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आदि पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
सारथिं चास्य दय़ितमपहस्तेन जघ्निवान् ||
३८ ख
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
सारथिं चास्य दय़ितमपहस्तेन जघ्निवान् ||
७७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य नवभिरिच्छन्भीष्मस्य जीवितम् ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य भल्लेन गाढं विव्याध मर्मणि ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४२
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य भल्लेन द्रुतं निन्ये यमक्षय़म् ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४३
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य भल्लेन ध्वजं च समपातय़त् |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य भल्लेन प्राहिणोद्यमसादनम् |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य भल्लेन प्रेषय़ामास मृत्यवे ||
६६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य भल्लेन भृशं क्रुद्धोऽभ्यताडय़त् ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४८
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य भल्लेन रथनीडादपातय़त् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य भल्लेन रथनीडादपातय़त् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य भल्लेन रथनीडादपातय़त् |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य भल्लेन रथनीडादपाहरत् ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य भल्लेन रथनीडादपाहरत् |
७५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य भल्लेन रथनीडादपाहरत् |
६१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य भल्लेन रथनीडादपाहरत् ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य भल्लेन वाह्वोरुरसि चार्पय़त् ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३०
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य भल्लेन स्मय़मानो न्यपातय़त् ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य राजेन्द्र शरैर्विव्यधतुः शितैः ||
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य विंशत्या स्वर्णपुङ्खैः शिलाशितैः |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य विव्याध त्वरमाणः पराक्रमी ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य समरे क्षिप्रहस्तो न्यपातय़त् |
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चास्य समरे शरेणानतपर्वणा |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय १५४
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चैव हैडिम्वः क्षिप्रमन्तरधीय़त ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
सारथिं चोदय़ामास याहि यत्र सुय़ोधनः ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
देवा ऊचुः
सारथिं तु न जानीमः कः स्यात्तस्मिन्रथोत्तमे ||
९९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
सारथिं त्रिभिरानर्च्छद्ध्वजमेकेषुणा ततः ||
१७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
सारथिं त्रिभिरानर्छत्तं च भूय़ो व्यविध्यत ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
सारथिं दशभिश्चास्य ध्वजं चैकेन चिच्छिदे ||
२३ ग
द्रोण पर्व
अध्याय १४६
सञ्जय़ उवाच
सारथिं पञ्चभिर्वाणै राजन्विव्याध संय़ुगे ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
सारथिं पातय़ामास क्षुरप्रेण महाय़शाः ||
२१ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
सारथिं पातय़ामास ध्वजं च सुपरिष्कृतम् ||
५४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
सारथिं पातय़ामास रथनीडाद्धसन्निव ||
८४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
सारथिं पातय़ामास शैनेय़स्य रथाद्द्रुतम् ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७१
सञ्जय़ उवाच
सारथिं प्रेषय़ामास यमस्य सदनं प्रति ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
सारथिं प्रेषय़ामास यमस्य सदनं प्रति ||
४० ग
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
सारथिं विशिखैश्चास्य दशभिः समकम्पय़त् ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६९
द्रोण उवाच
सारथिः प्रवरः कृष्णः शीघ्राश्चास्य हय़ोत्तमाः |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
सारथिर्यस्य वार्ष्णेय़ो गाण्डीवं यस्य कार्मुकम् |
५५ क
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
सारथिर्हेमसञ्छन्नाञ्शनैरश्वानचोदय़त् ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८९
भीष्म उवाच
सारथिश्च यथा युक्त्वा सदश्वान्सुसमाहितः |
३६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
सारथिस्तमपोवाह रथेन रथिनां वरम् |
५५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४२
सञ्जय़ उवाच
सारथिस्तमपोवाह समरे शरविक्षतम् ||
३१ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
सारथिस्त्वरमाणस्तु दुःशासनमचेतसम् |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
सारथी प्रवरौ चैव तय़ोरास्तां महावलौ ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
सारथे को न्वय़ं द्रोणः समग्रं क्षत्रमेव वा ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
सारथे याहि यत्रैष द्रोणस्तिष्ठति दंशितः |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
सञ्जय़ उवाच
सारथेश्च शिरः काय़ादहरच्छत्रुतापनः ||
४९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२१
सञ्जय़ उवाच
सारथेश्च शिरः काय़ाद्ध्वजं च समलङ्कृतम् ||
१३ ग
द्रोण पर्व
अध्याय १३७
सञ्जय़ उवाच
सारथेश्च शिरः काय़ाद्भल्लेन नतपर्वणा |
३० क