वन पर्व
अध्याय
२४१
वैशम्पाय़न उवाच
सहाय़श्चानुरक्तश्च मदर्थं च समुद्यतः |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३७
द्रोण उवाच
सहाय़ा व्राह्मणा यस्य धृतिमन्तो जितेन्द्रिय़ाः |
२० क
सभा पर्व
अध्याय
४३
दुर्योधन उवाच
सहाय़ांश्च न पश्यामि तेन मृत्युं विचिन्तय़े ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
सहाय़ाः कारणं चैव षड्वर्गो नीतिजः स्मृतः ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११२
भीष्म उवाच
सहाय़ाननुरक्तांस्तु यतेतानुपसंहितान् |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
६
विदुर उवाच
सहाय़ानामेष सङ्ग्रहणेऽभ्युपाय़ः; सहाय़ाप्तौ पृथिवीप्राप्तिमाहुः ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५७
भीष्म उवाच
सहाय़ान्सततं कुर्याद्राजा भूतिपुरस्कृतः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
सहाय़ार्थं महाराज सङ्ग्रामोत्तममूर्धनि ||
५९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०७
वैशम्पाय़न उवाच
सहाय़ैरल्पकैः शूरः प्रय़यौ येन सागरम् ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
सहाय़ो घोषय़ात्राय़ां कस्तदासीत्सखा मम ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३२
वैशम्पाय़न उवाच
सहाय़ो येन सन्धाय़ मन्त्रय़ेय़ं यथा त्वय़ा ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३२
विदुरो उवाच
सहाय़ोपचय़ं कृत्वा व्यवसाय़्य ततस्ततः |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
सहाय़ोऽस्मि स्थितो युद्धे यदि भीतोऽसि पाण्डव |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
सहितं चारुसर्वाङ्ग्या पार्वत्या परमेश्वरम् ||
११५ ग
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
सहितः कामय़े लोकाँल्लुव्धेनादीर्घदर्शिना ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११५
धृतराष्ट्र उवाच
सहितः कृष्णभीमाभ्यां शिनीनामृषभेण च ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
सहितः पृतनाशूरै रथमुख्यैः प्रभद्रकैः ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
सहितः पृथिवीपालो भ्रातृभिस्तनय़ैस्तथा |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
सहितः सर्वतो यत्तैर्भवद्भिर्वसुधाधिपाः ||
१०६ ख
सभा पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
सहितः सर्वसैन्येन प्रामथत्कुरुनन्दनः ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
सहितः सर्वय़ोधैस्त्वं व्यूढानीकैः सुरक्षितः |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५२
सञ्जय़ उवाच
सहिता द्रौपदेय़ाश्च कर्णं यान्तु महारथाः ||
३४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७५
होत्रवाहन उवाच
सहिता भरतश्रेष्ठ निषेदुः परिवार्य तम् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
सहिता भ्रातरः पञ्च रथानामय़ुतेन च |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
सहिता भ्रातरस्तेऽथ राज्यं वुभुजिरे तदा ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
२२८
धृतराष्ट्र उवाच
सहिता वद्धनिस्त्रिंशा दहेय़ुः शस्त्रतेजसा ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
सहिता वरय़ामासुः सर्वलोकपितामहम् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
सहिता हि नरव्याघ्रा न शक्या जेतुमञ्जसा ||
२९ ख
सभा पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
सहितांस्तान्महाराज व्यजय़त्पाकशासनिः ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
सहिताः पाण्डवं सर्वे पीडय़न्तः समन्ततः ||
२५ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
सहिताः पाण्डवाः सर्वे कुरवश्च महारथाः ||
५७ ख
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
सहिताः प्रत्यपद्यन्त कुवेरसदनं प्रति ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२९
सञ्जय़ उवाच
सहिताः संन्यवर्तन्त द्रोणमेव द्विजर्षभम् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
सहिताः सर्वराजानः परिवव्रुः समन्ततः ||
६९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
सहिताः सर्वराजानः परिवव्रुः समन्ततः ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
सहिताः सर्वराजानः सिंहनादमथानदन् ||
७४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
सहिताः सर्वराजानो भगदत्तपरीप्सय़ा |
६३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
सहिताः सर्वसैन्येन भीष्ममाहवशोभिनम् ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
सहिताः साय़ुधाः शूराः शैलमारुरुहुस्तदा ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
सहितानभ्यवर्तन्त गुल्ममास्थाय़ मध्यमम् ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
सहितान्हि कुरून्सर्वानभिय़ातो धनञ्जय़ः |
३८ क
वन पर्व
अध्याय
५८
दमय़न्त्यु उवाच
सहितावेव गच्छावो विदर्भान्यदि मन्यसे ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
सहिताश्चाभ्यधावन्त ततस्ते मानवा द्रुतम् |
३६ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
सहितास्तव पुत्रेण सर्वे वै निधनं गताः ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९२
अग्निरु उवाच
सहितास्तात भोक्ष्यामो निवापे समुपस्थिते |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
सहितास्तावकास्तूर्णमभिपेतुर्धनञ्जय़म् ||
८२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६७
भीष्म उवाच
सहितास्तास्तदा जग्मुरसुखार्ताः पितामहम् |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
सहितास्ते निशाय़ां तु दुर्योधननिवेशने |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
सहितैर्नाम योद्धव्यमित्येष समय़ः कृतः |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
सहितो द्रोणभीष्माभ्यां नाकलोके महीय़ताम् ||
५६ ख