वन पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
सव्यानि च विचित्राणि दक्षिणानि च सर्वशः ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
१२८
लोमश उवाच
सव्ये पाणौ गृहीत्वा तु याजकोऽपि स्म कर्षति ||
३ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
सव्ये भुजाग्रे वलवान्नाराचेन हसन्निव |
४३ क
आदि पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
सव्येन च कटीदेशे गृह्य वाससि पाण्डवः |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
सव्येन पाणिना भीमः प्रहसन्निव भारत ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
सव्येऽभूत्कृतवर्मा च त्रिगर्तैः परिवारितः |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९६
भीष्म उवाच
सव्रणो नाभिहन्तव्यो नानपत्यः कथञ्चन ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२८
श्रीभगवानु उवाच
सव्रह्मकाः सरुद्राश्च सेन्द्रा देवाः सहर्षिभिः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
सव्रह्मकानां लोकानामृषीणां च महात्मनाम् ||
८४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
नकुल उवाच
सव्रह्मचर्यं स्वं गोत्रं समाख्याय़ परस्परम् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
सव्रह्मचारी तद्देश्यः सखा तस्यैव सुप्रिय़म् |
३९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
सव्रह्मदण्डप्रतिमाममोघां; ससर्ज यत्तो युधि धर्मराजः ||
४२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
पुरोहित उवाच
सव्रीडं वै भवति हि मनो मे हसता त्वय़ा |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
सव्रीडो भविता सद्यो येनासीह प्रवेशितः ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
सशक्तिप्रासतूणीरानश्वारोहान्हय़ानपि |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२५२
द्रौपद्यु उवाच
सशङ्खघोषः सतलत्रघोषो; गाण्डीवधन्वा मुहुरुद्वमंश्च |
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
सशङ्खैर्वेणुनिर्घोषैर्दिशः सर्वा व्यनादय़न् ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५९
सञ्जय़ उवाच
सशरः कवची खड्गी धन्वी च परतापनः |
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७२
व्रह्मो उवाच
सशरीरा हि तान्यान्ति व्राह्मणाः शुभवृत्तय़ः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
व्राह्मण उवाच
सशरीरेण गन्तव्यो मय़ा स्वर्गो न वा विभो ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२४
भीष्म उवाच
सशरीरो गतश्चैव व्रह्मलोकं नृपोत्तमः ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय
२४६
व्यास उवाच
सशरीरो भवान्गन्ता स्वर्गं सुचरितव्रत ||
२९ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
सशव्दमभवद्व्योम ज्वालामालाकुलं भृशम् |
१० क
वन पर्व
अध्याय
१५०
वैशम्पाय़न उवाच
सशष्पकवलैः श्रीमान्पथि दृष्टो द्रुतं यय़ौ ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
सशष्पकवलैः स्वस्थैरदूरपरिवर्तिभिः |
२८ क
सभा पर्व
अध्याय
७१
वैशम्पाय़न उवाच
सशस्त्ररथपादाता भोगवन्तश्च पुत्रकाः ||
४७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
सशालस्कन्धसरलं त्रस्तवानरवारणम् |
७४ क
वन पर्व
अध्याय
२१
वासुदेव उवाच
सशाल्वं सौभनगरं हत्वा द्रष्टास्मि वः पुनः |
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
सशूलमिव हर्यक्षं वने मत्तमिव द्विपम् |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
सशृङ्गमिव कैलासं सवज्रमिव वासवम् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३१
भीष्म उवाच
सशेषकारिणस्तात शेषं पश्यन्ति सर्वतः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
सशेषत्वान्महावाहो भीमस्य पुरुषोत्तम ||
७३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
सशैलसागरवनां नानाजनपदाकुलाम् |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
सशैला सार्णवद्वीपा सपाताला विशां पते ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३७
वैशम्पाय़न उवाच
ससंशय़ान्हेतुवलान्नाध्यावसति माधवः ||
६६ ख
विराट पर्व
अध्याय
५३
अर्जुन उवाच
ससंहाराणि दिव्यानि सर्वाण्यस्त्राणि मारिष |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९५
वसिष्ठ उवाच
ससङ्गय़ाहं निःसङ्गः स्थितः कालमिमं त्वहम् ||
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
ससञ्ज्ञो भैक्ष्यवृत्तिश्च स राजन्केतनक्षमः ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२३
श्रीकृष्ण उवाच
ससत्त्वा गतसत्त्वाश्च प्रभय़ा परय़ा युताः |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३९
व्रह्मो उवाच
ससप्तदशकेनापि राशिना युज्यते हि सः |
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
१०५
लोमश उवाच
ससमुद्रवनद्वीपा सनदीनदकन्दरा |
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
ससम्भ्रमं हृषीकेशमुत्थाप्य प्रणतं तदा |
११३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
ससम्भ्रमस्ततस्तूर्णमवप्लुत्य रथोत्तमात् |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
ससम्भ्रमो महाराज संशय़ं परमं गतः |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
ससर्ज चान्नानि तथा देवतानां यथाविधि ||
२१ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
ससर्ज तोमरं भीमः प्रत्यमित्राय़ यत्नवान् ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय
१८१
मार्कण्डेय़ उवाच
ससर्ज धर्मतन्त्राणि पूर्वोत्पन्नः प्रजापतिः ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
२३३
वैशम्पाय़न उवाच
ससर्ज निशितान्वाणान्खचरान्खचरान्प्रति ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३७
वैशम्पाय़न उवाच
ससर्ज पुत्रार्थमुदारतेजा; व्यासं महात्मानमजः पुराणः ||
५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
ससर्ज भगवान्यत्र सर्वलोकपितामहः |
२१ क