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कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
सध्वजाः साय़ुधाः शूराः सवर्माम्वरभूषणाः |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
सनः सनत्सुजातश्च सनकः ससनन्दनः |
६४ क
वन पर्व
अध्याय १८३
मार्कण्डेय़ उवाच
सनत्कुमारं धर्मज्ञं संशय़च्छेदनाय़ वै ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
सनत्कुमारं प्रद्युम्नं विद्धि राजन्महौजसम् ||
९१ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
सनत्कुमारं प्रद्युम्नः प्रविवेश यथागतम् |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
सनत्कुमारं सर्वेषां व्रह्मय़ोनिं तमग्रजम् ||
८५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
सनत्कुमारः कपिलः सप्तमश्च सनातनः ||
६४ ख
वन पर्व
अध्याय ८८
धौम्य उवाच
सनत्कुमारः कौरव्य पुण्यं कनखलं तथा |
१९ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
सनत्कुमारप्रमुखास्तथैव परमर्षय़ः ||
६६ ख
आदि पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
सनत्कुमारस्तं राजन्व्रह्मलोकादुपेत्य ह |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
भीष्म उवाच
सनत्कुमारस्तु ततः श्रुत्वा प्राह वचोऽर्थवत् |
६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
सनत्कुमारस्तेजस्वी प्रद्युम्नो नाम मे सुतः ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
विश्वावसुरु उवाच
सनत्कुमारस्य ततः शुक्रस्य च महात्मनः ||
५९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
सनत्कुमारादपि च वीरणो वै प्रजापतिः |
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
भीष्म उवाच
सनत्कुमारो धर्मात्मा संशय़च्छेदनाय़ वै ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
सनत्कुमारो भगवांस्ततः प्राधीतवान्नृप |
३७ क
वन पर्व
अध्याय १३५
लोमश उवाच
सनत्कुमारो भगवानत्र सिद्धिमगात्पराम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
नारद उवाच
सनत्कुमारो भगवानिदं वचनमव्रवीत् ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८८
भीष्म उवाच
सनत्कुमारो भगवान्पुरा मय़्यभ्यभाषत ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
सनत्कुमारो योगीनां साङ्ख्यानां कपिलो ह्यसि ||
१५९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
युधिष्ठिर उवाच
सनत्कुमारो वृत्राय़ यत्तदाख्यातवान्पुरा ||
५९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
सनत्कुमारो वेदाश्च इतिहासास्तथैव च |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय ४३
धृतराष्ट्र उवाच
सनत्सुजात तद्व्रूहि यथा विद्याम तद्वय़म् ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४४
धृतराष्ट्र उवाच
सनत्सुजात यदिमां परार्थां; व्राह्मीं वाचं प्रवदसि विश्वरूपाम् |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४२
धृतराष्ट्र उवाच
सनत्सुजात यदीदं शृणोमि; मृत्युर्हि नास्तीति तवोपदेशम् |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
सनत्सुजातं रहिते महात्मा; पप्रच्छ वुद्धिं परमां वुभूषन् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४१
विदुर उवाच
सनत्सुजातः प्रोवाच मृत्युर्नास्तीति भारत ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
सनागपत्त्यश्वरथा दिशो गता; स्तथा यथा सिंहभय़ाद्वनौकसः ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
सनागपत्त्यश्वरथे उभे वले; विचित्रवर्णाभरणाम्वरस्रजे |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
सनागरथपत्त्यश्वाः समकम्पन्त मारिष ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
सनागस्यन्दनहय़ान्द्रक्ष्यध्वं निहतान्मय़ा |
७२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९९
मनुरु उवाच
सनातनं यदमृतमव्ययं पदं; विचार्य तं शमममृतत्वमश्नुते ||
३२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
सनातनस्य धर्मस्य मूलमेतत्सनातनम् ||
३१ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
व्रह्मो उवाच
सनातनो हि सङ्कल्पः काम इत्यभिधीय़ते |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
सनातनौ महात्मानौ कृष्णावेकरथे स्थितौ |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
सनात्सनातनतमः कपिलः कपिरव्ययः |
१०९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५
सञ्जय़ उवाच
सनाथमिदमत्यर्थं भवता पालितं वलम् |
२ क
वन पर्व
अध्याय १५०
वैशम्पाय़न उवाच
सनाथाः पाण्डवाः सर्वे त्वय़ा नाथेन वीर्यवन् |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
सनाथौ भवितारौ हि युधि सात्वतफल्गुनौ ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
सनामा तव कन्येय़ं स्वसा मे तपसान्विता ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय ३४
व्रह्मो उवाच
सनामाय़ां सनामा स कन्याय़ां द्विजसत्तमः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय १३
जरत्कारुरु उवाच
सनाम्नी या भवित्री मे दित्सिता चैव वन्धुभिः |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय ४२
जरत्कारुरु उवाच
सनाम्नीं यद्यहं कन्यामुपलप्स्ये कदाचन ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय १३
सूत उवाच
सनाम्नीमुद्यतां भार्यां गृह्णीय़ामिति तस्य हि |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
सनिर्घाता ज्वलन्त्यश्च पेतुरुल्काः समन्ततः |
६ क
विराट पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
सनिर्घाताभवद्भूमिर्दिक्षु वाय़ुर्ववौ भृशम् |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
सनिर्यूहाः सनिस्त्रिंशाः सशरासनतोमराः ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
सनिस्त्रिंशपुरोवातः शक्तिप्रासर्ष्टिसंवृतः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
सनिय़न्तृध्वजरथं विव्याध निशितैः शरैः ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय २८१
सावित्र्यु उवाच
सन्तः परार्थं कुर्वाणा नावेक्षन्ते प्रतिक्रिय़ाम् ||
४८ ख