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कर्ण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
सभामध्ये वचः क्रूरं कुत्सय़न्पाण्डवान्प्रति ||
१५ ख
सभा पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
सभामध्ये समाक्षिप्य व्यपक्रष्टुं प्रचक्रमे ||
४० ख
उद्योग पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
सभामध्ये समाहूय़ सञ्जय़ं वाक्यमव्रवीत् ||
२१ ख
सभा पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
सभामष्टौ सहस्राणि किङ्करा नाम राक्षसाः ||
२५ ख
सभा पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
सभामागम्य पाञ्चाली श्वशुरस्याग्रतोऽभवत् ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
सभामानीय़ दुर्वुद्धे वहुधा क्लेशिता त्वय़ा ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
सभामाविविशुर्हृष्टाः सूतस्योपदिदृक्षय़ा ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय ११०
वैशम्पाय़न उवाच
सभार्यः शोकदुःखार्तः पर्यदेवय़दातुरः ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
श्वशुर उवाच
सभार्यः ससुतश्चापि सस्नुषश्च दिवं यय़ौ ||
८२ ख
सभा पर्व
अध्याय १७
कृष्ण उवाच
सभार्यः सह पुत्रेण निर्जगाम वृहद्रथः ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
नकुल उवाच
सभार्यः सह पुत्रेण सस्नुषस्तपसि स्थितः |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
श्वशुर उवाच
सभार्यः सहपुत्रश्च सस्नुषश्च दिवं व्रज ||
८१ ख
सभा पर्व
अध्याय १७
कृष्ण उवाच
सभार्यः स्वर्गमगमत्तपस्तप्त्वा वृहद्रथः ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
सभार्यस्तच्च सस्मार महेश्वरवचस्तदा ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५५
च्यवन उवाच
सभार्यस्य नरश्रेष्ठ तेन ते प्रीतिमानहम् ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय ११८
वैशम्पाय़न उवाच
सभार्यस्य नृसिंहस्य पाण्डोरक्लिष्टकर्मणः ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५५
च्यवन उवाच
सभार्यस्य वनं भूय़स्तद्विद्धि मनुजाधिप ||
२४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३६
जनमेजय़ उवाच
सभार्ये नृपशार्दूले वध्वा कुन्त्या समन्विते ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९
शल्य उवाच
सभार्येण यथा प्राप्तं दुःखमिन्द्रेण भारत ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
भीष्म उवाच
सभार्यो मां रथेनाशु वह यत्र व्रवीम्यहम् ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५५
च्यवन उवाच
सभार्यो मां वहस्वेति तच्च त्वं कृतवांस्तथा ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
भीष्म उवाच
सभार्यो वाग्यतः श्रीमान्न च तं कोप आविशत् ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८३
वैशम्पाय़न उवाच
सभावास्तूनि रम्याणि प्रदेष्टुमुपचक्रमे ||
१२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १०
धृतराष्ट्र उवाच
सभाविहारभेत्तारो वर्णानां च प्रदूषकाः |
४ ख
वन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
सभासदश्च तान्सर्वान्भेदय़ेय़ं दुरोदरान् ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
सभासदश्च राजानस्त्वां च सत्यं जनार्दन |
६८ क
विराट पर्व
अध्याय १५
द्रौपद्यु उवाच
सभासदस्तु पश्यन्तु कीचकस्य व्यतिक्रमम् ||
२६ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
श्रीरु उवाच
सभासदां ते वृद्धानां सत्याः कथय़तां कथाः |
५० क
विराट पर्व
अध्याय १५
द्रौपद्यु उवाच
सभासदोऽप्यधर्मज्ञा य इमं पर्युपासते ||
२५ ख
विराट पर्व
अध्याय १
युधिष्ठिर उवाच
सभास्तारो भविष्यामि तस्य राज्ञो महात्मनः |
२० क
सभा पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
सभास्थान्पाण्डवान्द्रष्टुं प्रीय़माणो मनोजवः ||
३ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १२७
धृतराष्ट्र उवाच
सभाय़ा निर्गतो मूढो व्यतिक्रम्य सुहृद्वचः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १
युधिष्ठिर उवाच
सभाय़ां क्लिश्यमानस्य धार्तराष्ट्रैर्दुरात्मभिः |
३९ क
उद्योग पर्व
अध्याय २०
वैशम्पाय़न उवाच
सभाय़ां क्लेशितैर्वीरैः सहभार्यैस्तथा भृशम् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय १
युधिष्ठिर उवाच
सभाय़ां गदतो द्यूते दुर्योधनहितैषिणः ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२४
भीष्म उवाच
सभाय़ां चावहसनं तत्सर्वं शृणु भारत ||
५ ख
विराट पर्व
अध्याय १७
द्रौपद्यु उवाच
सभाय़ां देविता राज्ञः कङ्को व्रूते युधिष्ठिरः ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३६
वैशम्पाय़न उवाच
सभाय़ां द्रौपदी चैव तैश्च तन्मर्षितं तव ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
सभाय़ां परिकृष्टाहमेकवस्त्रा रजस्वला ||
६८ ख
विराट पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
सभाय़ां पश्यतो राज्ञः पातय़ित्वा पदाहनम् |
८ क
विराट पर्व
अध्याय १५
द्रौपद्यु उवाच
सभाय़ां पश्यतो राज्ञो यथैव विजने तथा ||
३९ ख
विराट पर्व
अध्याय १७
द्रौपद्यु उवाच
सभाय़ां पार्षदो मध्ये तन्मां दहति भारत ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
सभाय़ां प्राहसः कर्ण क्व ते धर्मस्तदा गतः ||
४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६०
वासुदेव उवाच
सभाय़ां याज्ञसेनी च कृष्टा द्यूते रजस्वला |
४३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १६
जनमेजय़ उवाच
सभाय़ां वसतोस्तस्यां निहत्यारीन्महात्मनोः |
१ क
स्त्री पर्व
अध्याय २४
गान्धार्यु उवाच
सभाय़ां विपुलं राज्यं स पुनर्जीवितं जितः ||
२४ ख
सभा पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
सभाय़ां सत्यसन्धस्य यदासीद्वृषपर्वणः |
३ क
विराट पर्व
अध्याय २०
भीमसेन उवाच
सभाय़ां स्म विराटस्य करोमि कदनं महत् |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
सभाय़ामवहासस्य सर्वस्वहरणस्य च |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
सभाय़ामहरद्द्यूते पुनस्तान्याहराम्यहम् ||
२१ ख