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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
तासां नादः प्रादुरासीत्तदानीं; वैचित्रवीर्ये नृपतौ प्रय़ाते ||
४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
तासां नादो रुदतीनां तदासी; द्राजन्दुःखात्कुररीणामिवोच्चैः |
११ क
वन पर्व
अध्याय २२२
वैशम्पाय़न उवाच
तासां नाम च रूपं च भोजनाच्छादनानि च |
४६ क
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
तासां पुत्रः कथं धर्मं मद्रको वक्तुमर्हति ||
८५ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १४८
वासुदेव उवाच
तासां प्रमुखतो भीष्मस्तालकेतुर्व्यरोचत |
५ ख
आदि पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
तासां मां मेनका नाम व्रह्मय़ोनिर्वराप्सराः |
६८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
तासां मे पतय़ः सप्त विख्यातास्तान्निवोधत |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०४
चण्डाल उवाच
तासां मे रजसा ध्वस्तं भैक्षमासीन्नराधिप ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तासां यातमृषय़ोऽनुप्रय़ान्ति; देवा मनुष्याः क्षितिमाचरन्ति ||
६७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८२
भीष्म उवाच
तासां रूपं भारत नोत शक्यं; तेजस्वित्वाल्लाघवाच्चैव वक्तुम् ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १
भीष्म उवाच
तासां विकृतय़ो याश्च सर्वं कालात्मकं स्मृतम् ||
४७ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
तासां विक्रोशमानानामार्तानां कुरुसङ्क्षय़े |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
तासां विदित्वा भावं तं मातॄणां भगवान्प्रभुः |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
तासां विभ्रष्टलज्जानां निर्लज्जानां ततस्ततः |
८६ ख
आदि पर्व
अध्याय ११३
वैशम्पाय़न उवाच
तासां व्युच्चरमाणानां कौमारात्सुभगे पतीन् |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३६
श्रीभगवानु उवाच
तासां व्रह्म महद्योनिरहं वीजप्रदः पिता ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८०
व्यास उवाच
तासां शृङ्गाण्यजाय़न्त यस्या यादृङ्मनोगतम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय २५९
मार्कण्डेय़ उवाच
तासां स भगवांस्तुष्टो महात्मा प्रददौ वरान् |
६ क
आदि पर्व
अध्याय १६९
वसिष्ठ उवाच
तासामन्यतमा गर्भं भय़ाद्दाधार तैजसम् |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७६
भीष्म उवाच
तासाममृतवर्णानां क्षरन्तीनां समन्ततः |
१९ क
मौसल पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
तासामासीन्महान्नादो दृष्ट्वैवार्जुनमागतम् ||
६ ख
सभा पर्व
अध्याय ६४
कर्ण उवाच
तासामेतादृशं कर्म न कस्याञ्चन शुश्रुमः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय २१९
मार्कण्डेय़ उवाच
तासामेव कुमारीणां पतय़स्ते प्रकीर्तिताः |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
तासामय़ं समारम्भो निवृत्तः केवलोऽफलः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६५
भीष्म उवाच
तासु ते पूजिता राज्ञा निषण्णा द्विजसत्तमाः |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३९
कर्ण उवाच
तासु पुत्राश्च पौत्राश्च मम जाता जनार्दन |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३९
कर्ण उवाच
तासु मे हृदय़ं कृष्ण सञ्जातं कामवन्धनम् ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय ११०
पाण्डुरु उवाच
तासु सर्वास्ववस्थासु त्यक्तसर्वेन्द्रिय़क्रिय़ः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६७
भीष्म उवाच
तास्तथा समय़ं कृत्वा समय़े नावतस्थिरे ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय २५९
मार्कण्डेय़ उवाच
तास्तदा तं महात्मानं सन्तोषय़ितुमुद्यताः |
४ क
सभा पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
तास्तदा प्रत्यभाषन्त रासभाः सर्वतोदिशम् ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय २०९
वैशम्पाय़न उवाच
तास्तदाप्सरसो राजन्नदृश्यन्त यथा पुरा ||
२२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५३
वासुदेव उवाच
तास्ता योनीः प्रविश्याहं प्रजानां हितकाम्यया ||
१५ ग
द्रोण पर्व
अध्याय १२६
सञ्जय़ उवाच
तास्ता विलपतश्चापि विदुरस्य महात्मनः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय २६४
मार्कण्डेय़ उवाच
तास्तु तामाय़तापाङ्गीं पिशाच्यो दारुणस्वनाः |
४६ क
मौसल पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
तास्तु दृष्ट्वैव कौरव्यो वाष्पेण पिहितोऽर्जुनः |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९
शल्य उवाच
तास्तु यत्नं परं कृत्वा पुनः शक्रमुपस्थिताः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
तास्तु षट्कृत्तिका गर्भं पुपुषुर्जातवेदसः |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
तास्तु सर्वा विशालाक्ष्यो रूपेणाप्रतिमा भुवि |
४२ क
वन पर्व
अध्याय ५७
वृहदश्व उवाच
तास्तु सर्वाः प्रकृतय़ो द्वितीय़ं समुपस्थिताः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७३
भीष्म उवाच
तास्तु सर्वाः समागम्य व्रह्माणममितौजसम् |
४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१८
शक्र उवाच
तास्ते पादं तितिक्षन्तामलमापस्तितिक्षितुम् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
तास्त्वं भजस्व सततं साधय़स्व यथागतम् ||
१३ ख
मौसल पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
तास्त्वनाथास्तदा नाथं पार्थं दृष्ट्वा विचुक्रुशुः ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६५
वैशम्पाय़न उवाच
तास्त्वां वय़ं प्रणम्येह याचामो मधुसूदन |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६४
भीष्म उवाच
तिक्तं च विरसं शाकं तपसा स्वादुतां गतम् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय २८७
वैशम्पाय़न उवाच
तिग्मतेजा महाप्रांशुः श्मश्रुदण्डजटाधरः ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय १८
सूत उवाच
तिग्मवीर्यविषा ह्येते दन्दशूका महावलाः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२३
वासुदेव उवाच
तितिक्षुरनवज्ञश्च तस्मात्सर्वत्र पूजितः ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
तित्तिरिर्याज्ञवल्क्यश्च ससुतो लोमहर्षणः |
१० क