आदि पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
सेय़ं यदि तथा मे त्वं सत्यमाख्यातुमर्हसि ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
सेय़ं यदि वरारोहा भृगोर्भार्या रहोगता |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
सेय़ं रत्नसमाकीर्णा मही सवनपर्वता |
४२ क
वन पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
सेय़ं वने वासमिमं सुदुःखं; कथं सहत्यद्य सती सुखार्हा ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३४
विदुर उवाच
सेय़ं वुद्धिः परीता ते पुत्राणां तव भारत |
८० क
वन पर्व
अध्याय
५९
वृहदश्व उवाच
सेय़मद्य सभामध्ये शेते भूमावनाथवत् ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९२
धृतराष्ट्र उवाच
सेय़मभ्यधिका प्रीतिर्वृद्धिर्विदुर मे मता |
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३५
वैशम्पाय़न उवाच
सेय़मापदनुप्राप्ता क्षत्ता यां दृष्टवान्पुरा |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९१
भगवानु उवाच
सेय़मापन्महाघोरा कुरुष्वेव समुत्थिता |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
सेय़मापन्महाघोरा कुरुष्वेव समुत्थिता |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८२
नारद उवाच
सेय़माभ्यन्तरा तुभ्यमापत्कृच्छ्रा स्वकर्मजा |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
६६
सुदेव उवाच
सेय़मासादिता वाला तव पुत्रनिवेशने ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
सैक्यः कोशान्निःसरति प्रसन्नो; हित्वेव जीर्णामुरगस्त्वचं स्वाम् |
९७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
सैनामथाव्रवीद्राजन्कृताञ्जलिरनिन्दिता |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
सैनिका न्यपतन्नुर्व्यां वातनुन्ना इव द्रुमाः ||
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०२
नारद उवाच
सैनिकांश्च समाहूय़ सुतीक्ष्णां वाचमूचतुः ||
९ ख
विराट पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
सैनिकाः प्राहसन्केचित्तथारूपमवेक्ष्य तम् ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
सैनिकानां च सर्वेषां तय़ोश्च प्रीतिवर्धनः ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सात्यकिरु उवाच
सैनिकानां वधं दृष्ट्वा सन्तप्स्यति सुय़ोधनः ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
२१
वासुदेव उवाच
सैनिकान्मम सूतं च हय़ांश्च समवाकिरत् |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
सैनिकान्स महेष्वासो योधांश्च भरतर्षभ |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
कृप उवाच
सैनिकाश्च ततः सर्वे प्राद्रवन्त भय़ार्दिताः |
१२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
सैनिकाश्च मुदा युक्ता वर्धय़न्ति द्विजोत्तमम् |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवं च महेष्वासं व्यचरल्लघु सुष्ठु च ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवं च महेष्वासं सामात्यं सह वन्धुभिः |
३ क
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
सैन्धवं त्वभिसम्प्रेक्ष्य पराक्रान्तं पलाय़ने |
५७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवं दशभिर्भल्लैर्वृषसेनं त्रिभिः शरैः |
८१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवं दुःसहं चैव भूरिश्रवसमेव च |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२६
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवं निहतं दृष्ट्वा भूरिश्रवसमेव च ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवं निहतं दृष्ट्वा रणे पार्थेन मारिष |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवं निहतं दृष्ट्वा राधेय़ः समुपाद्रवत् ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवं निहतं मेने फल्गुनेन महात्मना ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवं पर्यरक्षन्त शासनात्तनय़स्य ते ||
४९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवं पृष्ठतः कृत्वा जिघांसन्तोऽर्जुनाच्युतौ |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवं प्राप्स्यते वीरः सव्यसाची धनञ्जय़ः ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवं मद्रराजं च राजानं च सुय़ोधनम् ||
१३ ग
विराट पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
सैन्धवं येन राजानं परामृषत चानघ |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवं श्वोऽस्मि हन्तेति तत्साहसतमं कृतम् ||
२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवं सोमदत्तं च भूरिश्रवसमेव च ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवः क्षत्रधर्माणमापतन्तं शरौघिणम् |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवः पृष्ठतस्त्वासीत्सर्वसैन्यस्य भारत |
४८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवप्रमुखैर्गुप्तः प्राच्यसौवीरकेकय़ैः |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
सैन्धवश्च कलिङ्गश्च काम्वोजश्च सुदक्षिणः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवश्च कलिङ्गश्च विकर्णश्च तवात्मजः |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवश्च त्रिभिर्वाणैर्जत्रुदेशेऽभ्यताडय़त् |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवस्तु तथा विद्धः शरैर्गाण्डीवधन्वना |
१० क
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
सैन्धवस्तु हतान्दृष्ट्वा तथाश्वान्स्वान्सुदुःखितः |
५६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
सैन्धवस्य च पापस्य भूरिश्रवस एव च ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवस्य तथाश्वांश्च सारथिं च त्रिभिः शरैः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
सैन्धवस्य महाराज पुत्रो राजा जय़द्रथः |
६ क