स्त्री पर्व
अध्याय
२२
गान्धार्यु उवाच
सैषा मम सुता वाला विलपन्ती सुदुःखिता |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
१८९
व्रह्मो उवाच
सैषामन्तो भविता ह्यन्तकाले; तनुर्हि वीर्यं भविता नरेषु ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
७३
वृहदश्व उवाच
सोचिता नलसिद्धस्य मांसस्य वहुशः पुरा |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
१४३
वैशम्पाय़न उवाच
सोढं तत्परमं दुःखं मय़ा कालप्रतीक्षय़ा |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
१६
सूत उवाच
सोढास्मि विपुलं मर्दं मन्दरभ्रमणादिति ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
सोढुं ज्यातलनिर्घोषं याहि यावन्निहन्म्यहम् ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४०
भीम उवाच
सोढुं युधि परिस्पन्दमथवा सर्वराक्षसाः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११८
कीट उवाच
सोढुमस्मद्विधेनैष न शक्यः कीटय़ोनिना |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
सोढुमुत्सहते नान्यो योधो युधि वृकोदरात् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
सोढुमुत्सहते लोके कोऽन्यो युधि वृकोदरात् ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
सोढुमुत्सहते वेगं भीमसेनस्य संय़ुगे ||
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
सोढुमुत्सहते वेगं भीमसेनस्य संय़ुगे ||
६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६६
वैशम्पाय़न उवाच
सोत्तराय़ां निपतिता विजय़े मय़ि चैव ह ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
सोत्तराय़ुधिनं जघ्नुर्द्रवमाणा महारवम् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
सोत्तराय़ुधिनो नागाः सपताकाङ्कुशाय़ुधाः |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
सोत्प्लुत्य स्यन्दनात्तस्मान्नीलश्चर्मवरासिधृक् |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४६
युधिष्ठिर उवाच
सोत्सेधमस्य च शिरः पश्यतां सुहृदां हृतम् |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
१०७
वैशम्पाय़न उवाच
सोदरं पातय़ामास गान्धारी दुःखमूर्च्छिता ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
सोदरांस्ते न मृद्नाति तावत्संशाम्य पाण्डवैः ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८१
पराशर उवाच
सोदर्यं भ्रातरमपि किमुतान्यं पृथग्जनम् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२
सञ्जय़ उवाच
सोदर्यवद्व्यसनात्सूतपुत्रः; सन्तारय़िष्यंस्तव पुत्रस्य सेनाम् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
३२
शेष उवाच
सोदर्या मम सर्वे हि भ्रातरो मन्दचेतसः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
४४
सूत उवाच
सोदर्यां पूजय़ामास स्वसारं पन्नगोत्तमः ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
सोदर्याः पाण्डवा वीरा भ्रातरस्तेऽरिसूदन |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
सोदर्याः सहिता भूत्वा भीमसेनमुपाद्रवन् ||
३ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
सोदर्याणां त्रय़श्चैव त एनं पर्यवारय़न् ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
सोदर्याश्च यथा मुख्यास्तेऽरक्षन्द्रोणमाहवे ||
३९ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
सोदर्येषु विनष्टेषु द्रौपद्यां तत्र भारत |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
सोपचारस्तु कृष्णस्तां दुःखितां भृशदुःखितः |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
सोपतल्पप्रतोलीका साट्टाट्टालकगोपुरा |
६ क
सभा पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
सोपदेशं विनिर्जित्य प्रय़यावुत्तरामुखः |
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८५
भृगुरु उवाच
सोपधं निकृतिः स्तेय़ं परिवादोऽभ्यसूय़ता |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
सोपधानं नरव्याघ्र शरैः संनतपर्वभिः ||
१६ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
सोपधानि कृतान्येव पाण्डवैरकृतात्मभिः ||
४९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
सोपवेदोपनिषदः सरहस्याः ससङ्ग्रहाः ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय
१०४
लोमश उवाच
सोपस्वेदेषु पात्रेषु घृतपूर्णेषु भागशः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
१४
सूत उवाच
सोपस्वेदेषु भाण्डेषु पञ्च वर्षशतानि च ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९३
वसिष्ठ उवाच
सोपहासात्मतामेति यस्माच्चैवात्मवानपि ||
२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
अष्टावक्र उवाच
सोपागूहद्भुजाभ्यां तु ऋषिं प्रीत्या नरर्षभ ||
५१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
सोपानत्कश्च यद्भुङ्क्ते सर्वं विद्यात्तदासुरम् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
सोपानभूतं स्वर्गस्य मानुष्यं प्राप्य दुर्लभम् |
७९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०४
याज्ञवल्क्य उवाच
सोपानमारुहेद्भीतस्तर्ज्यमानोऽसिपाणिभिः ||
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
सोपाविशद्रथोपस्थे तव पुत्रेण ताडितः |
३१ क
शल्य पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
सोपासङ्गः सरश्मिश्च साश्वः सय़ुगवन्धुरः |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२२
दुर्योधन उवाच
सोपासङ्गा रथाः साश्वा अनुय़ास्यन्ति सूतज ||
५९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
सोपासङ्गाः सशक्तीकाः सनिषङ्गाः सपोथिकाः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
२०७
मार्कण्डेय़ उवाच
सोपासर्पच्छनैर्भीतस्तमुवाच तदाङ्गिराः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
धृतराष्ट्र उवाच
सोपाय़ं पूर्वमुद्दिष्टं प्रह्रादेन महात्मना |
६३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
सोपाय़ः सोपनिषदः सोपासङ्गः सनिश्चय़ः ||
१६३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
सोमं च भगवान्प्रीतो भूय़ो वचनमव्रवीत् ||
७२ ख