उद्योग पर्व
अध्याय
४
द्रुपद उवाच
स तु दुर्योधनो नूनं प्रेषय़िष्यति सर्वशः |
९ क
विराट पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
स तु दृष्ट्वा विमुह्यन्तं स्वय़मेवोत्तरस्ततः |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
१६७
गन्धर्व उवाच
स तु दृष्ट्वैव तं राजा क्रुद्ध उत्थाय़ भारत |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
स तु देवव्रतो नाम गाङ्गेय़ इति चाभवत् |
४४ क
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
स तु देवान्सगन्धर्वाञ्जित्वा धुन्धुरमर्षणः |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
स तु देवो वलेनासीत्सर्वेभ्यो वलवत्तरः |
६३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०३
गुरुरु उवाच
स तु देहाद्यथा देहं त्यक्त्वान्यं प्रतिपद्यते |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
स तु द्रोणं महाराज छादय़न्साय़कैः शितैः |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
स तु द्रोणं समासाद्य व्यूहस्य प्रमुखे स्थितम् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
स तु द्रोणस्य शिरसा पादौ गृह्य परन्तपः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
स तु द्रौणिं त्रिसप्तत्या हेमपुङ्खैरजिह्मगैः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६४
भीष्म उवाच
स तु धर्मो मृगो भूत्वा वहुवर्षोषितो वने |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
स तु धुन्धुर्वरं लव्ध्वा महावीर्यपराक्रमः |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
स तु धैर्येण तं कोपं संनिवार्य महाय़शाः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३११
भीष्म उवाच
स तु धैर्येण महता निगृह्णन्हृच्छय़ं मुनिः |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
स तु नागो द्विपरथान्हय़ांश्चारुज्य मारिष |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८४
व्रह्मो उवाच
स तु नावाप तं शापं नष्टः स हुतभुक्तदा |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
स तु नूनं महावाहुः प्रिय़ार्थं मम पाण्डवः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
६०
वृहदश्व उवाच
स तु पापमतिः क्षुद्रः प्रधर्षय़ितुमातुरः |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
स तु पार्थं त्रिभिर्विद्ध्वा सिंहनादमथानदत् ||
६३ ख
वन पर्व
अध्याय
२०७
मार्कण्डेय़ उवाच
स तु पृष्टस्तदा देवैस्ततः कारणमव्रवीत् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७८
भीष्म उवाच
स तु प्रविष्ट उशना कोष्ठं माहेश्वरं प्रभुः |
२० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
स तु भाराभिभूतात्मा काष्ठभारमरिन्दम |
९ क
वन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
स तु भाराभिभूतात्मा न तथा शीघ्रगोऽभवत् ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
स तु भीष्मो रणश्लाघी सोमकान्सहसृञ्जय़ान् |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
स तु भूतसमाय़ुक्तः प्राप्नुते जीव एव ह ||
२९ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
स तु मत्तगजाकीर्णमनीकं रथसङ्कुलम् |
९० क
वन पर्व
अध्याय
१०७
लोमश उवाच
स तु मां प्रच्युतां देवः शिरसा धारय़िष्यति |
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४७
भीष्म उवाच
स तु मातृविशेषेण त्रीनंशान्हर्तुमर्हति ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
१६३
अर्जुन उवाच
स तु मामव्रवीद्राजन्मम पूर्वपरिग्रहः |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
स तु मामश्रुपूर्णाक्षो नाशक्नोदभिवीक्षितुम् |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
स तु मित्रोपरोधेन गौरवाच्च महावलः |
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
सञ्जय़ उवाच
स तु यत्तो रथे स्थित्वा वार्युपस्पृश्य वीर्यवान् |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३१
भीष्म उवाच
स तु युद्धे महाराज दिनानां दशतीर्दश |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
स तु रणय़शसाभिपूज्यमानः; पितृसुरचारणसिद्धय़क्षसङ्घैः |
३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
स तु रत्नाकरवतीं सद्वीपां सागराम्वराम् |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
स तु राजन्धनुश्छित्त्वा पाण्डवस्य महामृधे |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
१६२
गन्धर्व उवाच
स तु राजा गिरिप्रस्थे तस्मिन्पुनरुपाविशत् ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
२८९
वैशम्पाय़न उवाच
स तु राजा द्विजं दृष्ट्वा तत्रैवान्तर्हितं तदा |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
भीष्म उवाच
स तु राजा निराहारः सभार्यः कुरुनन्दन |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय
१६२
गन्धर्व उवाच
स तु राजा पुनर्भूमौ तत्रैव निपपात ह ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११८
नारद उवाच
स तु राजा पुनस्तस्याः कर्तुकामः स्वय़ंवरम् |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
१६६
गन्धर्व उवाच
स तु राजा महात्मानं वासिष्ठमृषिसत्तमम् |
३ क
सभा पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
स तु राजा महाप्राज्ञः पुनरेवात्मनात्मवान् |
२२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
स तु राजा महाराज व्रह्मास्त्रेणाभिपीडितः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
१०७
लोमश उवाच
स तु राजा महेष्वासश्चक्रवर्ती महारथः |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
स तु राजानमासाद्य धर्मात्मानं युधिष्ठिरम् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
स तु राममुपागम्य शिरसाभिप्रणम्य च |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
स तु रुक्मरथासक्तो दुःशासनशरार्दितः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३९
वासुदेव उवाच
स तु लव्धवरः पापो देवानमितविक्रमः |
४२ क