आदि पर्व
अध्याय
७२
कच उवाच
अनिय़ोज्ये निय़ोगे मां निय़ुनक्षि शुभव्रते |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
अनीकं दक्षिणं राजन्युय़ुधानेन पालितम् |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
अनीकं दशसाहस्रं कुञ्जराणां तरस्विनाम् |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
अनीकं दशसाहस्रं कुञ्जराणां तरस्विनाम् |
३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
अनीकं दशसाहस्रमश्वानां भरतर्षभ |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
अनीकं न तु शक्यं भोः प्रवेष्टुमिह वै त्वय़ा ||
८१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
अनीकं पाण्डुपुत्राणां हाहाभूतमचेतनम् ||
३६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
अनीकं पाण्डुपुत्राणां हाहाभूतमचेतनम् ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
अनीकं ये प्रभिन्दन्ति भिन्नं ये स्थगय़न्ति च |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
अनीकप्रमुखे तिष्ठन्वराहेण महाय़शाः |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
सञ्जय़ उवाच
अनीकमध्ये तिष्ठन्तं गाङ्गेय़ं भरतर्षभ |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
अनीकमध्ये तिष्ठन्तं राजपुत्रं दुरासदम् |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
अनीकमध्ये राजेन्द्र रेजतुः कर्णपाण्डवौ ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
अनीकमसतामेतद्धूमवर्णमुदीर्यते |
३७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
अनीकसाहः पुरुषः शिपिविष्ट उरुक्रमः ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
अनीकानां च संह्रादे वादित्राणां च निस्वने |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३०
धृतराष्ट्र उवाच
अनीकानां प्रभग्नानां व्यवस्थानमपश्यताम् |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५४
सञ्जय़ उवाच
अनीकानां प्रविभागेऽप्रकाशे; न ज्ञाय़न्ते कुरवो नेतरे वा ||
४२ ख
वन पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
अनीकानां विभागेन पन्थानः षट्कृताभवन् |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
अनीकानां समेतानां समवाय़स्तथाविधः ||
४६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
अनीकानि च सर्वाणि शीघ्रं त्वमनुचोदय़ ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
अनीकानि विनिघ्नन्तं ह्रीमन्तमपराजितम् |
६३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
अनीकान्यनुसंय़ाने व्यादिदेशाथ भारत ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
अनीकान्यर्दय़न्युद्धे त्वरितः श्वेतवाहनः |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२६
सञ्जय़ उवाच
अनीकान्याद्रवन्ते मां सहितान्यद्य मारिष ||
३१ ग
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अनीकिनीं दशगुणां प्राहुरक्षौहिणीं वुधाः ||
१८ ख
विराट पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
अनीकेन यथास्वेन शरैरार्च्छन्त पाण्डवम् ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
अनीकैर्वहुसाहस्रैः क्षत्रिय़ाः समवारय़न् ||
७१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९७
भीष्म उवाच
अनीकय़ोः संहतय़ोर्यदीय़ाद्व्राह्मणोऽन्तरा |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२०
भीष्म उवाच
अनीतिजं यद्यविधानजं सुखं; हठप्रणीतं विविधं प्रदृश्यते |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२२
भीष्म उवाच
अनीर्षवो न चान्योन्यं विहिंसन्ति कदाचन |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७१
भीष्म उवाच
अनीर्षुर्गुप्तदारः स्याच्चोक्षः स्यादघृणी नृपः |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३८
विदुर उवाच
अनीर्ष्युर्गुप्तदारः स्यात्संविभागी प्रिय़ंवदः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२३
वासुदेव उवाच
अनीर्ष्युर्दृढसम्भाषस्तस्मात्सर्वत्र पूजितः ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
अनीशत्वात्प्रलीय़न्ते सर्पा हतविषा इव ||
८५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
२
कृप उवाच
अनीशश्चावमानी च स शीघ्रं भ्रश्यते श्रिय़ः ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
अनीशस्याप्रमत्तस्य भूतानि पचतः सदा |
९४ क
सभा पर्व
अध्याय
५९
विदुर उवाच
अनीशेन हि राज्ञैषा पणे न्यस्तेति मे मतिः ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
अनीशेनेव राजेन्द्र सर्वमेतन्निरर्थकम् ||
१९ ग
सभा पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
अनीश्वरं विव्रुवन्त्वार्यमध्ये; युधिष्ठिरं तव पाञ्चालि हेतोः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८९
भीष्म उवाच
अनीश्वरः कथं मुच्येदित्येवं शत्रुकर्शन |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३८
व्यास उवाच
अनीश्वरः प्रशान्तात्म ततोऽर्छत्यमृतं पदम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९४
वसिष्ठ उवाच
अनीश्वरमतत्त्वं च तत्त्वं तत्पञ्चविंशकम् ||
४० ख
शल्य पर्व
अध्याय
३०
युधिष्ठिर उवाच
अनीश्वरश्च पृथिवीं कथं त्वं दातुमिच्छसि |
५५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६७
भीष्म उवाच
अनीश्वरा विनश्यामो भगवन्नीश्वरं दिश ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३२
भीष्म उवाच
अनीश्वरे वलं धर्मो द्रुमं वल्लीव संश्रिता |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३९
धृतराष्ट्र उवाच
अनीश्वरोऽय़ं पुरुषो भवाभवे; सूत्रप्रोता दारुमय़ीव योषा |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
अनु कृष्णं जय़ेमेति यैरुक्तं तत्र तैर्जितम् |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
अनु गङ्गां च वाकां च चित्रं यत्र वसाम्यहम् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
अनु जातश्च पितरं मातृपक्षं च वीर्यवान् |
२३ क