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शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
स चेन्ममार सृञ्जय़ चतुर्भद्रतरस्त्वय़ा |
६३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
स चेन्ममार सृञ्जय़ चतुर्भद्रतरस्त्वय़ा |
७३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
स चेन्ममार सृञ्जय़ चतुर्भद्रतरस्त्वय़ा |
८६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
स चेन्ममार सृञ्जय़ चतुर्भद्रतरस्त्वय़ा |
९२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
स चेन्ममार सृञ्जय़ चतुर्भद्रतरस्त्वय़ा |
९७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
स चेन्ममार सृञ्जय़ चतुर्भद्रतरस्त्वय़ा |
१०३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
स चेन्ममार सृञ्जय़ चतुर्भद्रतरस्त्वय़ा |
११२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
स चेन्ममार सृञ्जय़ चतुर्भद्रतरस्त्वय़ा |
१२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
स चेन्ममार सृञ्जय़ चतुर्भद्रतरस्त्वय़ा |
१२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
स चेन्ममार सृञ्जय़ चतुर्भद्रतरस्त्वय़ा |
१३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३३
महेश्वर उवाच
स चेन्मानुषतां गच्छेद्यदि कालस्य पर्ययात् |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३३
महेश्वर उवाच
स चेन्मानुषतां याति मेधावी तत्र जाय़ते |
४८ क
वन पर्व
अध्याय १८८
मार्कण्डेय़ उवाच
स चेमं सङ्कुलं लोकं प्रसादमुपनेष्यति ||
९१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ७
विदुर उवाच
स चैतत्प्राप्नुते राजन्यत्त्वं प्राप्तो नराधिप |
१६ क
वन पर्व
अध्याय १८८
वैशम्पाय़न उवाच
स चैतान्पुरुषव्याघ्र साम्ना परमवल्गुना |
२ क
आदि पर्व
अध्याय ११०
वैशम्पाय़न उवाच
स चैत्ररथमासाद्य वारिषेणमतीत्य च |
४३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
स चैनं प्रतिजग्राह विधिदृष्टेन कर्मणा |
९ क
वन पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
स चैनमनुवृत्ताभ्यां भुजाभ्यां प्रत्यगृह्णत ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४३
भीष्म उवाच
स चैव गामुद्दधाराग्र्यकर्मा; विक्षोभ्य दैत्यानुरगान्दानवांश्च ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३९
कर्ण उवाच
स चैव तत्र धर्मात्मा शश्वद्राजा युधिष्ठिरः |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
भीष्म उवाच
स चैव तस्मिन्निवसत्यनीशो; युगक्षय़े तमसा संवृतात्मा ||
३८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
स चैव निकृतिप्रज्ञः प्रावधीच्छरवृष्टिभिः ||
७६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
स चैव व्याहृते लोके मनुष्याणां शुभाशुभे ||
७३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५१
युधिष्ठिर उवाच
स चैवं पुरुषव्याघ्रः स्वर्गलोकमवाप्तवान् ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
स चोच्छिष्टभृतः काको वैश्यपुत्रैः कुमारकैः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
स चोदितो मदस्रावी भगदत्तेन वारणः |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
भीष्म उवाच
स चोपदेशः कर्तव्यो येन धर्ममवाप्नुय़ात् ||
६९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
स चोपातिष्ठत तदा पन्नगानां पराय़णम् ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
स चोवाच नृपस्तस्मै यदागमनकारणम् ||
४६ ख
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
स च्छाद्यमानः समरे धर्मपुत्रस्य साय़कैः |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
स च्छाद्यमानः समरे सूतपुत्रेण पाण्डवः |
८१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
स च्छाद्यमानो वहुधा पुत्रैस्तव विशां पते |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
स च्छाद्यमानो वहुभिः शरैः संनतपर्वभिः |
४८ क
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
स च्छित्त्वा सगुणं चापं रणे तस्य महात्मनः |
३६ क
शल्य पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
स च्छिन्नं मुसलं दृष्ट्वा द्रौणिः परमकोपनः |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
स च्छिन्नः पतितो भूमौ पार्थवाणैर्महाहवे |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
स च्छिन्नः सहसा भूमौ निपपात महानसिः |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
स च्छिन्नधन्वा कौरव्यः पुनरन्यन्महद्धनुः |
५३ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
स च्छिन्नधन्वा कौरव्यः पुनरन्यन्महद्धनुः |
४४ क
शल्य पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
स च्छिन्नधन्वा तेजस्वी रथशक्त्या सुतं तव |
४१ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
स च्छिन्नधन्वा विरथो हताश्वो हतसारथिः |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
स च्छिन्नधन्वा विरथो हताश्वो हतसारथिः |
२८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
स च्छिन्नधन्वा सङ्क्रुद्धः सृक्किणी परिसंलिहन् |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
स च्छिन्नधन्वा समरे खड्गमुद्यम्य नानदन् |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
स च्छिन्नधन्वा समरे गदां गुर्वीं महाय़शाः |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
स च्छिन्नय़ष्टिः सुमहाञ्शीर्यमाणो महाध्वजः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११६
युधिष्ठिर उवाच
स च्छेत्तव्यस्त्वय़ा राजन्भवान्कुलकरो हि नः ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४४
सञ्जय़ उवाच
स छाद्यमानः समरे गौतमेन यशस्विना |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
स छाद्यमानः समरे द्रौणिना युद्धदुर्मदः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
स छाद्यमानः समरे द्रौणिना राजसत्तम |
३६ क