उद्योग पर्व
अध्याय
१७९
भीष्म उवाच
स च तामाह याचन्तीं भीष्ममेव निवर्तय़ |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
स च तासां सुरूपाणां तस्यैव भवनस्य च |
४३ क
आदि पर्व
अध्याय
२०६
उलूप्यु उवाच
स च ते धर्म एव स्याद्दात्त्वा प्राणान्ममार्जुन ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
१८३
मार्कण्डेय़ उवाच
स च तेषां वचः श्रुत्वा यथातत्त्वं महातपाः |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०३
भृगुरु उवाच
स च तैरेव संसिद्धो नहुषः कर्मभिः पुनः ||
३५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
स च तैर्व्यथितः शक्रो वसिष्ठं शरणं यय़ौ |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
९६
लोमश उवाच
स च तौ विषय़स्यान्ते प्रत्यगृह्णाद्यथाविधि ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
स च दण्डे समाय़त्तः पश्य दण्डस्य गौरवम् ||
४८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
स च दर्पो नरश्रेष्ठ स च मानः क्व ते गतः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
८४
वैशम्पाय़न उवाच
स च दिव्यास्त्रवित्कर्णः सूतपुत्रो महारथः ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३
शौनक उवाच
स च द्विजातिप्रवरः कस्य पुत्रो वदस्व मे ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
स च धाता विधाता च विश्वात्मा विश्वकर्मकृत् |
६८ क
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
स च नाम रथस्तादृङ्मदीय़ास्ते च वाजिनः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
२०८
नार्यु उवाच
स च नास्मासु कृतवान्मनो वीर कथञ्चन |
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९
शल्य उवाच
स च पश्यतु देवेन्द्रो दुरात्मा पापचेतनः ||
४२ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
स च पारावताश्वस्य रथे हेमपरिष्कृते |
८९ क
आदि पर्व
अध्याय
१५५
व्राह्मण उवाच
स च पुत्रो महावीर्यो महातेजा महावलः |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४
शङ्ख उवाच
स च पूतो नरपतिस्त्वं चापि पितृभिः सह ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
२२९
वैशम्पाय़न उवाच
स च पौरजनः सर्वः सैनिकाश्च सहस्रशः |
७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
स च पौरजनः सर्वो ये च राष्ट्रनिवासिनः |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९०
भीष्म उवाच
स च प्रादान्महीपालः कन्यां तस्मै शिखण्डिने ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
स च प्राय़ाज्जवेनाशु वासुदेवः प्रतापवान् |
३८ ख
वन पर्व
अध्याय
२४५
वैशम्पाय़न उवाच
स च भीमो महातेजाः सर्वेषामुत्तमो वली |
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१९०
वैशम्पाय़न उवाच
स च मण्डूकराजो जामातरमनुज्ञाप्य यथागतमगच्छत् ||
४२ क
वन पर्व
अध्याय
१६८
अर्जुन उवाच
स च मां विगतज्ञानः सन्त्रस्त इदमव्रवीत् ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
स च मे वचनं व्रह्मन्कथमेवाभिमंस्यते ||
८ ग
आदि पर्व
अध्याय
३७
कृश उवाच
स च मौनव्रतोपेतो नैव तं प्रत्यभाषत |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३५
श्रीभगवानु उवाच
स च यो यत्प्रभावश्च तत्समासेन मे शृणु ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०९
वैशम्पाय़न उवाच
स च राजन्महातेजा ऋषिपुत्रस्तपोधनः |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९०
भीष्म उवाच
स च राजा दशार्णेषु महानासीन्महीपतिः |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
स च राजा महावीर्यः पूजितो वभ्रुवाहनः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
स च राजा वली तूर्णं ससार मृगमन्तिकात् ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७५
होत्रवाहन उवाच
स च राजा वय़ोवृद्धः सृञ्जय़ो होत्रवाहनः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२२
भीष्म उवाच
स च राजा श्रिय़ा युक्तो भविष्यति महान्वसुः ||
४७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७७
वैशम्पाय़न उवाच
स च वाजी यथेष्टेन तांस्तान्देशान्यथासुखम् |
४५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४६
वासुदेव उवाच
स च वाय़ुः शरीरेषु प्राणोऽपानः शरीरिणाम् ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
स च वीरान्रणे हत्वा राजपुत्रान्महावलान् |
६६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११४
भीष्म उवाच
स च वेगेऽभ्यतिक्रान्ते स्थानमासाद्य तिष्ठति ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
स च शिष्यान्महेष्वासः प्रतिजग्राह कौरवान् ||
४० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
स च संश्रुत्य वाक्यं ते प्रशशंस महाद्युतिः ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२११
वासुदेव उवाच
स च संशय़ितः पार्थ स्वभावस्यानिमित्ततः ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
स च सम्प्राप्य कौरव्यं तत्रैवान्तर्दधे तदा ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
१९
वासुदेव उवाच
स च सम्भावय़न्मां वै निवृत्तो हृदिकात्मजः |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
स च सर्पमुखो दिव्यो महेषुप्रवरस्तदा |
१०५ क
विराट पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
स च सेनापतिः पूर्वमित्येतत्सूतषट्शतम् ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
पूजन्यु उवाच
स च हेतुरतिक्रान्तो यदर्थमहमावसम् ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
स च हेतुर्न मन्तव्यो वलीय़ांसस्तथा हि ते ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
१२८
लोमश उवाच
स चकार तथा सर्वं राजा राजीवलोचनः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११३
भीष्म उवाच
स चकार तदालस्यं वरदानात्स दुर्मतिः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
स चकार सभां दिव्यां सर्वरत्नसमाचिताम् ||
३८ ख