शान्ति पर्व
अध्याय
१७५
भीष्म उवाच
स एव भगवान्विष्णुरनन्त इति विश्रुतः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
२३
धृतराष्ट्र उवाच
स एव महतीं सेनां समावर्तय़दाहवे |
४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३९
व्यास उवाच
स एव मानुषे लोके धृतराष्ट्रः पतिस्तव ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
युधिष्ठिर उवाच
स एव मे वरः सत्य उद्योगे यस्त्वय़ा कृतः |
८१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३४
विदुर उवाच
स एव यत्नः कर्तव्यः स्वराष्ट्रपरिपालने ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७९
भीष्म उवाच
स एव राजा कर्तव्यस्तेन सर्वमिदं धृतम् ||
४३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३९
कर्ण उवाच
स एव राजा धर्मात्मा शाश्वतोऽस्तु युधिष्ठिरः |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
स एव राजा भूतानां सर्वेषामभवत्पिता ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७३
भीष्म उवाच
स एव राज्ञा कर्तव्यो राजन्राजपुरोहितः ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९७
मनुरु उवाच
स एव लुलिते तस्मिन्यथा रूपं न पश्यति |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
विदुर उवाच
स एव वन्धुस्तन्मित्रं सा गतिस्तत्पराय़णम् ||
३६ ख
मौसल पर्व
अध्याय
९
व्यास उवाच
स एव वलवान्भूत्वा पुनर्भवति दुर्वलः |
३४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११५
दिवोदास उवाच
स एव विभवोऽस्माकमश्वानामपि गालव |
६ क
वन पर्व
अध्याय
१८३
सनत्कुमार उवाच
स एव शक्रः शुक्रश्च स धाता स वृहस्पतिः ||
२२ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
स एव शव्दस्तद्रूपो वाससां निज्यतामिव ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
स एव सुभगो भूत्वा पुनर्भवति दुर्भगः |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय
१२२
द्रोण उवाच
स एव सुमहावुद्धिः साम्प्रतं प्रतिपत्स्यते ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०२
पितामह उवाच
स एव हि महाभागः सर्वलोकनमस्कृतः |
३३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९
भीष्म उवाच
स एव हि यदा तुष्टो वचसा प्रतिनन्दति |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९१
वसिष्ठ उवाच
स एव हृदि सर्वासु मूर्तिष्वातिष्ठतेऽऽत्मवान् |
३९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७५
भगवानु उवाच
स एव हेतुर्भूत्वा हि पुरुषस्यार्थसिद्धिषु |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५०
धृतराष्ट्र उवाच
स एव हेतुर्भेदस्य भीमो भीमपराक्रमः ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२१६
भीष्म उवाच
स एव ह्यस्तमय़ते स स्म विद्योतते दिशः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३४
भीष्म उवाच
स एवं गुरवे प्रीतिमुपहृत्य यथावलम् |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
भीष्म उवाच
स एवं चतुरो वर्णान्समुत्पाद्य महाय़शाः |
३३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
स एवं चिन्तय़ित्वा तु द्रोणपुत्रो विशां पते |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
६
सूत उवाच
स एवं च्यवनो जज्ञे भृगोः पुत्रः प्रतापवान् |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स एवं प्रतिसमादिश्योत्तङ्कं वेदः प्रवासं जगाम ||
८७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७७
भीष्म उवाच
स एवं विजय़ी राम भीष्मः कुरुकुलोद्वहः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
स एवं शन्तनुर्धीमान्देवराजर्षिसत्कृतः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११७
भीष्म उवाच
स एवं शरभस्थाने न्यस्तो वै मुनिना तदा |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६९
सञ्जय़ उवाच
स एवं सर्वधर्मज्ञो मित्रधर्ममनुस्मरन् |
५२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
भीष्म उवाच
स एवमनुशास्तस्तु याज्ञवल्क्येन धीमता |
९१ क
शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
स एवमनुसञ्चिन्त्य तस्मिन्कूपे महातपाः |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
स एवमभ्यनुज्ञातश्चक्रे सेनापतिं ततः |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
स एवमस्त्वित्युक्तः कुन्त्या ||
७१ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स एवमुक्त उपाध्याय़ं प्रत्युवाच |
४८ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स एवमुक्त उपाध्याय़िन्या प्रातिष्ठतोत्तङ्कः |
१०१ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स एवमुक्त उपाध्याय़ेन प्रत्युवाच |
४० क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स एवमुक्त उपाध्याय़ेन स्तोतुं प्रचक्रमे देवावश्विनौ वाग्भिरृग्भिः ||
५९ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स एवमुक्त उपाध्याय़ेनेष्टं देशं जगाम ||
३१ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स एवमुक्त उपाध्याय़ेनोपाध्याय़िनीमपृच्छत् |
९९ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स एवमुक्तः पुनरेव प्रत्युवाचैतौ |
७४ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स एवमुक्तः पौष्यस्तं प्रत्युवाच |
११२ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स एवमुक्तः प्रत्युवाच |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स एवमुक्तः प्रत्युवाच |
७२ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स एवमुक्तः प्रत्युवाच |
९३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
स एवमुक्तः सुहृदा वचो हितं; विचिन्त्य निःश्वस्य च दुर्मनाव्रवीत् |
२९ क
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
स एवमुक्तस्तत्पादौ मूर्ध्ना स्पृश्य जगाम ह ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स एवमुक्तस्तां क्षत्रिय़ां प्रत्युवाच |
१२० क