शान्ति पर्व
अध्याय
२८४
पराशर उवाच
कृताकृतस्य तपसः फलं पश्यस्व यादृशम् ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
कृताकृतस्य मुख्यस्य कनकस्याग्निवर्चसः |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
कृताकृते शुभाशुभे प्रमादकर्मविप्लुते |
३९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
कृतागसं च राधेय़ं धर्मात्मनि युधिष्ठिरे ||
४५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१
लुव्धक उवाच
कृतागसं धर्मविदस्त्यजन्ति; सरीसृपं पापमिमं जहि त्वम् ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
कृतागसो वय़ं तस्य स मदर्थं कथं क्षमेत् ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
कृताङ्गदः शोणितेन रुद्रवत्प्रत्यदृश्यत ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९७
भीष्म उवाच
कृताञ्जलिं न्यस्तशस्त्रं गृहीत्वा न विहिंसय़ेत् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
कृताञ्जलिं प्रणतमथापरं जनं; स केशिहा मुदितमनाभ्यनन्दत ||
७२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
कृताञ्जलिः शरणं वः प्रपद्ये; कथं स्वस्ति स्यात्कुरुसृञ्जय़ानाम् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
कृताञ्जलिः शुचिर्भूत्वा वाग्विदां प्रवरः प्रभुम् |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
कृताञ्जलिः सप्रणय़ं प्रणिपत्याभिवाद्य च |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
२००
वैशम्पाय़न उवाच
कृताञ्जलिः सुसंवीता स्थिताथ द्रुपदात्मजा ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
कृताञ्जलिपुटा राजन्काषाय़मलिनाम्वराः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
कृताञ्जलिपुटा हृष्टा नम इत्येव वादिनः ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९
शल्य उवाच
कृताञ्जलिपुटाः सर्वा देवराजमथाव्रुवन् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१९
भीष्म उवाच
कृताञ्जलिपुटाः सर्वा निरीक्षन्ते स्म देवताः ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
अग्निरु उवाच
कृताञ्जलिपुटाः सर्वे शिरोभिरभिवन्द्य च ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
भीष्म उवाच
कृताञ्जलिपुटो देवीं निवेद्यात्मानमात्मना ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
कृताञ्जलिपुटो भूत्वा सर्वं तस्मै न्यवेदय़म् ||
१६७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
कृताञ्जलिमिदं वाक्यमुवाचानन्तरं वचः ||
११३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३०
वासुदेव उवाच
कृताञ्जलिमुपासीनं दीनं दीनतरः स्वय़म् ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
कृताञ्जलिरदीनात्मा हनूमन्तमवस्थितम् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
कृताञ्जलिरिदं वाक्यं कृष्णस्यानुमतेऽव्रवीत् ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
१४४
वैशम्पाय़न उवाच
कृताञ्जलिरुपातिष्ठदभिवाद्याथ पाण्डवान् ||
२५ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
कृताञ्जलिरुपासीत गच्छन्तं पृष्ठतोऽन्विय़ात् ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय
२८१
मार्कण्डेय़ उवाच
कृताञ्जलिरुवाचार्ता हृदय़ेन प्रवेपता ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
६९
वृहदश्व उवाच
कृताञ्जलिरुवाचेदमृतुपर्णं नराधिपम् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
२७७
मार्कण्डेय़ उवाच
कृताञ्जलिर्वरारोहा नृपतेः पार्श्वतः स्थिता ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय
४३
सूत उवाच
कृताञ्जलिर्वरारोहा पर्यश्रुनय़ना ततः |
३१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
कृताञ्जलिर्विप्ररूपी प्रणम्येदं विशां पते ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
९८
लोमश उवाच
कृताञ्जलींस्तु तान्सर्वान्परमेष्ठी उवाच ह |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
कृताञ्जलीस्ततो राजन्राक्षसाः क्षुधय़ार्दिताः |
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
कृष्ण उवाच
कृताञ्जलेः प्रपन्नस्य न वधः पूज्यते वुधैः ||
२२ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
कृतातिथ्यं तु गोविन्दं विदुरः सर्वधर्मवित् |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
कृतातिथ्यस्तु गोविन्दः सर्वान्परिहसन्कुरून् |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
कृतातिथ्या मुनिगणैर्निषेदुः सह कृष्णय़ा ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
कृतात्मसु महाराज स वै त्यागी स्मृतो नरः ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
१९८
मार्कण्डेय़ उवाच
कृतात्मा धर्मवित्तस्यां व्याधो निवसते किल |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
कृतात्मा राजपुत्रोऽय़ं सतां मार्गमनुष्ठितः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११२
भीष्म उवाच
कृतात्मा सुमहाभागः पापकेष्वप्यदारुणः ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३४
भीष्म उवाच
कृतात्मानो महात्मानस्ते न यान्ति पराभवम् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
कृतादौ कुरुशार्दूल धर्ममेतमधीतवान् ||
३७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३४३
अतिथिरु उवाच
कृताधिवासो धर्मात्मा तत्र चक्षुःश्रवा महान् |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
६९
शकुन्तलो उवाच
कृतानन्यासु चोत्पन्नान्पुत्रान्वै मनुरव्रवीत् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
कृतानशनसङ्कल्पा यत्र भर्तृनुपाविशत् ||
१८३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६९
पुत्र उवाच
कृतानां फलमप्राप्तं कर्मणां फलसङ्गिनम् |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१०९
लोमश उवाच
कृतानि कानिचित्कोपात्प्रतिषिद्धानि कानिचित् ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
कृतानि तु परोक्षं मे यानि तानि निवोधत ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७३
भीष्म उवाच
कृतानि नूनं पापानि तेषामेतत्फलं ध्रुवम् ||
१५ ख