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शान्ति पर्व
अध्याय १९२
भीष्म उवाच
व्राह्मणं तं महाभागमुपागम्येदमव्रुवन् ||
२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२
भीष्म उवाच
व्राह्मणं तु ततो दृष्ट्वा सा स्त्री करुणमव्रवीत् |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४८
भीष्म उवाच
व्राह्मणं धार्मिकं चैत्यं ते कुर्वन्ति प्रदक्षिणम् ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८६
भीष्म उवाच
व्राह्मणं धार्मिकं चैव नित्यं कुर्यात्प्रदक्षिणम् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६६
धृतराष्ट्र उवाच
व्राह्मणं पितरं वृद्धमश्वत्थामा किमव्रवीत् ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय ३३
द्रौपद्यु उवाच
व्राह्मणं मे पिता पूर्वं वासय़ामास पण्डितम् |
५६ क
वन पर्व
अध्याय २८८
कुन्त्यु उवाच
व्राह्मणं यन्त्रिता राजनुपस्थास्यामि पूजय़ा |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २३
युधिष्ठिर उवाच
व्राह्मणं लिङ्गिनं चैव व्राह्मणं वाप्यलिङ्गिनम् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय ७१
शुक्र उवाच
व्राह्मणं वर्जय़ित्वैकं तस्माद्विद्यामवाप्नुहि ||
४७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४३
व्यास उवाच
व्राह्मणं विषय़ाश्लिष्टं जरामृत्यू न विन्दतः ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
व्राह्मणं वृत्तसम्पन्नमाहिताग्निं शुचिव्रतम् |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६७
अर्जुन उवाच
व्राह्मणं वृद्धमाचार्यं न्यस्तशस्त्रं यथा मुनिम् |
५० क
अनुशासन पर्व
अध्याय २५
भीष्म उवाच
व्राह्मणं स्वय़माहूय़ भिक्षार्थे कृशवृत्तिनम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६३
भीष्म उवाच
व्राह्मणः कुण्डधारस्य विस्मितश्चाभवन्नृप ||
४१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३०
शक्र उवाच
व्राह्मणः कुरुते तद्धि यथा यद्यच्च वाञ्छति ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८२
भरद्वाज उवाच
व्राह्मणः केन भवति क्षत्रिय़ो वा द्विजोत्तम |
१ क
वन पर्व
अध्याय १७७
सर्प उवाच
व्राह्मणः को भवेद्राजन्वेद्यं किं च युधिष्ठिर |
१५ क
वन पर्व
अध्याय ११५
भृगुरु उवाच
व्राह्मणः क्षत्रवृत्तिर्वै तव पुत्रो भविष्यति ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८०
भीष्म उवाच
व्राह्मणः क्षत्रिय़त्वं हि याति शस्त्रसमुद्यमात् ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
व्राह्मणः क्षत्रिय़श्चैव वैश्यः शूद्रस्तथैव च |
३२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३१
महेश्वर उवाच
व्राह्मणः क्षत्रिय़ो वैश्यः शूद्रत्वं याति तादृशः ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७७
भीष्म उवाच
व्राह्मणः क्षत्रिय़ो वैश्यः शूद्रश्चैव रणे यदि |
१३ क
वन पर्व
अध्याय ८०
पुलस्त्य उवाच
व्राह्मणः क्षत्रिय़ो वैश्यः शूद्रो वा राजसत्तम |
५१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४७
भीष्म उवाच
व्राह्मणः क्षत्रिय़ो वैश्यस्त्रय़ो वर्णा द्विजातय़ः |
७ क
वन पर्व
अध्याय २०६
व्राह्मण उवाच
व्राह्मणः पतनीय़ेषु वर्तमानो विकर्मसु |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३०
कुन्त्यु उवाच
व्राह्मणः प्रचरेद्भैक्षं क्षत्रिय़ः परिपालय़ेत् |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
व्राह्मणः शिल्पिनो गेहमभ्यगच्छत्पुरातिथिः |
४९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३१
महेश्वर उवाच
व्राह्मणः शूद्रतामेति नास्ति तत्र विचारणा ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय २०३
मार्कण्डेय़ उवाच
व्राह्मणः स पुनः सूक्ष्मं पप्रच्छ सुसमाहितः ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३०
शक्र उवाच
व्राह्मणः सर्वभूतानां मतङ्ग पर उच्यते |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६२
नारद उवाच
व्राह्मणः सर्वभूतानामतिथिः प्रसृताग्रभुक् |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
व्राह्मणः सर्वविद्योऽपि राजन्नार्हति केतनम् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणः सर्ववेदी स्यात्क्षत्रिय़ो विजय़ी भवेत् |
१०४ ख
आदि पर्व
अध्याय ११
डुण्डुभ उवाच
व्राह्मणः सौम्य एवेह जाय़तेति परा श्रुतिः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४०
श्रीभगवानु उवाच
व्राह्मणक्षत्रिय़विशां शूद्राणां च परन्तप |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०८
युधिष्ठिर उवाच
व्राह्मणक्षत्रिय़विशां शूद्राणां च परन्तप |
१ क
आदि पर्व
अध्याय १२४
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणक्षत्रिय़ाद्यं च चातुर्वर्ण्यं पुराद्द्रुतम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय २८४
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणच्छद्मना कर्ण कुण्डलापजिहीर्षय़ा ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२
भीष्म उवाच
व्राह्मणच्छद्मनाभ्येत्य तामिन्द्रोऽथान्वपृच्छत |
२९ क
वन पर्व
अध्याय २८४
कर्ण उवाच
व्राह्मणच्छद्मिने देव लोके गन्ता परां गतिम् ||
३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
व्राह्मणत्वं गतस्तात व्रह्मर्षित्वं तथैव च ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३१
महेश्वर उवाच
व्राह्मणत्वं शुभं प्राप्य दुर्लभं योऽवमन्यते |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६०
स्यूमरश्मिरु उवाच
व्राह्मणप्रभवो यज्ञो व्राह्मणार्पण एव च |
३३ क
आदि पर्व
अध्याय १५९
गन्धर्व उवाच
व्राह्मणप्रमुखं राज्यं शक्यं पालय़ितुं चिरम् ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४४
वासुदेव उवाच
व्राह्मणप्रमुखं वीर्यमाय़ुः कीर्तिर्यशो वलम् |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४४
वासुदेव उवाच
व्राह्मणप्रमुखं सौख्यं न मेऽत्रास्ति विचारणा ||
७ ख
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणप्रमुखा राजन्विधिदृष्टेन कर्मणा ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणप्रमुखा वर्णा इदं वचनमव्रुवन् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७९
भीष्म उवाच
व्राह्मणप्रमुखा वर्णाः क्षेममिच्छेय़ुरात्मनः ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय ८०
यय़ातिरु उवाच
व्राह्मणप्रमुखा वर्णाः सर्वे शृण्वन्तु मे वचः |
१६ क