आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२२
व्राह्मण उवाच
सूक्ष्मेऽवकाशे सन्तस्ते न पश्यन्तीतरेतरम् |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
१८७
युधिष्ठिर उवाच
सूक्ष्मो धर्मो महाराज नास्य विद्मो वय़ं गतिम् |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
सूक्ष्मो विवादो विप्राणां स्थूलौ क्षात्रौ जय़ाजय़ौ ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
विदुर उवाच
सूक्ष्मोऽपि भारं नृपते स्यन्दनो वै; शक्तो वोढुं न तथान्ये महीजाः |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
सूक्ष्मय़ोनीनि भूतानि तर्कगम्यानि कानिचित् |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
सूचकाः सन्धिभेत्तारः परवृत्त्युपजीवकाः |
६६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
सूचकाश्च परेषां ये ते वै निरय़गामिनः ||
६२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
सूची पद्मस्य मध्यस्थो गूढो व्यूहः पुनः कृतः ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
सूचीमुखमनीकं स्यादल्पानां वहुभिः सह |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
सूचीमुखमनीकं स्यादल्पानां वहुभिः सह ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
सूचीमुखे महेष्वासः कृतवर्मा व्यवस्थितः ||
२४ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
सूचीमुखैस्तथा प्रेतैर्विन्ध्यशैलोपमैर्वृतम् ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय
३०
युधिष्ठिर उवाच
सूच्यग्रं नात्यजः पूर्वं स कथं त्यजसि क्षितिम् ||
६० ख
शल्य पर्व
अध्याय
३०
युधिष्ठिर उवाच
सूच्यग्रेणापि यद्भूमेरपि ध्रीय़ेत भारत |
५९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१०
गुरुरु उवाच
सूच्या सूत्रं यथा वस्त्रे संसारय़ति वाय़कः |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
३६
भीमसेन उवाच
सूच्येवाञ्जनचूर्णस्य किमिति प्रतिपालय़ेत् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
सूत तस्य गृहे शव्धो नाद्य द्रौणेर्यथा पुरा ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२६
युधिष्ठिर उवाच
सूत राजा धृतराष्ट्रः कुरुभ्यो; न सोऽस्मरद्विदुरं पुत्रकाम्यात् ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
सूतं तु सूतपुत्रस्य सुपुङ्खैर्निशितैः शरैः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
सूतं ध्वजं च समरे रथोपस्थादपातय़त् ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
सूतं ध्वजमथो राजंस्तुरगानाय़ुधं तथा |
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
सूतं रथादञ्जलिकेन पात्य; जघान चाश्वाञ्जनमेजय़स्य |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४६
सञ्जय़ उवाच
सूतः सञ्चोदय़ामास युय़ुधानरथं प्रति ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
शल्य उवाच
सूतपुत्र कथं नु त्वं पाण्डवानवमन्यसे |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय
५
शौनक उवाच
सूतपुत्र यथा तस्य भार्गवस्य महात्मनः |
१० क
विराट पर्व
अध्याय
६४
उत्तर उवाच
सूतपुत्रं च भीष्मं च चकार विमुखाञ्शरैः ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
७१
वृहदश्व उवाच
सूतपुत्रं च वार्ष्णेय़ं वाहुकं च तथाविधम् ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रं च संरव्धं पश्य कृष्ण महारणे |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रं चतुःषष्ट्या विद्ध्वा सिंह इवानदत् ||
६५ ख
वन पर्व
अध्याय
२३०
वैशम्पाय़न उवाच
सूतपुत्रं जिघांसन्तः समन्तात्पर्यवारय़न् ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रं तथा द्रोणं सहपुत्रं जय़द्रथम् |
५७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रं महावाहुः सर्वसैन्यस्य पश्यतः ||
५९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रं महेष्वासं वन्धुमात्ययिकेष्विव ||
१३ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रं समाभाष्य सौवलं च महावलम् ||
३ ख
सभा पर्व
अध्याय
७२
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रं सुमन्दात्मा निर्लज्जः प्रातिकामिनम् ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रं सुसंरव्धं दृष्ट्वा चैव महारणे ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रमथोवाच मद्राणामीश्वरो विभुः ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्ररथं कृष्ण वाहय़न्वहु शोभते ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रवधाकाङ्क्षी त्वरमाणः पराक्रमी ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
सूतपुत्रश्च राधेय़ो गुरुं द्रोणमिय़ात्तदा |
४७ क
सभा पर्व
अध्याय
४४
शकुनिरु उवाच
सूतपुत्रश्च राधेय़ो गौतमश्च महारथः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रस्तु सङ्क्रुद्धो लघुहस्तः प्रतापवान् |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रस्त्वसम्भ्रान्तो रुद्रोपेन्द्रेन्द्रविक्रमः |
४६ क
शल्य पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रस्य निधने जय़ं लव्ध्वा च मारिष ||
४१ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रस्य संरम्भाद्दीप्तं वपुरजाय़त ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
युधिष्ठिर उवाच
सूतपुत्रस्य सङ्ग्रामे कार्यस्तेजोवधस्त्वय़ा ||
८१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रस्य सङ्ग्रामे सारथ्यं कर्तुमुत्सहे ||
३८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रात्परीप्सन्तः कर्णमभ्यर्दय़ञ्शरैः ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९४
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रे च राधेय़े पर्याप्तं तन्निदर्शनम् ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
सूतपुत्रे महेष्वासे दर्शय़ात्मानमात्मना |
४९ क