chevron_left  तावुभौarrow_drop_down
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
तावुभौ प्रजिहीर्षेतामिन्द्रवृत्राविवाभितः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
तावुभौ प्रतिवक्ष्यामो हृषीकेशधनञ्जय़ौ ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९६
कण्व उवाच
तावुभौ प्रीतमनसौ कार्यवत्तां निवेद्य ह |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
तावुभौ भरतश्रेष्ठौ श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
भीष्म उवाच
तावुभौ भृशसन्तप्तौ राजानमिदमूचतुः |
८६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९८
धृतराष्ट्र उवाच
तावुभौ रथिनौ सङ्ख्ये दृप्तौ सिंहाविवोत्कटौ |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
तावुभौ वलसम्पन्नौ निस्त्रिंशवरधारिणौ |
२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
तावुभौ विरथौ वीरौ कुरूणां कीर्तिवर्धनौ |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
तावुभौ विविधैर्वाणैस्ततक्षाते परस्परम् |
३५ क
मौसल पर्व
अध्याय ७
वसुदेव उवाच
तावुभौ वृष्णिनाशस्य मुखमास्तां धनञ्जय़ ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
तावुभौ शरचित्राङ्गौ रुधिरेण समुक्षितौ |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४३
सञ्जय़ उवाच
तावुभौ शरनुन्नाङ्गौ शरकण्टकिनौ रणे |
१६ क
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
तावुभौ शरवर्षाभ्यां समासाद्य परस्परम् |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
तावुभौ समनुप्राप्तौ विवदन्तौ भृशज्वरौ |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४४
सञ्जय़ उवाच
तावुभौ समरे शूरौ शरकण्टकिनौ तदा |
४ क
सभा पर्व
अध्याय १३
श्रीकृष्ण उवाच
तावुभौ सहितौ वीरौ जरासन्धश्च वीर्यवान् |
३७ क
विराट पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
तावुभौ सुमहोत्साहावुभौ तीव्रपराक्रमौ |
२० क
वन पर्व
अध्याय १३५
लोमश उवाच
तावूषतुरिहात्यन्तं प्रीय़माणौ वनान्तरे ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय २६४
मार्कण्डेय़ उवाच
तावृश्यमूकमभ्येत्य वहुमूलफलं गिरिम् |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
तावेकरथमारूढावादित्याग्निसमत्विषौ |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४६
सञ्जय़ उवाच
तावेकरथमारूढौ पितापुत्रौ महारथौ |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३०
सञ्जय़ उवाच
तावेकरथमारूढौ भ्रातरौ परतापनौ |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
तावेकरथमारूढौ भ्रातरौ वृषकाचलौ |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
तावेकरथसंय़ुक्तौ सौवलेय़स्य वाहिनीम् |
९ क
वन पर्व
अध्याय ५९
वृहदश्व उवाच
तावेकवस्त्रसंवीतावटमानावितस्ततः |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
तावेकस्थौ रणे वीरावावन्त्यौ रथिनां वरौ |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
तावेतौ पुरुषव्याघ्रौ समेतौ स्यन्दने स्थितौ |
६३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
व्यास उवाच
तावेतौ पूर्वदेवानां परमोपचितावृषी |
८१ क
आदि पर्व
अध्याय २५
कश्यप उवाच
तावेतौ युद्धसंमत्तौ परस्परजय़ैषिणौ |
२५ क
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
तावेनं प्रत्यविध्येतां पृथक्पृथगजिह्मगैः |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
तावेनं प्रत्यविध्येतां समरे चित्रय़ोधिनौ ||
१३ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
तावेनं भ्रातरौ वीरं जघ्नतुर्हृदय़े भृशम् |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
तावेनं रथिनां श्रेष्ठौ रथाभ्यां रथसत्तमम् |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
तावेनं शरवर्षाणि सव्यदक्षिणमस्यताम् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६२
सञ्जय़ उवाच
तावेवान्ये समासाद्य जग्मुर्वैवस्वतक्षय़म् ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६२
सञ्जय़ उवाच
तावेवास्तां निलय़नं तावार्ताय़नमेव च |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
ताश्च ते सफलाः सर्वा हते दुर्योधनेऽच्युत ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
ताश्च त्वं विफलाः कुर्वन्काँल्लोकान्नु गमिष्यसि |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८०
व्यास उवाच
ताश्च दत्त्वा द्विजातिभ्यो नरः स्वर्गमुपाश्नुते ||
३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
ताश्च सप्तकपालेन देवैरन्याः प्रवर्तिताः ||
६४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
ताश्च सर्वाव्रवीद्दक्षो गच्छध्वं सोममन्तिकात् |
४८ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
ताश्चाप्यप्सरसो भूत्वा वासुदेवमुपागमन् ||
२१ ग
वन पर्व
अध्याय १८८
मार्कण्डेय़ उवाच
ताश्चाप्यल्पफलास्तेषां भविष्यन्ति युगक्षय़े ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८२
भीष्म उवाच
ताश्चाप्युग्राश्चर्मणा वारय़ित्वा; खड्गेनाजौ पातिता मे नरेन्द्र |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
श्रीरु उवाच
ताश्चाहं चासुरांस्त्यक्त्वा युष्मद्विषय़मागता |
८३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
भीष्म उवाच
तासां क्षय़े विद्धि कृतं विसर्गं; संहारमेकं च तथा प्रजानाम् ||
३२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
तासां च वरनारीणां वधूनां कौरवस्य ह ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
तासां तद्वचनं श्रुत्वा दक्षः सोममथाव्रवीत् |
५१ क
वन पर्व
अध्याय १८४
सरस्वत्यु उवाच
तासां तीरेष्वासते पुण्यकर्मा; महीय़मानः पृथगप्सरोभिः |
७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
तासां तु तेन शव्देन समीपे क्षत्रिय़र्षभाः |
२८ क