chevron_left  षडुच्छ्रितोarrow_drop_down
आदि पर्व
अध्याय २५
कश्यप उवाच
षडुच्छ्रितो योजनानि गजस्तद्द्विगुणाय़तः |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५७
भीष्म उवाच
षडेतान्पुरुषो जह्याद्भिन्नां नावमिवार्णवे |
४४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
षडेतान्षड्भिरानर्छद्भास्करप्रतिमैः शरैः ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
षडेते वलसम्पन्ना निर्ययुर्महतो वलात् ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
षडेते व्रह्मणः पुत्रा वीर्यवन्तो महर्षय़ः ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
षडेव च तथा श्लोकाः सङ्ख्यातास्तत्त्वदर्शिना ||
२१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
विदुर उवाच
षडेव तु गुणाः पुंसा न हातव्याः कदाचन |
६९ क
आदि पर्व
अध्याय १११
वैशम्पाय़न उवाच
षडेवावन्धुदाय़ादाः पुत्रास्ताञ्शृणु मे पृथे ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
षड्गुणं च नभो ज्ञात्वा मनः पञ्चगुणं तथा |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७७
भृगुरु उवाच
षड्ज ऋषभगान्धारौ मध्यमः पञ्चमस्तथा |
३६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४९
व्रह्मो उवाच
षड्जर्षभौ च गान्धारो मध्यमः पञ्चमस्तथा |
५२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
भीष्म उवाच
षड्जीववर्णाः परमं प्रमाणं; कृष्णो धूम्रो नीलमथास्य मध्यम् |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
विदुर उवाच
षड्दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता |
६६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११३
वृहस्पतिरु उवाच
षड्भागपरिशुद्धं च कृषेर्भागमुपार्जितम् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
षड्भागममितप्रज्ञस्तासामेवाभिगुप्तय़े ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
षड्भिः स वर्षैर्नृपते सिध्यते नात्र संशय़ः |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २४३
व्यास उवाच
षड्भिः सत्त्वगुणोपेतैः प्राज्ञैरधिकमन्त्रिभिः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
षड्भिः ससूतं सहय़ं द्रोणं विद्ध्वानदद्भृशम् ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
षड्भिः ससूतं सहय़ं शरैर्द्रोणोऽवधीद्वृकम् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
षड्भिः साश्वनिय़न्तारमनय़द्यमसादनम् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०८
सञ्जय़ उवाच
षड्भिः सूतं त्रिभिः केतुं पुनस्तं चापि सप्तभिः ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय १८८
मार्कण्डेय़ उवाच
षड्भिरन्यैश्च सहितो भास्करः प्रतपिष्यति |
७५ क
वन पर्व
अध्याय २१५
मार्कण्डेय़ उवाच
षड्भिरेव तदा जातमाहुस्तद्वनवासिनः |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
षड्भिरेव तु वर्षैः स सिध्यते नात्र संशय़ः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
षड्भिर्दुर्योधनो राजा तत एनमवाकिरत् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४३
व्यास उवाच
षड्भिर्लक्षणवानेतैः समग्रः पुनरेष्यति ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३६
व्यास उवाच
षड्भिर्वर्षैः कृच्छ्रभोजी व्रह्महा पूय़ते नरः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
षड्भिर्वाजिसहस्रैश्च भीमस्तं देशमाव्रजत् ||
१११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३२
नरनाराय़णावू ऊचतुः
षड्भूतोत्पादकं नाम तत्स्थानं वेदसञ्ज्ञितम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय २५२
जय़द्रथ उवाच
षड्भ्यो गुणेभ्योऽभ्यधिका विहीना; न्मन्यामहे द्रौपदि पाण्डुपुत्रान् ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २३
भीष्म उवाच
षड्भ्यो निवृत्तः कर्मभ्यस्तं पात्रमृषय़ो विदुः ||
३६ ख
विराट पर्व
अध्याय ४४
कृप उवाच
षड्रथाः प्रतिय़ुध्येम तिष्ठेम यदि संहताः ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५३
अर्जुन उवाच
षड्रथान्धार्तराष्ट्रस्य मन्यसे यान्वलाधिकान् |
३१ क
आदि पर्व
अध्याय १६५
गन्धर्व उवाच
षड्रसं चामृतरसं रसाय़नमनुत्तमम् ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय १२८
लोमश उवाच
षड्रात्रं निय़तात्मानः सज्जीभव कुरूद्वह ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९२
वसिष्ठ उवाच
षड्रात्रभोजनश्चैव तथैवाष्टाहभोजनः ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय १४६
वैशम्पाय़न उवाच
षड्रात्रमवसन्वीरा धनञ्जय़दिदृक्षय़ा |
१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ५
विदुर उवाच
षड्वक्त्रं कृष्णशवलं द्विषट्कपदचारिणम् |
१४ क
स्त्री पर्व
अध्याय ६
विदुर उवाच
षड्वक्त्रः कुञ्जरो राजन्स तु संवत्सरः स्मृतः |
९ ख
वन पर्व
अध्याय २१५
मार्कण्डेय़ उवाच
षड्वक्त्रस्य तु माहात्म्यं कुक्कुटस्य च साधनम् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
षड्वर्गं प्रतिगृह्णन्स धर्मात्फलमुपाश्नुते ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय ४५
सूत उवाच
षड्वर्गविन्महावुद्धिर्नीतिधर्मविदुत्तमः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
षड्वर्ष एव वालः स कण्वाश्रमपदं प्रति |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९६
वसिष्ठ उवाच
षड्विंशं विमलं वुद्धमप्रमेय़ं सनातनम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
षड्विंशः पञ्चविंशं च चतुर्विंशं च पश्यति |
७० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
षड्विंशकमिति ख्यातं यत्परात्परमक्षरम् ||
१८१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
षड्विंशत्तरसा क्रुद्धो मुमोचाशु सुय़ोधने |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
षड्विंशमनुपश्यन्ति शुचय़स्तत्पराय़णाः ||
७६ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
षड्विंशे दिवसे यस्तु प्राश्नीय़ादेकभोजनम् |
१०३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९६
वसिष्ठ उवाच
षड्विंशेन प्रवुद्धेन वुध्यमानोऽप्यवुद्धिमान् |
१७ क