chevron_left  विश्वाभिःarrow_drop_down
अनुशासन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
विश्वाभिः स्तुतिभिर्देवं विश्वदेवं समस्तुवन् ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय १६५
गन्धर्व उवाच
विश्वामित्र इति ख्यातो वभूव रिपुमर्दनः ||
४ ख
मौसल पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
विश्वामित्रं च कण्वं च नारदं च तपोधनम् |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
विश्वामित्रं च दाय़ादं गाधिः कुशिकनन्दनः |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
विश्वामित्रं चाजनय़द्गाधेर्भार्या यशस्विनी |
४६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०४
नारद उवाच
विश्वामित्रं तपस्यन्तं धर्मो जिज्ञासय़ा पुरा |
८ क
आदि पर्व
अध्याय ६६
शकुन्तलो उवाच
विश्वामित्रं तपस्यन्तं मेनका भीरुराश्रमे ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५६
च्यवन उवाच
विश्वामित्रं तव कुले गाधेः पुत्रं सुधार्मिकम् |
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय १६५
गन्धर्व उवाच
विश्वामित्रं नरश्रेष्ठं प्रतिजग्राह पूजय़ा ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय १६५
गन्धर्व उवाच
विश्वामित्रः क्षत्रभावान्निर्विण्णो वाक्यमव्रवीत् ||
४१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
विश्वामित्रः शपेद्धि त्वां मा कृथास्त्वं विचारणाम् ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
विश्वामित्रः स्थूलशिराः संवर्तः प्रमतिर्दमः |
५ क
वन पर्व
अध्याय ८७
धौम्य उवाच
विश्वामित्रनदी पारा पुण्या परपुरञ्जय़ ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय १६५
गन्धर्व उवाच
विश्वामित्रभय़ोद्विग्ना वसिष्ठं समुपागमत् ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
विश्वामित्रममित्रघ्नमम्वरीषं महावलम् ||
१६७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
विश्वामित्र उवाच
विश्वामित्रमिति ख्यातं यातुधानि निवोध मे ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय १६५
गौरु उवाच
विश्वामित्रवलैर्घोरैर्भगवन्किमुपेक्षसे ||
२६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
विश्वामित्रवसिष्ठौ तावहन्यहनि भारत |
९ क
आदि पर्व
अध्याय १६४
गन्धर्व उवाच
विश्वामित्रविनाशाय़ न मेने कर्म दारुणम् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय २१५
मार्कण्डेय़ उवाच
विश्वामित्रश्चकारैतत्कर्म लोकहिताय़ वै |
११ क
आदि पर्व
अध्याय १६६
गन्धर्व उवाच
विश्वामित्रस्ततो रक्ष आदिदेश नृपं प्रति ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
भीष्म उवाच
विश्वामित्रस्ततो राजन्नित्युक्तो भरतर्षभ |
५७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०४
नारद उवाच
विश्वामित्रस्ततो राजन्स्थित एव महाद्युतिः ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०४
नारद उवाच
विश्वामित्रस्तमसकृद्गच्छ गच्छेत्यचोदय़त् ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय २१५
मार्कण्डेय़ उवाच
विश्वामित्रस्तु कृत्वेष्टिं सप्तर्षीणां महामुनिः |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११७
नारद उवाच
विश्वामित्रस्तु तं दृष्ट्वा गालवं सह पक्षिणा |
१४ क
वन पर्व
अध्याय २१५
मार्कण्डेय़ उवाच
विश्वामित्रस्तु प्रथमं कुमारं शरणं गतः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
भीष्म उवाच
विश्वामित्रस्तु मातङ्गमुवाच परिसान्त्वय़न् |
४७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०४
नारद उवाच
विश्वामित्रस्तु शिष्यस्य गालवस्य तपस्विनः |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
विश्वामित्रस्य चैवर्षेर्वसिष्ठस्य च भारत |
३ क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
विश्वामित्रस्य तत्रैव तीर्थं भरतसत्तम |
१२० क
आदि पर्व
अध्याय १६५
गन्धर्व उवाच
विश्वामित्रस्य तत्सैन्यं व्यद्रावय़त सर्वशः ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय ८५
वैशम्पाय़न उवाच
विश्वामित्रस्य तां दृष्ट्वा विभूतिमतिमानुषीम् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८१
पराशर उवाच
विश्वामित्रस्य पुत्रत्वमृचीकतनय़ोऽगमत् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
विश्वामित्रस्य पौत्रस्तु रैभ्यपुत्रो महातपाः |
४९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३
युधिष्ठिर उवाच
विश्वामित्रस्य विपुला नदी राजर्षिसेविता |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
विश्वामित्रस्य वै जन्म सोमसूर्याग्नितेजसः ||
६० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११२
नारद उवाच
विश्वामित्रस्य शिष्योऽभूद्वर्षाण्ययुतशो नृप ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
भीष्म उवाच
विश्वामित्रस्य संवादं चण्डालस्य च पक्कणे ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय १६५
गन्धर्व उवाच
विश्वामित्रस्य सङ्क्रुद्धैर्वासिष्ठैर्भरतर्षभ ||
३९ ख
आदि पर्व
अध्याय १६५
गन्धर्व उवाच
विश्वामित्रस्य सैन्यं तु काल्यमानं त्रिय़ोजनम् |
४० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
विश्वामित्रात्मजाः सर्वे मुनय़ो व्रह्मवादिनः ||
५८ ग
आदि पर्व
अध्याय १६४
गन्धर्व उवाच
विश्वामित्रापराधेन धारय़न्मन्युमुत्तमम् ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १८
गालव उवाच
विश्वामित्राभ्यनुज्ञातो ह्यहं पितरमागतः |
३८ क
वन पर्व
अध्याय ११०
लोमश उवाच
विश्वामित्राश्रमो रम्य एष चात्र प्रकाशते ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११७
नारद उवाच
विश्वामित्राय़ धर्मात्मन्षड्भिरश्वशतैः सह |
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
युधिष्ठिर उवाच
विश्वामित्रेण च पुरा व्राह्मण्यं प्राप्तमित्युत |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३
युधिष्ठिर उवाच
विश्वामित्रेण धर्मात्मन्व्राह्मणत्वं नरर्षभ |
२ क
वन पर्व
अध्याय १०९
लोमश उवाच
विश्वामित्रेण यत्रोग्रं तपस्तप्तमनुत्तमम् ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९४
भीष्म उवाच
विश्वामित्रो जमदग्निः साध्वी चैवाप्यरुन्धती ||
४ ख