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शान्ति पर्व
अध्याय २८७
पराशर उवाच
शय़ानं यान्तमासीनं प्रवृत्तं विषय़ेषु च |
२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
शय़ानं राजशार्दूलं काञ्चने शय़नोत्तमे |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
शय़ानं वीरशय़ने कालाकाङ्क्षिणमच्युतम् |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
शय़ानं वीरशय़ने ददर्श नृपतिस्ततः |
१५ क
स्त्री पर्व
अध्याय १७
वैशम्पाय़न उवाच
शय़ानं वीरशय़ने पश्य माधव मे सुतम् ||
९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २३
गान्धार्यु उवाच
शय़ानं वीरशय़ने पश्य शूरनिषेविते ||
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
शय़ानं वीरशय़ने मय़ा पुत्रेण पातितम् ||
८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २२
गान्धार्यु उवाच
शय़ानं वीरशय़ने रुधिरेण समुक्षितम् ||
२ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २२
गान्धार्यु उवाच
शय़ानं वीरशय़ने वीरमाक्रन्दसारिणम् |
४ क
स्त्री पर्व
अध्याय २३
गान्धार्यु उवाच
शय़ानं वीरशय़ने शरैर्विशकलीकृतम् ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
शय़ानं शरगुल्मस्थं दृष्ट्वा देवाः सहर्षिभिः |
१९ क
विराट पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
शय़ानं शय़ने तत्र मृत्युं सूतः परामृशत् |
४२ क
वन पर्व
अध्याय १९४
मार्कण्डेय़ उवाच
शय़ानं शय़ने दिव्ये नागभोगे महाद्युतिम् |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
शय़ानं समुपासन्ति यं पुरा परमस्त्रिय़ः |
३८ क
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
शय़ानं सलिले सर्वे कथय़ामो धनुर्भृते ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय २७०
मार्कण्डेय़ उवाच
शय़ानमतिनिद्रालुं कुम्भकर्णमवोधय़त् ||
२० ख
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
शय़ानमभितः शूरं कालिङ्गं मधुसूदन |
६ क
वन पर्व
अध्याय २८४
वैशम्पाय़न उवाच
शय़ानमभिविश्वस्तं व्रह्मण्यं सत्यवादिनम् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय १८६
वैशम्पाय़न उवाच
शय़ानममितात्मानं पद्मे पद्मनिकेतनम् |
१० क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
शय़ानमुपविष्टं वा स्थितं वा निषधाधिप |
२६ क
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
शय़ानमृषभस्कन्धं हतं पांसुशु माधव ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
शय़ाना वहवो वीराः कीर्तय़न्तः सुहृज्जनम् ||
४४ ख
आदि पर्व
अध्याय १३८
वैशम्पाय़न उवाच
शय़ानां पश्यताद्येह पृथिव्यामतथोचिताम् ||
१८ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ९
कृप उवाच
शय़ानां शय़ने धर्मे भार्यां प्रीतिमतीमिव ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
शय़ानानार्यया सार्धं को नु तत्कर्तुमर्हति ||
७८ ख
मौसल पर्व
अध्याय ७
वसुदेव उवाच
शय़ानान्निहतान्दृष्ट्वा ततो मामव्रवीदिदम् ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय १३९
वैशम्पाय़न उवाच
शय़ानान्भीमसेनं च जाग्रतं त्वपराजितम् ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
शय़ाने तस्मिंस्तदुदकं तस्थौ ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५४
जनमेजय़ उवाच
शय़ाने वीरशय़ने भीष्मे शन्तनुनन्दने |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
शय़ीत पृथिवीं नूनं शोभय़न्रुधिरोक्षितः |
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७२
भीष्म उवाच
शय़े कदाचित्पर्यङ्के भूमावपि पुनः शय़े |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७२
भीष्म उवाच
शय़े पुनरभुञ्जानो दिवसानि वहून्यपि ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११५
सञ्जय़ उवाच
शय़ेय़मस्यां शय़्याय़ां यावदावर्तनं रवेः |
४८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
शय़ोरुहश्चारुमत्स्यः शिरीषी चाथ गार्दभिः |
५८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
शय़्यार्धं तस्य चाप्यत्र स्त्रीपूर्वमधितिष्ठति |
१३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
शय़्यासनमलङ्कारमन्नपानमनार्यताम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
शय़्यासनवरं श्रीमत्पुष्पकं विश्वकर्मणा |
३५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८७
वैशम्पाय़न उवाच
शय़्यासनविहारांश्च सुवहून्रत्नभूषितान् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०६
मुनिरु उवाच
शय़्यासनानि यानानि महार्हाणि गृहाणि च ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
शय़्यासनानि यानानि योगय़ुक्ते तपोधने |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय १८६
वैशम्पाय़न उवाच
शय़्यासनान्युत्तमसंस्कृतानि; तथैव चासन्विविधानि तत्र ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय २८७
वैशम्पाय़न उवाच
शय़्यासने च मे राजन्नापराध्येत कश्चन ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६९
भीष्म उवाच
शय़्यासने विविक्ते च नित्यमेवाभिपूजय़ेत् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८५
भृगुरु उवाच
शय़्याय़ानासनोपेताः प्रासादभवनाश्रय़ाः |
१२ ख