chevron_left  सेन्द्राशनिरिवेन्द्रेणarrow_drop_down
वन पर्व
अध्याय १५७
वैशम्पाय़न उवाच
सेन्द्राशनिरिवेन्द्रेण विसृष्टा वातरंहसा |
६८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
अग्निरु उवाच
सेन्द्रेषु चैव लोकेषु प्रतिष्ठां प्राप्नुते शुभाम् |
६३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
सेनय़ा चतुरङ्गिण्या महत्या दूरपातय़ा |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
सेनय़ोरन्तरे तिष्ठन्प्रगृहीतशरासनः ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
सेनय़ोरशिवं घोरं करिष्यति महाग्रहः |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
सेनय़ोरुभय़ो राजन्प्रावाद्यन्त महास्वनाः |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
सेनय़ोरुभय़ोर्मध्ये रथं स्थापय़ मेऽच्युत ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
सेनय़ोरुभय़ोर्मध्ये विषीदन्तमिदं वचः ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
सेनय़ोरुभय़ोर्मध्ये स्थापय़ित्वा रथोत्तमम् ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
सेनय़ोरुभय़ोश्चापि गाङ्गेय़े विनिपातिते |
१०९ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०८
सञ्जय़ उवाच
सेनय़ोरुभय़ोश्चैव समन्ताच्छ्रूय़ते महान् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०४
भीष्म उवाच
सेनय़ोर्व्यतिषङ्गेण जय़ः साधारणो भवेत् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६७
असित उवाच
सेवते विषय़ानेव तद्विद्यात्स्वप्नदर्शनम् ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२७
भीष्म उवाच
सेवन्ती हिमवत्पार्श्वं हरपार्श्वमुपागमत् ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९
युधिष्ठिर उवाच
सेवमानः प्रतीक्षिष्ये देहस्यास्य समापनम् ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८०
पराशर उवाच
सेवाश्रितेन मनसा वृत्तिहीनस्य शस्यते |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११२
भीष्म उवाच
सेवाय़ाश्चापि नाभिज्ञः स्वच्छन्देन वनेचरः ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२३
कामन्द उवाच
सेवितव्या त्रय़ी विद्या सत्कारो व्राह्मणेषु च ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३६
व्यास उवाच
सेवितव्यो नरव्याघ्र प्रेत्य चेह सुखार्थिना ||
४४ ख
आदि पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
सेविता विषय़ाः पुत्र यौवनेन मय़ा तव ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय १५१
वैशम्पाय़न उवाच
सेवितामृषिभिर्दिव्यां यक्षैः किम्पुरुषैस्तथा |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
सेविते द्विजशार्दूलैर्वेदवेदाङ्गपारगैः ||
४३ ख
वन पर्व
अध्याय २२२
वैशम्पाय़न उवाच
सेवे चक्षुर्हणः पार्थानुग्रतेजःप्रतापिनः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३४
भीष्म उवाच
सेवेत तान्समावृत्त इति धर्मेषु निश्चय़ः ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७१
भीष्म उवाच
सेवेत प्रणय़ं हित्वा दक्षः स्यान्न त्वकालवित् |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
सञ्जय़ उवाच
सेवेथाः परमप्रीतो यतो धर्मस्ततो जय़ः |
६२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६३
भीष्म उवाच
सेव्यं तु व्रह्मषट्कर्म गृहस्थेन मनीषिणा |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६२
भीष्म उवाच
सेव्यतेऽभ्यर्च्यते चैव नित्ययुक्तैः स्वकर्मभिः ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
सेव्यमानः स चैवाद्यो गाङ्गेय़ विदितस्तव ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय १४४
वैशम्पाय़न उवाच
सेव्यमाना च शीतेन जलमिश्रेण वाय़ुना |
१८ क
वन पर्व
अध्याय २६५
मार्कण्डेय़ उवाच
सेव्यमाना त्रिजटय़ा तत्रैव न्यवसत्तदा ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय २६४
मार्कण्डेय़ उवाच
सेव्यमानो वने तस्मिञ्जगाम मनसा प्रिय़ाम् ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
सेव्यमानो वरस्त्रीभिः क्रीडत्यमरवत्प्रभुः ||
८९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
सेव्यमानोऽप्सरोभिश्च दिव्यगन्धर्वनादितः ||
९१ ख
वन पर्व
अध्याय १८१
वैशम्पाय़न उवाच
सेव्यश्चोपासितव्यश्च मतो नः काङ्क्षितश्चिरम् |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
सेषुणा पाणिनाहूय़ हसन्द्रौणिरथाव्रवीत् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय १८९
व्यास उवाच
सेह तप्त्वा तपो घोरं दुहितृत्वं तवागता ||
४८ ख
आदि पर्व
अध्याय १५८
गन्धर्व उवाच
सेय़ं कापुरुषं प्राप्ता गुरुदत्ता प्रणश्यति |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९८
मनुरु उवाच
सेय़ं गुणवती वुद्धिर्गुणेष्वेवाभिवर्तते |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६६
वैशम्पाय़न उवाच
सेय़ं ज्वलन्ती हृदय़े मय़ि तिष्ठति केशव |
४ क
आदि पर्व
अध्याय १८५
वैशम्पाय़न उवाच
सेय़ं तथानेन महात्मनेह; कृष्णा जिता पार्थिवसङ्घमध्ये ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७५
होत्रवाहन उवाच
सेय़ं तपोवनं प्राप्ता तापस्येऽभिरता भृशम् ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय २९४
वैशम्पाय़न उवाच
सेय़ं तव करं प्राप्य हत्वैकं रिपुमूर्जितम् |
२५ क
वन पर्व
अध्याय २४७
देवदूत उवाच
सेय़ं दानकृता व्युष्टिरत्र प्राप्ता सुखावहा |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
सेय़ं परमिका वुद्धिः प्राप्ता निर्द्वन्द्वता मय़ा |
३१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
सेय़ं पार्थ चमूर्घोरा धार्तराष्ट्रस्य संय़ुगे |
४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
सेय़ं प्रकृतिरव्यक्ता कलाभिर्व्यक्ततां गता |
११५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २४०
व्यास उवाच
सेय़ं भावात्मिका भावांस्त्रीनेतानतिवर्तते |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १८७
भीष्म उवाच
सेय़ं भावात्मिका भावांस्त्रीनेतान्नातिवर्तते |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय १३८
वैशम्पाय़न उवाच
सेय़ं भूमौ परिश्रान्ता शेते ह्यद्यातथोचिता ||
१९ ख