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शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
सारथेश्चास्य भल्लेन शिरः काय़ादपाहरत् ||
२० ग
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
सारथेस्तु रथस्थस्य काश्यपेय़स्य विस्मिताः ||
५२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८०
भीष्म उवाच
सारथ्यं कृतवांस्तत्र युय़ुत्सोरकृतव्रणः |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७
अर्जुन उवाच
सारथ्यं तु त्वय़ा कार्यमिति मे मानसं सदा |
३४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७
वासुदेव उवाच
सारथ्यं ते करिष्यामि कामः सम्पद्यतां तव ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय १६८
अर्जुन उवाच
सारथ्यं देवराजस्य तत्रापि कृतवानहम् ||
१८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
सारथ्यं यदि मे कुर्याद्ध्रुवस्ते विजय़ो भवेत् ||
५० ख
कर्ण पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
सारथ्यं रथिनां श्रेष्ठ सुमनाः कर्तुमर्हसि ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २५
दुर्योधन उवाच
सारथ्यमकरोत्तत्र यत्र रुद्रोऽभवद्रथी ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
व्रह्मो उवाच
सारथ्ये कल्पितो देवैरीशानस्य महात्मनः ||
१०८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
देवा ऊचुः
सारथ्ये तूर्णमारोह संय़च्छ परमान्हय़ान् ||
१०५ ग
वन पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
सारथ्ये फल्गुनस्याजौ तथेत्याह च तान्हरिः ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
सारथ्ये विनिय़ोगश्च मद्रराजस्य धीमतः |
१६९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
सारथ्येन च वार्ष्णेय़ भवता यद्धृता वय़म् ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५९
सञ्जय़ उवाच
सारथ्येन वृतः पार्थैरिति त्वं न विभेषि च ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
सारवद्वलमस्माकं दुष्प्रधर्षं दुरासदम् |
४६ क
सभा पर्व
अध्याय ६६
दुर्योधन उवाच
सारवद्विपुलं सैन्यं सत्कृत्य च दुरासदम् ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
सारसाः प्रतिदृश्यन्ते शैलप्रस्रवणेष्वपि ||
७५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
सारसाः शतपत्राश्च हंसाश्च मधुसूदनम् ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय २९६
वैशम्पाय़न उवाच
सारसानां च निर्ह्रादमत्रोदकमसंशय़म् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय १०७
लोमश उवाच
सारसानां च मधुरैर्व्याहृतैः समलङ्कृतम् ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
सारसाश्च मय़ूराश्च वाचो मुञ्चन्ति दारुणाः ||
२८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १८
गान्धार्यु उवाच
सारस्य इव वाशन्त्यः पतिताः पश्य माधव ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
सारस्वत इति ख्यातो भविष्यति महातपाः ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
सारस्वतं च ते लोकं गमिष्यन्ति न संशय़ः ||
११५ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३७
ऋषिरु उवाच
सारस्वतं च लोकं ते गमिष्यन्ति न संशय़ः ||
४९ ग
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
सारस्वतं ततः पर्व तीर्थवंशगुणान्वितम् |
६० क
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
सारस्वतं मुनिश्रेष्ठमिदमूचुः समागताः ||
४३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
सारस्वतस्य धर्मात्मा मुनेस्तीर्थं जगाम ह ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
सारस्वतस्य विप्रर्षेर्वेदस्वाध्याय़कारणात् ||
४९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३४
जनमेजय़ उवाच
सारस्वतानां तीर्थानां गुणोत्पत्तिं वदस्व मे |
३३ क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
सारस्वतीं गतिं चैव लभते नात्र संशय़ः ||
१६४ ग
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
सारस्वतेषु लोकेषु मोदते नात्र संशय़ः ||
५९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
सारस्वतो महाभागे वेदानध्यापय़िष्यति ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ११४
भीष्म उवाच
सारासारं वलं वीर्यमात्मनो द्विषतश्च यः |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
सारासारवलं ज्ञातुं तन्मे निगदतः शृणु ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
सारासारवलं ज्ञात्वा तत्समासेन मे शृणु ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय २२१
वैशम्पाय़न उवाच
सारिसृक्वः प्रजाय़ेत पितृणां कुलवर्धनः ||
८ ख
विराट पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
सारूप्यमर्जुनस्येव क्लीवरूपं विभर्ति च ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
सारोहं मृत्युसात्कर्तुं स्मरन्धर्मं धनञ्जय़ः ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
सारोहश्चापतद्वाजी गजेनाताडितो भृशम् ||
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
सारोहा निहताः पेतुर्वज्रभिन्ना इवाद्रय़ः ||
५१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०५
सञ्जय़ उवाच
सारोहाणां महाराज हय़ानां चाय़ुतं पुनः ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
सारोहास्तुरगाः पेतुः पार्थवाणहताः क्षितौ ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
सारोहास्तुरगाः पेतुर्मथिताः पार्थमार्गणैः ||
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
सारोहास्तुरगाः पेतुर्वहवोऽर्जुनताडिताः |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
सारोहास्तुरगाः पेतुर्हतवीराः सहस्रशः ||
५२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
सारोहैर्विषमा भूमिः सौभद्रेण निपातितैः ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय १२५
वैशम्पाय़न उवाच
सार्कः सेन्द्राय़ुधतडित्ससन्ध्य इव तोय़दः ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय २१८
वैशम्पाय़न उवाच
सार्कचन्द्रग्रहस्येव नभसः प्रविशीर्यतः ||
४९ ख