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आदि पर्व
अध्याय ३७
सूत उवाच
सर्वथा वर्तमानस्य राज्ञो ह्यस्मद्विधैः सदा |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३५
श्रीभगवानु उवाच
सर्वथा वर्तमानोऽपि न स भूय़ोऽभिजाय़ते ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २८
श्रीभगवानु उवाच
सर्वथा वर्तमानोऽपि स योगी मय़ि वर्तते ||
३१ ख
विराट पर्व
अध्याय २४
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वथा विप्रनष्टास्ते नमस्ते भरतर्षभ ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७०
युधिष्ठिर उवाच
सर्वथा वृजिनं युद्धं को घ्नन्न प्रतिहन्यते |
५३ क
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वथा वृष्णिदारांस्तु वालवृद्धांस्तथैव च |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
सर्वथा व्राह्मणो मान्यो दैवतं विद्धि तत्परम् ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वथा संहतैरेव दुर्वलैर्वलवानपि |
६८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
सर्वथा सर्ववर्णैर्हि यष्टव्यमिति निश्चय़ः |
५१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३३
कापव्य उवाच
सर्वथा स्त्री न हन्तव्या सर्वसत्त्वेषु युध्यता |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२५
सञ्जय़ उवाच
सर्वथा हतमेवैतत्कौरवाणां महद्वलम् |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
सर्वथाहं तु राजेन्द्र करिष्ये वचनं तव |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
सर्वथाहमनुप्राप्तः सुकृच्छ्रं वत जीवितम् ||
७९ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वथैतदिह श्रुत्वा खड्गसाधनमुत्तमम् |
८७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १२
धृतराष्ट्र उवाच
सर्वथैव महाराज शरीरं धारय़ेदिह |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
सर्वदर्शी विमुक्तात्मा सर्वज्ञो ज्ञानमुत्तमम् ||
६१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६६
भीष्म उवाच
सर्वदा सर्वभूतेषु व्रह्माश्रमपदं भवेत् ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
सर्वदानफलं वापि नैतत्तुल्यमहिंसय़ा ||
३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९९
भीष्म उवाच
सर्वदानैर्गुरुतरं सर्वदानैर्विशिष्यते |
२१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३७
सञ्जय़ उवाच
सर्वदिक्षु व्यदृश्यन्त सूदय़न्तो नृप द्विपान् |
३२ क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
सर्वदुःखैः परित्यक्तो द्योतते शशिवत्सदा ||
१५१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वदेवनिकाय़ानां ये राजानः परिश्रुताः |
४९ क
सभा पर्व
अध्याय ११
युधिष्ठिर उवाच
सर्वदेवनिकाय़ाश्च सर्वशास्त्राणि चैव हि ||
४६ ख
विराट पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वदेवनिकाय़ाश्च सिद्धाश्च परमर्षय़ः |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
सर्वदेवमय़ोऽचिन्त्यो देवतात्मात्मसम्भवः |
१४४ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
सर्वदेवह्रदे स्नात्वा गोसहस्रफलं लभेत् |
३६ क
वन पर्व
अध्याय १८३
मार्कण्डेय़ उवाच
सर्वदेवैश्च विप्रर्षे संमितं श्रेष्ठमेव च |
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वदोषापहं पुण्यं पवित्रं च यशस्विनम् ||
५८ ख
सभा पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वद्रव्याण्युपजह्रुः सभाय़ां; सहस्रशः शिल्पिनश्चापि युक्ताः ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३०
श्रीभगवानु उवाच
सर्वद्वाराणि संय़म्य मनो हृदि निरुध्य च |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३६
श्रीभगवानु उवाच
सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाश उपजाय़ते |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६४
इन्द्र उवाच
सर्वधर्मपरं क्षत्रं लोकज्येष्ठं सनातनम् |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६४
भीष्म उवाच
सर्वधर्मप्रधानानां त्वं गतिर्मधुसूदन ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय २०६
युधिष्ठिर उवाच
सर्वधर्मभृतां श्रेष्ठ कथितं द्विजसत्तम ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय ४५
सूत उवाच
सर्वधर्मविदः प्राज्ञा राजानं जनमेजय़म् ||
५ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वधर्मविदः शूराः सत्यागमपराय़णाः |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय १०२
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वधर्मविदां भीष्मः पुराणां गजसाह्वय़म् ||
२२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वधर्मविदाचार्यो नान्विषत्सततं सुतम् ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
सर्वधर्मविशेषज्ञः पिता देवव्रतस्तव |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
सर्वधर्मविशेषज्ञः पिता देवव्रतस्तव |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २००
भीष्म उवाच
सर्वधर्मविशेषज्ञः पुण्यकीर्तिर्महाय़शाः |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३५
कुन्त्यु उवाच
सर्वधर्मविशेषज्ञां स्नुषां पाण्डोर्महात्मनः |
११ क
सभा पर्व
अध्याय ६३
द्रौपद्यु उवाच
सर्वधर्मानुगः श्रीमानदासोऽस्तु युधिष्ठिरः ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४०
श्रीभगवानु उवाच
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज |
६६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२९
उमो उवाच
सर्वधर्मार्थतत्त्वज्ञ देवदेव वदस्व मे |
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५६
भीष्म उवाच
सर्वधर्माविरुद्धं च योगेनैतदवाप्यते ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय १९७
स्त्र्यु उवाच
सर्वधर्मेषु च रतस्तं देवा व्राह्मणं विदुः ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०७
गुरुरु उवाच
सर्वधर्मेषु धर्मज्ञा ज्ञापय़न्ति गुणानिमान् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६२
भीष्म उवाच
सर्वधर्मोपपन्नस्य सम्भूतस्य कृतात्मनः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वधर्मोपपन्नानां त्वं गतिः पुरुषोत्तम ||
४९ ख