उद्योग पर्व
अध्याय
१३१
मातो उवाच
पक्वं द्रुममिवासाद्य तस्य जीवितमर्थवत् ||
४० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
पक्वं सस्यं वैद्युतेनेव दग्धं; परासिक्तं विपुलं स्वं वलौघम् ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२२
भीष्म उवाच
पक्वविद्या महाप्राज्ञा जितक्रोधा जितेन्द्रिय़ाः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
पक्वसस्या हि पृथिवी भवत्यम्वुमती तथा ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
पक्वानां हि वधे सूत वज्राय़न्ते तृणान्यपि ||
४७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३
व्यास उवाच
पक्वापक्वेति सुभृशं वावाश्यन्ते वय़ांसि च |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७८
भृगुरु उवाच
पक्वाशय़स्त्वधो नाभेरूर्ध्वमामाशय़ः स्थितः |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
२०३
व्याध उवाच
पक्वाशय़स्त्वधो नाभ्या ऊर्ध्वमामाशय़ः स्थितः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६२
कपिल उवाच
पक्वे कषाय़े वमनै रसज्ञाने न तिष्ठति ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७९
भीष्म उवाच
पक्वेनामस्य निमय़ं न प्रशंसन्ति साधवः |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४०
सञ्जय़ उवाच
पक्वौषधिवनस्फीतः फलवानल्पमक्षिकः |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
पक्षकोटिप्रपक्षेषु पक्षान्तेषु च वारणाः |
५३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
पक्षक्षय़ं तथा दृष्ट्वा दिवसानां च सङ्क्षय़म् |
४६ क
आदि पर्व
अध्याय
२८
सूत उवाच
पक्षतुण्डप्रहारैश्च देवान्स विददार ह ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
२६३
मार्कण्डेय़ उवाच
पक्षतुण्डप्रहारैश्च वहुशो जर्जरीकृतः |
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
३०
गरुड उवाच
पक्षनाड्यैकय़ा शक्र त्वां चैवात्रावलम्विनम् ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२५
वैशम्पाय़न उवाच
पक्षपातकृतस्नेहः स द्विधेवाभवज्जनः ||
१ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
२
युधिष्ठिर उवाच
पक्षपातो महानस्या विशेषेण धनञ्जय़े |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
अङ्गिरा उवाच
पक्षमेकं निराहारः स्वर्गमाप्नोति निर्मलः ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११०
गालव उवाच
पक्षवातप्रणुन्नानां वृक्षाणामनुगामिनाम् |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०३
कण्व उवाच
पक्षवातेन महता रुद्ध्वा त्रिभुवनं खगः |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११८
सञ्जय़ उवाच
पक्षवादांश्च वहुशः प्रावदंस्तस्य सैनिकाः ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
पक्षा मासाश्च ऋतवस्तुल्याः संवत्सराणि च ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
पक्षात्स जज्ञे मरुतां देवानामरिमर्दनः ||
७३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२६
सूत उवाच
पक्षानिलहतश्चास्य प्राकम्पत स शैलराट् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८९
भीष्म उवाच
पक्षान्मासानृतूंश्चित्रान्सञ्चरंश्च गुहास्तथा |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय
२८
सूत उवाच
पक्षाभ्यामुरसा चैव समन्ताद्व्याक्षिपत्सुरान् ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
पक्षालिका मन्थनिका जराय़ुर्जर्जरानना |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
२६६
मार्कण्डेय़ उवाच
पक्षिणं दृष्टवन्तः स्म वैनतेय़मिवापरम् ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
सञ्जय़ उवाच
पक्षिणः पशवो गावो मुनय़श्चापि सुव्रताः |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय
३८
शिशुपाल उवाच
पक्षिणः शुश्रुवुर्भीष्म सततं धर्मवादिनः ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
पक्षिणश्च महाघोरं व्याहरन्तो विवभ्रमुः |
४५ क
विराट पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
पक्षिणश्चापतन्भूमौ सैन्येन रजसावृताः ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
पक्षिणां च वय़ं नित्यं दूरपातेन पूजिताः ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
पक्षिणां वैनतेय़श्च अनन्तो भुजगेषु च ||
१५८ ख
वन पर्व
अध्याय
१५९
वैशम्पाय़न उवाच
पक्षिणामिव निर्घोषः कुवेरसदनं प्रति |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०६
मुनिरु उवाच
पक्षिणो मृगजातानि रसा गन्धाः फलानि च |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४१
भीष्म उवाच
पक्षिणो वातवेगेन हता लीनास्तदाभवन् |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९९
नारद उवाच
पक्षिराजाभिजात्यानां सहस्राणि शतानि च |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१४
भीष्म उवाच
पक्षिराजो गरुत्मांश्च यं नित्यमधिगच्छति |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
पक्षी च पक्षिरूपी च अतिदीप्तो विशां पतिः ||
६७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१३
जनक उवाच
पक्षीव प्लवनादूर्ध्वममुत्रानन्त्यमश्नुते |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०९
अङ्गिरा उवाच
पक्षे पक्षे गते यस्तु भक्तमश्नाति भारत |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०९
अङ्गिरा उवाच
पक्षे पक्षे गते राजन्योऽश्नीय़ाद्वर्षमेव तु |
४६ क
शल्य पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
पक्षोऽय़ं वर्धतेऽस्माकं यतः स्म व्रह्मराक्षसाः ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
पक्षौ तु भीमसेनश्च धृष्टद्युम्नश्च पार्षतः |
४८ क
आदि पर्व
अध्याय
२४
सूत उवाच
पक्षौ ते मारुतः पातु चन्द्रः पृष्ठं तु पुत्रक |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
देवा ऊचुः
पक्षौ पूर्वापरौ तत्र कृते रात्र्यहनी शुभे ||
७१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
पक्ष्मणोऽपि निपातेन येषां स्यात्स्कन्धपर्ययः ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
पक्ष्मसम्पातजे काले नकुलेन विनाकृता |
४१ क