भीष्म पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
नाराचं प्रेषय़ामास क्रुद्ध आशीविषोपमम् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
नाराचं विससर्जास्मै तं द्रौणिस्त्रिभिराच्छिनत् ||
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७५
वैशम्पाय़न उवाच
नाराचमग्निसङ्काशं प्राहिणोद्वारणं प्रति ||
१७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
कृष्ण उवाच
नाराचमाशीविषतुल्यवेग; माकर्णपूर्णाय़तमुत्ससर्ज ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
नाराचा निशिताः सङ्ख्ये सम्पतन्ति स्म भारत |
२७ क
सभा पर्व
अध्याय
४७
दुर्योधन उवाच
नाराचानर्धनाराचाञ्शस्त्राणि विविधानि च ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५४
विशोक उवाच
नाराचानां द्वे सहस्रे तु वीर; त्रीण्येव च प्रदराणां च पार्थ ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२२
दुर्योधन उवाच
नाराचान्गार्ध्रपक्षांश्च शकटानि वहन्तु ते |
६० क
कर्ण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
नाराचान्गार्ध्रपत्रांश्च शकटानि वहन्तु मे ||
५१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
नाराचाभिहतास्त्वन्ये तथा विद्धाश्च तोमरैः |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
नाराचेन सुतीक्ष्णेन निजघान पिता तव ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
नाराचेन सुतीक्ष्णेन भृशं मर्मण्यताडय़त् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
नाराचेन सुतीक्ष्णेन भृशं विद्ध्वा व्यकम्पय़त् |
४४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
नाराचेन सुतीक्ष्णेन मर्मदेशे समर्दय़त् ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
नाराचेन सुतीक्ष्णेन रुक्मपुङ्खेन संय़ुगे ||
४३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
नाराचेन सुतीक्ष्णेन विव्याध हृदय़े दृढम् ||
३५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
नाराचेन सुतीक्ष्णेन स हतो न्यपतद्भुवि ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
नाराचेन सुतीक्ष्णेन सर्वावरणभेदिना ||
३३ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
नाराचेनाभिनद्वक्षः सोऽपतद्भुवि सात्यकेः ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
नाराचेनोग्रवेगेन भित्त्वा मर्मण्यपातय़त् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
नाराचैः प्रतिविव्याध प्रेक्षमाणो महावलः ||
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
नाराचैः सप्तभिर्विद्ध्वा हृदि भीमं ननाद ह ||
४६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
नाराचैरच्छिनद्राजा सर्वानेव त्रिधा त्रिधा ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
नाराचैरतिविद्धानां शराणां रूपमावभौ |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
नाराचैरर्करश्म्याभैः कर्णं विव्याध चोरसि ||
५२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
नाराचैरर्करश्म्याभैः कर्मारपरिमार्जितैः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
नाराचैरर्करश्म्याभैर्भीमसेनं स्मय़न्निव ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
नाराचैरर्धचन्द्रैश्च क्षिप्रं पार्थो न्यपातय़त् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
नाराचैरर्धनाराचैर्भल्लैरज्ञलिकैरपि ||
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
नाराचैरहनन्नागान्नकुलः कुरनन्दन ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
नाराचैर्दशभिर्भीमस्तान्निहत्य तवात्मजान् |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५३
सञ्जय़ उवाच
नाराचैर्निशितैर्भल्लैः शरैश्चक्रैः परश्वधैः ||
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
नाराचैर्निहतश्चापि निपपात महागजः |
६१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
नाराचैर्यमदण्डाभैस्त्रिभिर्नागं शतेन च ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
नाराचैर्वत्सदन्तैश्च भुशुण्डीभिश्च भारत |
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
नाराचैर्वत्सदन्तैश्च वृष्ण्यन्धकमहारथौ |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
नाराचैर्वत्सदन्तैश्च शितैरञ्जलिकैस्तथा ||
३० ग
द्रोण पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
नाराचैर्वत्सदन्तैश्च सात्वतेन विदारिताः ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
नाराचैर्वहुभिः क्रुद्धः सर्वमर्मस्वताडय़त् ||
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
नाराचैर्वहुभिः क्षिप्रं वाह्वोरुरसि चार्पितः ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
नाराचैर्विमलैस्तीक्ष्णैर्गजानीकमपोथय़त् ||
२६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
नाराचैर्विमलैस्तीक्ष्णैर्दिशः प्राद्रावय़द्वली ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
नाराचैश्छिन्नवर्माणो भ्राजन्ते स्म गजोत्तमाः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
नाराचोऽभ्यपतत्कर्णं तूर्णं गाण्डीवचोदितः ||
८७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६७
भीष्म उवाच
नाराजकेषु राष्ट्रेषु वस्तव्यमिति वैदिकम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६७
भीष्म उवाच
नाराजकेषु राष्ट्रेषु हव्यमग्निर्वहत्यपि ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
नाराजा पार्थिवस्यापि सखिपूर्वं किमिष्यते ||
३७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५४
द्रुपद उवाच
नाराजा पार्थिवस्यापि सखिपूर्वं किमिष्यते ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२२
द्रुपद उवाच
नाराज्ञा सङ्गतं राज्ञः सखिपूर्वं किमिष्यते ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
महाभारत कथा
नाराय়णं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् |
० क