द्रोण पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
शून्यैश्च नगराकारैर्हतय़ोधध्वजै रथैः |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
शूर एव सहाय़ः स्यान्नेतरः प्राकृतो जनः ||
५२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७०
युधिष्ठिर उवाच
शूरं कापुरुषो हन्ति अय़शस्वी यशस्विनम् ||
५१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
शूरं वलवतां श्रेष्ठं कान्तरूपमकल्मषम् |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
विदुर उवाच
शूरं विगतसङ्ग्रामं गतपारं तपस्विनम् ||
५९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
शूरं शिखण्डिनः पुत्रं क्षत्रदेवमुदावहन् ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
१९
वासुदेव उवाच
शूरं सम्भावितं सन्तं नित्यं पुरुषमानिनम् |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८४
भीष्म उवाच
शूरः कृतज्ञः सत्यश्च श्रेय़सः पार्थ लक्षणम् ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
२५४
द्रौपद्यु उवाच
शूरः कृतास्त्रो मतिमान्मनीषी; प्रिय़ङ्करो धर्मसुतस्य राज्ञः ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
शूरः क्रोधवशानां च हिडिम्वस्य वकस्य च ||
२४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
शूरः क्लेशसहश्चैव प्रिय़श्च तव मानवः ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२२३
सारिसृक्व उवाच
शूरः प्राज्ञो वहूनां हि भवत्येको न संशय़ः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६६
धृतराष्ट्र उवाच
शूरः शारद्वतीपुत्रः सङ्ख्ये द्रोणादनन्तरः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१००
भीष्म उवाच
शूरः सर्वं पालय़ति सर्वं शूरे प्रतिष्ठितम् ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
५०
वृहदश्व उवाच
शूरः सर्वगुणैर्युक्तः प्रजाकामः स चाप्रजः ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
शूरमक्षुद्रकर्माणं निषिद्धजनमाश्रय़ेत् ||
५७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
शूरमानी न शूरस्त्वं मिथ्या वदसि भारत |
२५ क
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
शूरवाहुविसृष्टानां शक्तीनां भरतर्षभ |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१००
भीष्म उवाच
शूरवाहुषु लोकोऽय़ं लम्वते पुत्रवत्सदा |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
शूरव्यालसमाकीर्णां प्राणिवाणिजसेविताम् |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
विदुर उवाच
शूरश्च कृतविद्यश्च यश्च जानाति सेवितुम् ||
६४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०९
अङ्गिरा उवाच
शूरश्च वहुभार्यश्च कीर्तिमांश्चैव जाय़ते ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८१
भीष्म उवाच
शूरश्चार्यश्च विद्वांश्च प्रतिपत्तिविशारदः |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
शूरश्चैव कृतास्त्रश्च फल्गुनाभ्येति सात्यकिः ||
१७ ख
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
शूरसेना भद्रकारा वोधाः शाल्वाः पटच्चराः |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
शूरसेनाः कलिङ्गाश्च वोधा मौकास्तथैव च |
३८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
शूरसेनाश्च विक्रान्ताः सर्वे युधि निपातिताः ||
३६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
शूरसेनैः शूरवीरैर्युय़ुधुर्युद्धदुर्मदाः ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
शूरसेनो यदुश्रेष्ठः सन्निवासः सुय़ामुनः ||
८८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२२
द्रुपद उवाच
शूरस्य न सखा क्लीवः सखिपूर्वं किमिष्यते ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
शूरस्य राज्ञो दुहिता आजमीढकुलं गता ||
९० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११९
सञ्जय़ उवाच
शूरस्य शौरिर्नृवरो वसुदेवो महाय़शाः ||
७ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१९
गान्धार्यु उवाच
शूरस्य हि रणे कृष्ण यस्याननमथेदृशम् |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३१
कुन्त्यु उवाच
शूरस्योर्जितसत्त्वस्य सिंहविक्रान्तगामिनः |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३३
सञ्जय़ उवाच
शूरा गर्जन्ति सततं प्रावृषीव वलाहकाः |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७४
भीष्म उवाच
शूरा वहुविधाः प्रोक्तास्तेषामर्थांश्च मे शृणु |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
शूरा वा कातरा वापि भवन्ति नरपुङ्गव ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८
भीष्म उवाच
शूरा वीराश्च शतशः सन्ति लोके युधिष्ठिर |
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
शूरा हेममय़ैर्जालैर्दीप्यमाना इवाचलाः ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
शूराः पञ्चशता राजञ्शैनेय़ं समुपाद्रवन् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२८
सञ्जय़ उवाच
शूराः शूरैः समागम्य शरतोमरशक्तिभिः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
शूराच्छरणमिच्छन्तः पर्जन्यादिव जीवनम् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८७
भीष्म उवाच
शूराढ्यजनसम्पन्नं व्रह्मघोषानुनादितम् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
शूराणां गर्जतां राजन्सङ्क्रुद्धानाममर्षिणाम् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
१२७
वैशम्पाय़न उवाच
शूराणां च नदीनां च प्रभवा दुर्विदाः किल ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
शूराणां नामलव्धानां विदितानां समन्ततः |
९४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
शूराणां युध्यमानानां निघ्नतामितरेतरम् |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
शूराणां युध्यमानानां निघ्नतामितरेतरम् |
१४ क
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
शूराणां युध्यमानानां सिंहानामिव नर्दताम् ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
शूराणां समरे तत्र समासाद्य परस्परम् ||
८० ख