्यामि वलं तेजश्च सुव्रत ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
श्रेय़स्तवोपस्थितम् |
१६४ 5
उद्योग पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
श्रेय़स्ते दुर्जनात्तात पाण्डवैः सह सङ्गमः |
४२ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
श्रेय़स्ते भविष्यतीति ||
८० घ
विराट पर्व
अध्याय
३६
वृहन्नडो उवाच
श्रेय़स्ते मरणं युद्धे न भीतस्य पलाय़नम् ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४४
वैशम्पाय़न उवाच
श्रेय़स्ते स्यान्नरव्याघ्र सर्वमाचरतस्तथा ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६१
वैशम्पाय़न उवाच
श्रेय़स्तैलं च पिण्याकाद्धृतं श्रेय़ उदश्वितः ||
३४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
श्रेय़ांसं मार्गमातिष्ठन्सदा यः पृच्छते द्विजान् |
५४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
श्रेय़ांसं शय़ने हित्वा या पापीय़ांसमृच्छति |
५९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
श्रेय़ांसश्चैव राजानः सन्धास्यन्ते परन्तप ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२९
वासुदेव उवाच
श्रेय़ांस्तस्माद्यदि विद्येत कश्चि; दभिज्ञातः सर्वधर्मोपपन्नः |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४३
सनत्सुजात उवाच
श्रेय़ांस्तु षड्विधस्त्यागः प्रिय़ं प्राप्य न हृष्यति |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
१४९
व्राह्मण उवाच
श्रेय़ांस्तु सहदारस्य विनाशोऽद्य मम स्वय़म् |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२६
श्रीभगवानु उवाच
श्रेय़ान्द्रव्यमय़ाद्यज्ञाज्ज्ञानय़ज्ञः परन्तप |
३३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३३
भीष्म उवाच
श्रेय़ान्पराजय़स्तेभ्यो न जय़ो जय़तां वर ||
२१ ख
सभा पर्व
अध्याय
६१
विदुर उवाच
श्रेय़ान्सुधन्वा त्वत्तो वै मत्तः श्रेय़ांस्तथाङ्गिराः ||
७७ ख
वन पर्व
अध्याय
३०
युधिष्ठिर उवाच
श्रेय़ान्स्वधर्मानपगो न क्रुद्ध इति निश्चितम् ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२५
श्रीभगवानु उवाच
श्रेय़ान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
श्रेय़ान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् |
४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
श्रेय़ान्हि पण्डितः शत्रुर्न च मित्रमपण्डितम् |
४५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
श्रेय़ो न जातु न सुखं न कल्याणमवाप्स्यसि ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
श्रेय़ो नो भीमसेनस्य क्रुद्धस्य प्रमुखे स्थितम् |
६० क
शान्ति पर्व
अध्याय
७३
वाय़ुरु उवाच
श्रेय़ो नय़ति राजानं व्रुवंश्चित्रां सरस्वतीम् ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
६५
शकुन्तलो उवाच
श्रेय़ो मे कुरु कल्याणि यत्त्वां वक्ष्यामि तच्छृणु ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
२९
द्रौपद्यु उवाच
श्रेय़ो यदत्र धर्मज्ञ व्रूहि मे तदसंशय़म् |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
श्रेय़ो वै याचतः पार्थ दत्तमाहुरय़ाचते |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३४
श्रीभगवानु उवाच
श्रेय़ो हि ज्ञानमभ्यासाज्ज्ञानाद्ध्यानं विशिष्यते |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
श्रेय़ो हि ते स्यात्क्षणं कुर्वत इति ||
१०० 8
द्रोण पर्व
अध्याय
१२५
दुर्योधन उवाच
श्रेय़ो हि पाण्डून्मन्यन्ते न तथास्मान्महाभुज ||
२६ ख