शान्ति पर्व
अध्याय
३२८
श्रीभगवानु उवाच
सर्वे च्यवनधर्माणः प्रतिवुद्धस्तु श्रेष्ठभाक् ||
३१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
सर्वे जानपदाश्चैव तव कर्माणि पाण्डव |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६६
भीष्म उवाच
सर्वे जितमहीपाला दिग्जय़े भरतर्षभ ||
२२ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१६८
भीष्म उवाच
सर्वे तत्र गमिष्यामो यत एवागता वय़म् ||
११ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे तत्र समाजग्मुः सिद्धाश्च परमर्षय़ः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८९
भीष्म उवाच
सर्वे तथा न जीवेय़ुर्न कुर्युः कर्म चेदिह |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे तमनुवर्तन्ते ऋते विदुरमच्युत ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७
भीष्म उवाच
सर्वे तस्यादृता धर्मा यस्यैते त्रय़ आदृताः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०९
भीष्म उवाच
सर्वे तस्यादृता लोका यस्यैते त्रय़ आदृताः |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
सर्वे तु प्रतिसंरव्धा ह्रीमन्तः सत्त्वचोदिताः |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६०
भीष्म उवाच
सर्वे ते चापि भर्तव्या नरा ये वहुभारिणः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
सर्वे ते परमात्मानं पूजय़न्ति पुनः पुनः ||
११२ ख
वन पर्व
अध्याय
२३०
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे ते प्राद्रवन्सङ्ख्ये धार्तराष्ट्रस्य पश्यतः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
३६
भीमसेन उवाच
सर्वे ते प्रिय़मिच्छन्ति वान्धवाः सह सृञ्जय़ैः |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
सर्वे ते विवुधश्रेष्ठ नातिक्रामन्ति भूमिदम् ||
५४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
सर्वे ते वै गतिं यान्तु अभिमन्योर्यशस्विनः ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
सर्वे ते व्यथिताः सैन्यास्त्वदीय़ा भरतर्षभ |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३२
विदुरो उवाच
सर्वे ते शत्रवः सह्या न चेज्जीवितुमिच्छसि |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
सर्वे ते स्म व्यतिष्ठन्त रक्षन्तस्तं महारथम् ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११८
नारद उवाच
सर्वे ते ह्यावृतज्ञाना नाभ्यजानन्त तं नृपम् |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
सर्वे तेजस्विनः शूराः सर्वे चाहतलक्षणाः ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे त्यक्त्वात्मनः प्राणान्युद्ध्वा वीरा महाहवे |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
सर्वे त्यागा राजधर्मेषु दृष्टाः; सर्वा दीक्षा राजधर्मेषु चोक्ताः |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय
१०८
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे त्वतिरथाः शूराः सर्वे युद्धविशारदाः ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
सर्वे त्वन्ये महीपालाः प्रेक्षका इव भारत |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
सर्वे त्वां पूजय़िष्यन्ति शिष्या गुरुमिव प्रिय़म् ||
१२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
सर्वे त्वां शूर इत्येव जना जल्पन्ति संसदि |
१९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
सर्वे त्वात्ययिकाः कालाः कार्याणां भरतर्षभ |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
सर्वे दध्मुर्महाशङ्खाञ्शूराः परिघवाहवः |
१०७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
सर्वे दध्मुर्महाशङ्खान्सिंहनादांश्च नेदिरे ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
सर्वे दध्मुर्महाशङ्खान्हेमजालपरिष्कृतान् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
सर्वे दाक्षाय़णीपुत्राः प्राजापत्या महावलाः |
६२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९५
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे दिव्यास्त्रविदुषः सर्वे युद्धाभिनन्दिनः ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे दिव्यास्त्रविद्वांसः सर्वे धर्मपराय़णाः |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७१
भगवानु उवाच
सर्वे दुर्योधनं तत्र निन्दन्ति स्म सभासदः ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे देवनिकाय़ा हि नालं योधय़ितुं स्म तान् ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१९
वदान्य उवाच
सर्वे देवमुपासन्ते रूपिणः किल तत्र ह |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५०
नारद उवाच
सर्वे देवा मर्त्यसञ्ज्ञाविशिष्टाः; सर्वे मर्त्या देवसञ्ज्ञाविशिष्टाः |
४० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७६
भीष्म उवाच
सर्वे देवाः प्रमोदन्ते पूर्ववृत्तास्ततः प्रजाः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५०
नारद उवाच
सर्वे देवाः प्राणिनां प्राणनान्ते; गत्वा वृत्ताः संनिवृत्तास्तथैव |
३८ क
वन पर्व
अध्याय
१८१
मार्कण्डेय़ उवाच
सर्वे देवैः समाय़ान्ति स्वच्छन्देन नभस्तलम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५३
भीष्म उवाच
सर्वे दोषास्तथा लोभात्तस्माल्लोभं विवर्जय़ेत् ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
सर्वे द्रोणरथं प्राप्य पाञ्चालाः पण्डवैः सह |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
सर्वे धनुषि विक्रान्ता व्रह्मण्याः सत्यवादिनः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
सर्वे धर्मपराश्चासन्सर्वे सततसत्रिणः ||
५६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
६३
धृतराष्ट्र उवाच
सर्वे धर्मविदो ह्येते तुल्यस्नेहाश्च भारत ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
सर्वे धर्मा राजधर्मप्रधानाः; सर्वे धर्माः पाल्यमाना भवन्ति |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
सर्वे धर्माः सोपधर्मास्त्रय़ाणां; राज्ञो धर्मादिति वेदाच्छृणोमि ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे धर्मार्थकुशलाः सर्वे भूतहिते रताः ||
५० ग
शान्ति पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
सर्वे धर्माश्चाश्रमाणां गताः स्युः; क्षात्रे त्यक्ते राजधर्मे पुराणे ||
२८ ख