chevron_left  रथेनादित्यवर्णेनarrow_drop_down
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
रथेनादित्यवर्णेन सध्वजेन महावलः ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय १६५
अर्जुन उवाच
रथेनानेन दैत्यानां जितवान्मघवान्युधि ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय १६५
अर्जुन उवाच
रथेनानेन मघवा जितवाञ्शम्वरं युधि |
१८ ख
वन पर्व
अध्याय २७४
मातलिरु उवाच
रथेनाभिपपाताशु दशग्रीवं रुषान्वितः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४२
सञ्जय़ उवाच
रथेनाभ्यपतत्तूर्णं सर्वलोकस्य पश्यतः ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
रथेनाभ्यपतद्राजन्सौभद्रं पौरवो नदन् ||
४५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
रथेनाशु समावृत्य शरैर्जिष्णुमवाकिरत् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७२
भीष्म उवाच
रथेनेन्द्रः प्रय़ातो वै सार्धं सुरगणैः पुरा |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
रथेनैकेन दुर्धर्षौ युय़ुधानजनार्दनौ |
१० क
वन पर्व
अध्याय ७७
वृहदश्व उवाच
रथेनैकेन शुभ्रेण दन्तिभिः परिषोडशैः |
२ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
रथेनोपय़यौ पार्थमारोहेत्यव्रवीच्च तम् ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
रथेभ्यः प्रपतन्त्येते रथिनो विगतासवः |
५९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
रथेभ्यश्च गजेभ्यश्च हय़ेभ्यश्च नराधिपाः |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४८
सञ्जय़ उवाच
रथेभ्यश्च नरास्तूर्णमदृश्यन्त ततस्ततः ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
रथेभ्यस्त्ववतीर्णास्तु सर्व एव स्म तावकाः |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
रथेभ्यो रथिनः पेतुर्द्विपेभ्यो हस्तिसादिनः |
८६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
रथेभ्यो रथिनः पेतुस्तस्य नुन्नाः स्म साय़कैः ||
२८ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
रथेषां रथचक्रे च चिक्रीडतुररिन्दमौ ||
४८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
रथेषाश्च रथेषाभिः कूवरा रथकूवरैः |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १
सञ्जय़ उवाच
रथेषु गण्यमानेषु वलविक्रमशालिषु |
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
रथेषु च रथान्युद्धे संसक्तान्वरवारणाः |
३९ क
विराट पर्व
अध्याय ४३
कर्ण उवाच
रथेषु वापि तिष्ठन्तो युद्धं पश्यन्तु मामकम् ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
रथेष्वस्त्रेषु निपुणा नागेषु च विशां पते |
२० क
आदि पर्व
अध्याय २१२
वैशम्पाय़न उवाच
रथेष्वानीय़मानेषु कवचेषु ध्वजेषु च |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
रथेष्वारोहत क्षिप्रं गच्छामो वसुधाधिपाः |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय २२
धृतराष्ट्र उवाच
रथेऽर्जुनादाहुरहीनमेनं; वाह्वोर्वले चाय़ुतनागवीर्यम् ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४९
सञ्जय़ उवाच
रथेऽस्य निक्षिप्य शिरो विकृताननमूर्धजम् |
३४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
रथै रथा विनिहता हस्तिनश्चापि हस्तिभिः |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
रथै रथाश्वसूतैश्च हतारोहैश्च वाजिभिः |
१०९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
रथैः पञ्चाशता सार्धं पञ्चाशन्न्यहनद्रथान् ||
१० ग
उद्योग पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
रथैः शुभ्रैः सैन्यमभिद्रवन्तो; दृष्ट्वा पश्चात्तप्स्यते धार्तराष्ट्रः ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
रथैः सनन्दिघोषैश्च पृष्ठतः सोऽनुगम्यते |
७८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
रथैः सनन्दिघोषैश्च पृष्ठतः सोऽनुगम्यते ||
१०० ख
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
रथैरग्र्यजवैर्युक्तैः किङ्किणीजालसंवृतैः |
१२ ख
वन पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
रथैरनुय़युः शीघ्रैः स्त्रिय़ आदाय़ सर्वशः ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
रथैरनेकसाहस्रैः कलिङ्गानां जनाधिपः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
रथैरनेकसाहस्रैः क्रोधामर्षसमन्वितः |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
रथैरनेकसाहस्रैः परिवव्रे समन्ततः |
४८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
रथैरनेकसाहस्रैः समन्तात्परिवारितम् |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
रथैरनेकसाहस्रैः समन्तात्पर्यवारय़न् ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४६
सञ्जय़ उवाच
रथैरनेकसाहस्रैर्गजैश्चैव सहस्रशः |
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
रथैरनेकसाहस्रैर्भिमस्यावारय़द्दिशः ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
रथैरनेकसाहस्रैर्भीमस्यावारय़द्दिशः ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
रथैरनेकसाहस्रैस्तथा हय़पदातिभिः ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९३
सञ्जय़ उवाच
रथैरन्ये नरश्रेष्ठाः परिवव्रुः समन्ततः ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३७
सञ्जय़ उवाच
रथैरश्वैर्गजैश्चान्ये पादातैश्च वलोत्कटाः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय १४१
युधिष्ठिर उवाच
रथैरश्वैश्च ये चान्ये विप्राः क्लेशासहाः पथि |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
रथैर्गजैस्तथाश्वैश्च प्रेष्यैश्च भरतर्षभ |
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
रथैर्द्विपा द्विरदवरैर्महाहय़ा; हय़ैर्नरा वररथिभिश्च वाजिनः |
७४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
रथैर्नगरसङ्काशैर्हय़ैर्युक्तैर्मनोजवैः |
५३ क