chevron_left  साव्रवीत्कृष्णमासीनंarrow_drop_down
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
साव्रवीत्कृष्णमासीनं कृतातिथ्यं युधां पतिम् |
४ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
साव्रवीत्तानृषीन्नाहमरण्यस्यास्य देवता |
७० क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
साव्रवीत्पश्य भगवन्पारावारे ऋषीन्स्थितान् |
५८ क
शल्य पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
साव्रवीत्पृथुताम्राक्षी देवं सप्तर्षिसंसदि |
४४ क
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
साव्रवीद्दाशकन्यास्मि धर्मार्थं वाहय़े तरीम् |
४४ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
साव्रवीद्वणिजः सर्वान्सार्थवाहं च तं ततः |
१२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
साशनेऽस्य प्रिय़े चैव स्थेय़ं मत्प्रिय़काङ्क्षिभिः ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
साशीविषघटाः सर्वे ससर्जरसपांसवः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय २६८
मार्कण्डेय़ उवाच
साशीविषघटाय़ोधाः ससर्जरसपांसवः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
साश्रुकण्ठः स धर्मज्ञो जनार्दनमुवाच ह ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
साश्रुकण्ठो विनिःश्वस्य क्षत्तुर्वाक्यमनुस्मरन् ||
३१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६६
कृष्ण उवाच
साश्वं तु कर्णं सरथं किरीटी; समाचिनोद्भारत वत्सदन्तैः |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
साश्वं ससूतं तरुणमश्वकेतुमपातय़त् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
साश्वं ससूतं त्वरितः पार्थः प्रैषीद्यमक्षय़म् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
साश्वं ससूतं विशिखैर्द्रोणं विव्याध सध्वजम् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय २५६
भीमसेन उवाच
साश्वः सरथपादातः स्वस्ति गच्छ जय़द्रथ ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
साश्वद्विपरथान्याजौ विद्रविष्यन्ति दारुक ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
साश्वध्वजधनुःसूतं विव्याधाचिन्त्यविक्रमः |
६६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५७
सञ्जय़ उवाच
साश्वध्वजरथः सङ्ख्ये धृतराष्ट्र पतेद्भुवि |
१४ क
शल्य पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
साश्वनागरथाः सर्वे विश्रमामो नराधिपाः ||
६३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
साश्वपत्तिद्विपरथं महाशस्त्रौघमप्लवम् |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
साश्वपत्तिद्विपरथाः पाण्डवानभिदुद्रुवुः ||
८४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८१
सञ्जय़ उवाच
साश्वसूतध्वजं द्रोणः पश्यतां सर्वधन्विनाम् ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
साश्वसूतध्वजं यानं द्रोणस्यापोथय़त्तदा |
८८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
साश्वसूतध्वजं यानं भस्म कृत्वा महाप्रभा |
९२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
साश्वसूतध्वजं वाणैर्व्याघ्रदत्तमपातय़त् ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
साश्वसूतध्वजं वाहं भस्म कृत्वा महाप्रभा |
१०५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
साश्वसूतध्वजच्छत्रास्ततस्ते विवरं ददुः ||
७८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
साश्वसूतध्वजरथं तं चकर्त वरासिना ||
५३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३७
सञ्जय़ उवाच
साश्वसूतध्वजरथं तदद्भुतमिवाभवत् ||
४० ख
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
साश्वसूतध्वजरथं शल्यं प्राच्छादय़च्छरैः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
साश्वसूतध्वजरथाः परस्परशराचिताः ||
४२ ख
शल्य पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
साश्वसूतध्वजरथान्रथिनः पातय़न्वहून् |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
साश्वसूतध्वजरथान्सौभद्रो निजघान ह ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
साश्वसूतध्वजान्कर्णः शरैर्निन्ये यमक्षय़म् ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
साश्वसूतध्वजान्यत्तान्पातय़ामास संय़ुगे |
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
साश्वसूतरथो भीमो द्रोणपुत्रास्त्रसंवृतः |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
साश्वारोहांश्च तुरगान्पत्तींश्चैव सहस्रशः |
५१ क
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
साश्वारोहांश्च तुरगान्विषाणैर्विभिदू रणे |
५३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
साश्वारोहान्विषाणाग्रैरुत्क्षिप्य तुरगान्द्विपाः |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
साश्वारोहान्हय़ाञ्जघ्नुः करैः सचरणैस्तथा ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
साश्वारोहान्हय़ान्केचिदुन्मथ्य वरवारणाः |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
साश्वारोहैर्हतैरश्वैरावृते वसुधातले ||
५३ ख
वन पर्व
अध्याय २४४
वैशम्पाय़न उवाच
साष्टमासं हि नो वर्षं यदेनानुपय़ुञ्ज्महे ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
सासिचर्माङ्कुशाभीशून्सतोमरपरश्वधान् ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
सासिमुत्तमवेगेन विचरन्तं महारणे ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
सासिर्वाहुर्निपतितः शिरश्छिन्नं सकुण्डलम् |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
सासिर्वेगादवप्लुत्य दन्ताभ्यां वारणोत्तमम् ||
३४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७६
भीष्म उवाच
सासृजत्सौरभेय़ीस्तु सुरभिर्लोकमातरः |
१८ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
सास्माभिः सह गच्छेत तद्भवाननुमन्यताम् ||
४ ख