शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
सा तस्य हृदय़ं सङ्ख्ये विभेद शतधा नृप |
३९ क
वन पर्व
अध्याय
२९३
वैशम्पाय़न उवाच
सा तां कौतूहलात्प्राप्तां ग्राहय़ामास भामिनी |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५४
सञ्जय़ उवाच
सा तां माय़ां भस्म कृत्वा ज्वलन्ती; भित्त्वा गाढं हृदय़ं राक्षसस्य |
५७ क
वन पर्व
अध्याय
५०
वृहदश्व उवाच
सा तानद्भुतरूपान्वै दृष्ट्वा सखिगणावृता |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
२५२
वैशम्पाय़न उवाच
सा ताननुप्रेक्ष्य विशालनेत्रा; जिघृक्षमाणानवभर्त्सय़न्ती |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
१११
लोमश उवाच
सा तानि सर्वाणि विसर्जय़ित्वा; भक्षान्महार्हान्प्रददौ ततोऽस्मै |
१३ क
विराट पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
सा तानुवाच राजेन्द्र सैरन्ध्र्यहमुपागता |
४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
सा तानेकैकशः पुत्रान्संस्पृशन्ती पुनः पुनः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
२२४
वैशम्पाय़न उवाच
सा तान्कुशलिनः सर्वान्निर्मुक्ताञ्जातवेदसः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
२९०
वैशम्पाय़न उवाच
सा तान्दृष्ट्वा व्रीडमानेव वाला; सूर्यं देवी वचनं प्राह भीता |
२१ क
विराट पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
सा तामुवाच राजेन्द्र सैरन्ध्र्यहमुपागता |
८ क
वन पर्व
अध्याय
६०
वृहदश्व उवाच
सा तीव्रशोकसन्तप्ता मुहुर्निःश्वस्य विह्वला |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०
वासुदेव उवाच
सा तु कन्या तथेत्युक्त्वा पितरं धर्मचारिणी |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
सा तु कन्या महाराज प्रविश्याश्रममण्डलम् |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
२८९
वैशम्पाय़न उवाच
सा तु कन्या महाराज व्राह्मणं संशितव्रतम् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०
वासुदेव उवाच
सा तु कन्या यथाशापं नारदं तं ददर्श ह |
३० क
वन पर्व
अध्याय
२९१
वैशम्पाय़न उवाच
सा तु कन्या वहुविधं व्रुवन्ती मधुरं वचः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९६
मनुरु उवाच
सा तु चन्द्रमसो व्यक्तिर्न तु तस्य शरीरिणः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
११६
अकृतव्रण उवाच
सा तु चित्ररथं नाम मार्त्तिकावतकं नृपम् |
६ क
वन पर्व
अध्याय
६४
वृहदश्व उवाच
सा तु तं पुरुषं नारी कृच्छ्रेऽप्यनुगता वने |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८४
देवा ऊचुः
सा तु तेजःपरीताङ्गी कम्पमाना च जाह्नवी |
५७ क
आदि पर्व
अध्याय
१६५
गन्धर्व उवाच
सा तु तेषां वलान्नन्दी वलानां भरतर्षभ |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
सा तु दुःखार्णवं प्राप्य नः स्यादर्चय़तां भृशम् ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
१९७
मार्कण्डेय़ उवाच
सा तु दृष्ट्वा पतिं साध्वी व्राह्मणं व्यपहाय़ तम् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
सा तु दृष्ट्वैव पितरमभिवाद्याग्रतः स्थिता |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
सा तु ध्याता महाराज ऋषिभिः सत्रय़ाजिभिः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
१११
लोमश उवाच
सा तु नाव्याश्रमं चक्रे राजकार्यार्थसिद्धय़े |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
सा तु प्राप्य परं योगं गता स्वर्गमनुत्तमम् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५६
वासुदेव उवाच
सा तु भूमिगता पार्थ हता ससुतवान्धवा |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
१६८
अर्जुन उवाच
सा तु माय़ामय़ी वृष्टिः पीडय़ामास मां युधि |
१३ क
विराट पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
सा तु मुक्ता गदा गुर्वी कृपेण सुपरिष्कृता |
२५ क
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
सा तु मोघा गदा राजन्पतन्ती भीमचोदिता |
४५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
सा तु राजसुता स्मृत्वा भर्तुर्वचनमादितः |
५५ क
आदि पर्व
अध्याय
१००
वैशम्पाय़न उवाच
सा तु रूपं च गन्धं च महर्षेः प्रविचिन्त्य तम् |
२२ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१७
वैशम्पाय़न उवाच
सा तु लव्ध्वा पुनः सञ्ज्ञां विक्रुश्य च पुनः पुनः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६४
भीष्म उवाच
सा तु वद्धाञ्जलिं सत्यमय़ाचद्धरिणं पुनः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
सा तु विध्वस्तवपुषः कश्मलाभिहतौजसः |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५७
सञ्जय़ उवाच
सा तु वुद्धिः कृताप्येवं जाग्रति त्रिदशेश्वरे |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४०
धृतराष्ट्र उवाच
सा तु वुद्धिः कृताप्येवं पाण्डवान्प्रति मे सदा |
२९ क
वन पर्व
अध्याय
२२६
वैशम्पाय़न उवाच
सा तु वुद्धिवलेनेय़ं राज्ञस्तस्माद्युधिष्ठिरात् |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
सा तु वै त्वरितं गत्वा घूर्णिकासुरमन्दिरम् |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६४
भीष्म उवाच
सा तु शापपरित्रस्ता न स्वभावानुवर्तिनी ||
६ ग
वन पर्व
अध्याय
९४
लोमश उवाच
सा तु सत्यवती कन्या रूपेणाप्सरसोऽप्यति |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
सा तु सत्यवती नाम मत्स्यघात्यभिसंश्रय़ात् |
५५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५९
सञ्जय़ उवाच
सा तु सम्प्राप्य विश्रामं ध्वजिनी तव भारत |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
सा ते न व्यथते वुद्धिरचला तत्त्वदर्शिनी |
९० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
सा ते न व्यथते वुद्धिरचला तत्त्वदर्शिनी |
१०१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१८
शक्र उवाच
सा ते पादं तितिक्षेत समर्था हीति मे मतिः ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
२८५
सूर्य उवाच
सा ते प्राणान्समादाय़ गमिष्यति न संशय़ः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
सा ते समृद्धिर्यैरात्ता चपला प्रतिसारिणी |
२३ क