उद्योग पर्व
अध्याय
२९
वासुदेव उवाच
उभौ गर्ह्यौ भवतः सञ्जय़ैतौ; किं वै पृथक्त्वं धृतराष्ट्रस्य पुत्रे |
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०४
नारद उवाच
उभौ च कामसंमत्तावुभौ प्रार्थय़तश्च ताम् ||
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९
इन्द्र उवाच
उभौ च ते जन्ममृत्यू व्यतीतौ; किं संवर्तस्तव कर्ताद्य विप्र ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४५
सनत्सुजात उवाच
उभौ च देवौ पृथिवीं दिवं च; दिशश्च शुक्रं भुवनं विभर्ति |
४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
उभौ च वाहुशव्देन नादय़न्तौ नभस्तलम् ||
१८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
उभौ च सदृशौ युद्धे शम्वरामरराजय़ोः ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
उभौ चन्द्रार्कसदृशौ कान्त्या दीप्त्या च भारत ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
उभौ चिक्षिपतुस्तूर्णमन्योन्यस्य वधैषिणौ ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
२६४
मार्कण्डेय़ उवाच
उभौ जघ्नतुरन्योन्यमुभौ भूमौ निपेततुः |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५५
तुलाधार उवाच
उभौ तौ देवय़ानेन गच्छतो जाजले पथा ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२४
श्रीभगवानु उवाच
उभौ तौ न विजानीतो नाय़ं हन्ति न हन्यते ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२१७
वलिरु उवाच
उभौ तौ न विजानीतो यश्च हन्ति हतश्च यः ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६३
भीष्म उवाच
उभौ तौ पुरुषव्याघ्रौ सङ्ग्रामेष्वनिवर्तिनौ ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
उभौ तौ वद्धनिस्त्रिंशावुभौ चावद्धकङ्कटौ |
१४ क
विराट पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
उभौ दिव्यास्त्रविदुषावुभावुत्तमतेजसौ |
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६०
भीष्म उवाच
उभौ धर्मौ महाभागावुभौ परमदुश्चरौ |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१०
गुरुरु उवाच
उभौ नित्यौ सूक्ष्मतरौ महद्भ्यश्च महत्तरौ |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
उभौ परमसंहृष्टावुभौ परमसंमतौ |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
उभौ परमसंहृष्टावुभौ युद्धाभिनन्दिनौ |
४४ क
सभा पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
उभौ परमसंहृष्टौ वलेनातिवलावुभौ |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७४
भीष्म उवाच
उभौ प्रजा वर्धय़तो देवान्पूर्वान्परान्पितॄन् |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
उभौ भरतशार्दूलौ विक्रमेण समन्वितौ ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
उभौ मध्वासवक्षीवावुभौ चन्दनरूषितौ |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६०
भीष्म उवाच
उभौ महाफलौ तात सद्भिराचरितावुभौ ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
उभौ महेन्द्रस्य समानविक्रमा; वुभौ महेन्द्रप्रतिमौ महारथौ |
७ क
विराट पर्व
अध्याय
३९
अर्जुन उवाच
उभौ मे दक्षिणौ पाणी गाण्डीवस्य विकर्षणे |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
२६४
मार्कण्डेय़ उवाच
उभौ रुधिरसंसिक्तौ नखदन्तपरिक्षतौ |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
उभौ रुधिरसिक्ताङ्गावुभौ च विजय़ैषिणौ ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९१
उतथ्य उवाच
उभौ लोकावभिप्रेक्ष्य राजानमृषय़ः स्वय़म् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४२
भीष्म उवाच
उभौ लोकौ जितौ चापि तथैवामन्यत प्रभुः |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
उभौ लोकौ परित्यज्य यय़ुः काष्ठां स्म दक्षिणाम् ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९५
वामदेव उवाच
उभौ लोकौ विनिर्जित्य विजय़े सम्प्रतिष्ठते ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४२
भीष्म उवाच
उभौ लोकौ हृतौ मत्वा ते देवा दुःखिताभवन् |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
उभौ वराय़ुधधरावुभौ रणकृतश्रमौ |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
उभौ वलवृतौ वीरावुभौ तीव्रपराक्रमौ |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२६४
मार्कण्डेय़ उवाच
उभौ ववल्गतुश्चित्रं मुष्टिभिश्च निजघ्नतुः ||
३१ ख
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
उभौ वा प्रीतिसारेण न कामेन प्रवाधसे ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०२
नारद उवाच
उभौ विनिश्चय़ं कृत्वा विकुर्वाते वधैषिणौ ||
१९ ख
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
उभौ विश्रुतकर्माणावुभौ युद्धविशारदौ |
३८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
उभौ विश्रुतकर्माणौ पौरुषेण वलेन च |
१९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
उभौ शमय़ितुं वीरौ भारद्वाजधनञ्जय़ौ ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
उभौ शिष्यौ गदाय़ुद्धे रौहिणेय़स्य धीमतः ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
उभौ शिष्यौ हि मे वीरौ गदाय़ुद्धविशारदौ |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
उभौ श्वेतहय़ौ राजन्रथप्रवरवाहिनौ |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
उभौ श्वेतहय़ौ राजन्संसक्तौ दृश्य पार्थिवाः |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३२
भीष्म उवाच
उभौ सत्याधिकारौ तौ त्राय़ेते महतो भय़ात् |
५ क
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
उभौ सदृशकर्माणावुभौ युधि दुरासदौ ||
३८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
उभौ सदृशकर्माणौ यमवासवय़ोरिव |
२४ क
शल्य पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
उभौ सदृशकर्माणौ रणे सुन्दोपसुन्दय़ोः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७४
भीष्म उवाच
उभौ समीक्ष्य धर्मार्थावप्रमेय़ावनन्तरम् ||
१ ख