भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
गदां प्रगृह्य वेगेन प्रचस्कन्द महारथात् ||
७२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
गदां प्रगृह्याभिपपात सङ्ख्ये; जय़द्रथं भीमसेनः पदातिः ||
२९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
गदां प्रगृह्याशु जवेन वीरो; भूमिं प्रपन्नो भय़विह्वलाङ्गः ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५०
धृतराष्ट्र उवाच
गदां भ्रामय़तस्तस्य भिन्दतो हस्तिमस्तकान् |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
गदां विनिहतां दृष्ट्वा धृष्टकेतुरमर्षणः |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
गदां विनिहतां दृष्ट्वा पार्षतः शत्रुसूदनः |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
गदां विनिहतां दृष्ट्वा सहदेवस्त्वरान्वितः |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
गदां समाविध्य भृशं जघान; पाञ्चालराजस्य सुतस्तरस्वी ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
२३४
वैशम्पाय़न उवाच
गदां सर्वाय़सीं पार्थः शरैश्चिच्छेद सप्तधा ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
गदाः प्रासानसीन्कुन्तान्भिण्डिपालान्महाङ्कुशान् |
१० क
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
गदाखड्गधनुष्पाणिः समभित्यक्तजीवितः |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
गदाखड्गनिवद्धश्च परमेषुशतान्वितः ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय
१९
वासुदेव उवाच
गदाग्रजो दुराधर्षः किं मां वक्ष्यति माधवः ||
१७ ख
सभा पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
गदाचक्रासिशार्ङ्गाद्यैराय़ुधैश्च समन्वितम् ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
गदानां परिघाणां च कणपानां च सर्पताम् |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
गदानां परिघाणां च शक्तीनां तोमरैः सह ||
२५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
गदानिपातं प्रज्ञाय़ भीमसेनमवञ्चय़त् ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५२
सञ्जय़ उवाच
गदानिपातसंह्रादैर्भुवं कम्पय़तोर्भृशम् ||
४३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
गदानिपातसंह्रादो वज्रय़ोरिव निस्वनः ||
१८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
गदानिपातै राजेन्द्र तक्षतोर्वै परस्परम् ||
२९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
गदानिर्घातसंह्रादः प्रहाराणामजाय़त ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
गदानिष्टनितो रौद्रो दुर्योधनकृतोद्यमः ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०२
नारद उवाच
गदापट्टिशधारिण्या शूलमुद्गरहस्तय़ा |
३ क
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
गदापरिघनिस्त्रिंशतोमरप्रासय़ोधिनः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
गदापरिघनिस्त्रिंशशक्तिशूलपरश्वधाः |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
गदापरिघनिस्त्रिंशशूलमुद्गरपट्टिशाः ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
गदापरिघपन्थानं रथनागमहाद्रुमम् ||
५० ख
मौसल पर्व
अध्याय
९
अर्जुन उवाच
गदापरिघशक्तीनां सहाः परिघवाहवः |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
गदापरिघसंस्पर्शा नेमे वाणाः शिखण्डिनः ||
५९ ख
विराट पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
गदापाणिरवप्लुत्य तूर्णं चिक्षेप तां गदाम् ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
गदापाणिरवारोहत्ख्यापय़न्पौरुषं महत् ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
गदापाणिरवारोहद्रथात्सिंह इवोन्नदन् ||
३२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
गदापाणिर्नरव्याघ्रो वीक्षन्निव महीमिमाम् ||
३२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
गदापाणिर्भीमसेनस्तरस्वी; प्रवेपय़ञ्शत्रुसङ्घाननीके |
२२ क
विराट पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
गदापाणी सुसंरव्धौ समभ्यद्रवतां हय़ान् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
गदापि सा प्राप्य रथं सुचित्रं; साश्वं ससूतं विनिहत्य सङ्ख्ये |
३६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
गदाप्रहारं भीमो मे न जातु विषहेद्युधि ||
३४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
गदाप्रहारा विपुलाः परिघैश्चापि ताडनम् |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
गदाप्रहाराभिहतो हिमवानपि पर्वतः |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६३
भीष्म उवाच
गदाप्रासासिनाराचैस्तोमरैश्च भुजच्युतैः ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७२
सञ्जय़ उवाच
गदाभिः परिघैश्चान्ये व्याय़ुधाश्च भुजैरपि |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
२७०
मार्कण्डेय़ उवाच
गदाभिः परिघैश्चैव राक्षसो जघ्निवान्कपिम् |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
गदाभिघातसंह्रादः शक्राशनिरिवोपमः ||
२४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
गदाभिरन्यैर्गुर्वीभिः परिघैर्मुसलैरपि |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
गदाभिरसिभिः प्रासैर्वाणैश्च नतपर्वभिः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
२४०
दानवा ऊचुः
गदाभिर्मुसलैः खड्गैः शस्त्रैरुच्चावचैस्तथा ||
१७ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
गदाभिर्मुसलैश्चान्ये परिघैश्च महारथाः ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४०
सञ्जय़ उवाच
गदाभिर्मुसलैश्चैव नानाशस्त्रैश्च सङ्घशः ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
गदाभिर्मुसलैश्चैव निस्त्रिंशैश्च शिलीमुखैः |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
गदाभिर्मुसलैश्चैव भिण्डिपालैः सतोमरैः |
१४ क