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शान्ति पर्व
अध्याय २३०
व्यास उवाच
सर्गः कालो धृतिर्वेदाः कर्ता कार्यं क्रिय़ा फलम् |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
वसिष्ठ उवाच
सर्गकोटिसहस्राणि पतनान्तानि गच्छति ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९२
वसिष्ठ उवाच
सर्गकोटिसहस्राणि मरणान्तासु मूर्तिषु ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९४
वसिष्ठ उवाच
सर्गप्रलय़ एतावान्प्रकृतेर्नृपसत्तम |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०३
गुरुरु उवाच
सर्गप्रलय़कर्तारमव्यक्तं व्रह्म शाश्वतम् |
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९१
वसिष्ठ उवाच
सर्गप्रलय़धर्मिण्या असर्गप्रलय़ात्मकः |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय २९५
वसिष्ठ उवाच
सर्गप्रलय़धर्मित्वादव्यक्तं प्राहुरक्षरम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९५
वसिष्ठ उवाच
सर्गप्रलय़निर्मुक्तं विद्यां वै पञ्चविंशकम् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
सर्गप्रलय़योः कर्ता तस्मै कालात्मने नमः ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२४
युधिष्ठिर उवाच
सर्गश्च निधनं चैव कुत एतत्प्रवर्तते ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
सर्गस्य रक्षणार्थाय़ तस्मै मोहात्मने नमः ||
४८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
सर्गस्यादौ स्मृतो व्रह्मा प्रजासर्गकरः प्रभुः |
१०५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३२
श्रीभगवानु उवाच
सर्गाणामादिरन्तश्च मध्यं चैवाहमर्जुन |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३९
व्यास उवाच
सर्गे च प्रलय़े चैव तस्मान्निर्दिश्यते तथा ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
सर्गे सर्गे ह्यहं पुत्रस्तव त्रिगुणवर्जितः |
४० क
भीष्म पर्व
अध्याय ३६
श्रीभगवानु उवाच
सर्गेऽपि नोपजाय़न्ते प्रलय़े न व्यथन्ति च ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय १११
लोमश उवाच
सर्जानशोकांस्तिलकांश्च वृक्षा; न्प्रपुष्पितानवनाम्यावभज्य |
१६ क
वन पर्व
अध्याय २५९
रावण उवाच
सर्पकिंनरभूतेभ्यो न मे भूय़ात्पराभवः ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
सर्पदर्वीं समासाद्य नागानां तीर्थमुत्तमम् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
भीष्म उवाच
सर्पनिर्मोकमालाभिः कृतचिह्नकुटीमठम् ||
२९ ख
विराट पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
सर्पमाणमिवाकाशे वनं वहुलपादपम् ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय १७७
युधिष्ठिर उवाच
सर्पराज ततः श्रुत्वा प्रतिवक्ष्यामि ते वचः ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
सर्पवत्समवेष्टन्त सिंहभीता गजा इव ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३७
विदुर उवाच
सर्पश्चाग्निश्च सिंहश्च कुलपुत्रश्च भारत |
५५ क
आदि पर्व
अध्याय ४७
ऋत्विज ऊचुः
सर्पसत्रमिति ख्यातं पुराणे कथ्यते नृप ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय ४८
शौनक उवाच
सर्पसत्रविधानज्ञा विज्ञेय़ास्ते हि सूतज ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय ३३
सूत उवाच
सर्पसत्रविधानज्ञो राजकार्यहिते रतः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय ४८
शौनक उवाच
सर्पसत्रे तदा राज्ञः पाण्डवेय़स्य धीमतः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
सर्पसत्रे महाराज त्वय़ि तद्धि विधीय़ते ||
१९० ख
आदि पर्व
अध्याय १८
सूत उवाच
सर्पसत्रे वर्तमाने पावको वः प्रधक्ष्यति |
८ क
आदि पर्व
अध्याय १३
शौनक उवाच
सर्पसत्रेण सर्पाणां गतोऽन्तं तद्वदस्व मे ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
सर्पहस्तमनिर्देश्यं पाशहस्तमिवान्तकम् |
१३६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
सर्पा नागाश्च निषधे गोकर्णे च तपोधनाः ||
४८ ख
आदि पर्व
अध्याय १२
रुरुरु उवाच
सर्पा वा हिंसितास्तात किमर्थं द्विजसत्तम ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २६
व्राह्मण उवाच
सर्पाणां दशने भावः प्रवृत्तः पूर्वमेव तु ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
सर्पाणां प्रग्रहा यान्ति धृतराष्ट्रो यदेजति ||
१४२ ख
आदि पर्व
अध्याय २१
सूत उवाच
सर्पाणां सूर्यतप्तानां वारिणा त्वं प्लवो भव |
८ क
आदि पर्व
अध्याय ४७
सूत उवाच
सर्पानाजुहुवुस्तत्र सर्वानग्निमुखे तदा ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९४
मनुरु उवाच
सर्पान्कुशाग्राणि तथोदपानं; ज्ञात्वा मनुष्याः परिवर्जय़न्ति |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय ३५
सूत उवाच
सर्पान्वहूञ्जरत्कारौ नित्ययुक्तान्समादधत् ||
१२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४३
आस्तीक उवाच
सर्पाश्च भस्मसान्नीता गताश्च पदवीं पितुः ||
१३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
सर्पिः पय़श्च सुस्राव नाहुषस्य महात्मनः ||
३० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
सर्पिःपङ्का ह्रदा यत्र वहवश्चान्नपर्वताः |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय १३२
वैशम्पाय़न उवाच
सर्पिषा च सतैलेन लाक्षय़ा चाप्यनल्पय़ा |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १
भीष्म उवाच
सर्पेण दष्टं स्वं पुत्रमपश्यद्गतचेतनम् ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
सर्पोत्सर्गस्य शय़ने विषदानस्य भोजने |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १
भीष्म उवाच
सर्पोऽथार्जुनकं प्राह श्रुतं ते मृत्युभाषितम् |
५४ क
वन पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
सर्पय़ोनिमिमां प्राप्य कालाकाङ्क्षी महाद्युते ||
२४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३७
व्रह्मो उवाच
सर्व एते गुणा विप्रा राजसाः सम्प्रकीर्तिताः ||
१३ ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३६
व्रह्मो उवाच
सर्व एते गुणा विप्रास्तामसाः सम्प्रकीर्तिताः |
१६ क