अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
सिद्ध उवाच
उपासते यथा वाला मातरं क्षुधय़ार्दिताः |
४९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
उपासते स्म तं यज्ञं भुञ्जानास्ते महर्षय़ः ||
९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
उपासते स्म तं वृद्धं हतपुत्रं जनाधिपम् ||
१० ग
शान्ति पर्व
अध्याय
८२
नारद उवाच
उपासते हि त्वद्वुद्धिमृषय़श्चापि माधव |
३० क
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
उपासनरताः सर्वे घटन्ते स्म शुभानने ||
५२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०३
भीष्म उवाच
उपासनात्प्रसन्नोऽसि यदि वै भगवन्मम |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८
संवर्त उवाच
उपासन्ते महात्मानं वहुरूपमुमापतिम् ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
उपासर्पत वेगेन जलौघ इव सागरम् ||
५२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
उपासां चक्रिरे नित्यं कालज्ञानं प्रति प्रभो ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
२८२
मार्कण्डेय़ उवाच
उपासां चक्रिरे पार्थ द्युमत्सेनं महीपतिम् ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
उपासां चक्रिरे विप्रं कथय़ानं कथास्तदा ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
उपासां चक्रिरे सर्वे कुरवो राजभिः सह ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५७
भीष्म उवाच
उपासिता च वृद्धानां जिततन्द्रीरलोलुपः |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३८
वासुदेव उवाच
उपासितास्ते राधेय़ व्राह्मणा वेदपारगाः |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
उपासिष्ये ततः सन्ध्यां वाग्यतो निय़तेन्द्रिय़ः ||
७६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
उपासिष्ये विवस्वन्तमेवं शरशताचितः |
५० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
उपासीत जनः सत्यं सत्यं सन्त उपासते ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९२
वसिष्ठ उवाच
उपासीनश्च पाषण्डान्गुहाः शैलांस्तथैव च ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
उपासीनस्य तस्याथ कृष्णकेशं सकुण्डलम् |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
१५६
वैशम्पाय़न उवाच
उपासीनस्य धनदं तुम्वुरोः पर्वसन्धिषु |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२८
युधिष्ठिर उवाच
उपासीना वासुदेवस्य वुद्धिं; निगृह्य शत्रून्सुहृदो नन्दय़न्ति ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४०
भीष्म उवाच
उपासीनामनिन्द्याङ्गीं कथाभिः समलोभय़त् ||
५५ ख
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
उपासीनेषु विप्रेषु पाण्डवेषु महात्मसु |
१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
उपास्तमय़वेलाय़ां शिविराभ्याशमागताः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
उपास्ता च भवेत्सन्ध्या तेन द्वादशवार्षिकी ||
८२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
उपास्ते त्वां नरव्याघ्र सह कृष्णेन धीमता |
३ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२३
गान्धार्यु उवाच
उपास्ते वै मृधे द्रोणं जटिला व्रह्मचारिणी ||
३६ ख
विराट पर्व
अध्याय
१७
द्रौपद्यु उवाच
उपास्ते स्म सभाय़ां यं कृत्स्ना वीर वसुन्धरा |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
उपास्य वहुलास्तस्मिन्नाश्रमे सुमहातपाः |
७५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
उपास्य सन्ध्यां विधिवत्परन्तपा; स्ततः पुरं ते विविशुर्गजाह्वय़म् ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
उपास्यते तिग्मतेजा वृतो भूतैः समागतैः |
४३ ख
सभा पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
उपास्यते तिग्मतेजा वृतो भूतैः सहस्रशः ||
१२ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
उपास्यमानं मुनिभिर्देवैरिव शतक्रतुम् |
७ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
उपास्यमानं वीरेण फल्गुनेन सुवर्चसा ||
३ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
उपास्यमानं व्यासेन पाराशर्येण धीमता |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
१०१
विष्णुरु उवाच
उपास्यमानमृषिभिर्देवैरिव पितामहम् ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
उपास्यमाना गन्धर्वैः स्त्रीसहस्रसमन्विताः ||
७१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३४
वैशम्पाय़न उवाच
उपास्यमानाः पुरुषैरूषुः पुरनिवासिभिः ||
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
उपास्यमानान्वहुभिर्न्यस्तशस्त्रैर्विशां पते ||
५१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
उपास्यमानो वहुभिः कुरुपाण्डवसात्वतैः |
१४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
उपास्यमानो वहुभिः सिद्धैश्चापि महात्मभिः |
३० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४८
ऋषय़ ऊचुः
उपास्यसाधनं त्वेके नैतदस्तीति चापरे ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२२
धृतराष्ट्र उवाच
उपाहरत्फल्गुनो जातवेदसे; यशो मानं वर्धय़न्पाण्डवानाम् ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
उपाहरदनेकानि केशवाय़ महात्मने ||
३९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१५
वैशम्पाय़न उवाच
उपाय़ं कर्मणः सिद्धौ भगवन्वक्तुमर्हसि |
१८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३४
व्राह्मण्यु उवाच
उपाय़ं तु मम व्रूहि येनैषा लभ्यते मतिः |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
उपाय़ं धर्ममेवाहुस्त्रिवर्गस्य विशां पते |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२८
भीष्म उवाच
उपाय़ं धर्मवहुलं यात्रार्थं शृणु भारत |
८ क
वन पर्व
अध्याय
२२७
वैशम्पाय़न उवाच
उपाय़ं न तु पश्यामि येन गच्छेम तद्वनम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
२२७
वैशम्पाय़न उवाच
उपाय़ं पश्य निपुणं येन गच्छेम तद्वनम् ||
१३ ख