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शान्ति पर्व
अध्याय २७९
भीष्म उवाच
सौवर्णं राजतं वापि यथा भाण्डं निषिच्यते |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय १२६
सञ्जय़ उवाच
सौवर्णं सत्यसन्धस्य ध्वजमक्लिष्टकर्मणः |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
सौवर्णं सर्वतोभद्रं मुक्तावैडूर्यमण्डितम् ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
सौवर्णकांस्योपदुहास्ततो गाः; पार्थो ददौ व्राह्मणसत्तमेभ्यः ||
३४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८०
व्यास उवाच
सौवर्णगिरय़स्तत्र मणिरत्नशिलोच्चय़ाः |
२५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
सौवर्णा राजताश्चैव तैजसाश्च पृथग्विधाः |
५८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
सौवर्णां पृथिवीं कृत्वा दशव्यामां द्विराय़ताम् |
११० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८
व्यास उवाच
सौवर्णानि च भाण्डानि सञ्चक्रुस्तत्र शिल्पिनः ||
३२ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
सौवर्णीं प्रतिपश्याम सीतामप्रतिमां शुभाम् ||
१८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
सौवलं कृतवर्माणं द्रौणिमाधिरथिं कृपम् |
४८ क
कर्ण पर्व
अध्याय २२
धृतराष्ट्र उवाच
सौवलं च तथा तात नीतिमानिति मन्यते |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
सौवलं समरे दृष्ट्वा विचरन्तमभीतवत् ||
३८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
सौवलस्तस्य समरे क्रुद्धो राजन्प्रतापवान् |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
सौवलस्तु गदां गृह्य प्रचस्कन्द रथोत्तमात् |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
सौवलस्तु ततस्तस्य शरांश्चिक्षेप वीर्यवान् |
३० क
सभा पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
सौवलस्त्वविचार्यैव जितकाशी मदोत्कटः |
४३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४२
वैशम्पाय़न उवाच
सौवलस्य च दुर्वुद्ध्या मिथोभेदः प्रवर्तते ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
सौवलस्य धनुश्छित्त्वा हस्तावापं निकृत्य च |
३४ क
सभा पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
सौवलस्य वधं प्रेप्सुरिदं वचनमव्रवीत् |
३८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
सौवलस्य वलं सङ्ख्ये त्यक्त्वात्मानं महावलः ||
६१ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
सौवलस्यात्मजाः शूरा निर्गता रणमूर्धनि ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
सौवलीं समरे सेनां शातय़ेतां समन्ततः ||
२२ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
सौवले निर्जिते राजन्भीमसेनेन धन्विना |
६८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५७
सञ्जय़ उवाच
सौवलेन च राजेन्द्र तथा दुःशासनेन च |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
सौवलेन मताक्षेण राज्ञा शकुनिना सह ||
२ ख
सभा पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
सौवलेनेह तत्सर्वं धर्मेण विजितं वसु ||
३७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
सौवलेय़ि निवोध त्वं यत्त्वां वक्ष्यामि सुव्रते |
५६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
सौवलेय़ी च गान्धारी पुत्रशोकमपास्य तम् |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
सौवलोऽपि धनुर्गृह्य घोरमन्यत्सुदुःसहम् |
३७ क
शल्य पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
सौवलोऽभ्यद्रवद्युद्धे पाण्डवानातताय़िनः ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय २४९
कोटिकाश्य उवाच
सौवीरवीराः प्रवरा युवानो; राजानमेते वलिनोऽनुय़ान्ति ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
सौवीराः कितवाः प्राच्या दाक्षिणात्याश्च सर्वशः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
सौवीराः कितवाः प्राच्याः प्रतीच्योदीच्यमालवाः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
सौवीराः कितवाः प्राच्याः प्रतीच्योदीच्यमालवाः |
७६ क
भीष्म पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
सौवीराः कितवाः प्राच्याः प्रतीच्योदीच्यमालवाः ||
१३ ख
सभा पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
सौवीरान्प्रतिपत्तौ च वभ्रोरेष यशस्विनः |
१० क
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
सौश्रुतिश्चित्रसेनश्च मित्रवर्मा च भारत ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
सौश्रुतेः सशिरस्त्राणं शिरः काय़ादपाहरत् |
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
सौष्ठवे चास्त्रय़ोगे च सव्यसाची न मत्समः ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय १२५
वैशम्पाय़न उवाच
सौष्ठवेनाभिसंय़ुक्तः सोऽविध्यद्विविधैः शरैः ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६७
अर्जुन उवाच
सौहार्दं सर्वभूतेषु यः करोत्यतिमात्रशः |
४० क
आदि पर्व
अध्याय ७२
देवय़ान्यु उवाच
सौहार्दे चानुरागे च वेत्थ मे भक्तिमुत्तमाम् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
सौहित्यं च न कर्तव्यं रात्रौ नैव समाचरेत् |
११५ क
वन पर्व
अध्याय ३६
भीमसेन उवाच
सौहित्यदानादेकस्मादेनसः प्रतिमुच्यते ||
३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
सौहृदं च कृपां चैव प्राप्तकालं महात्मनाम् |
१०१ क
आदि पर्व
अध्याय १२२
द्रुपद उवाच
सौहृदं मे त्वय़ा ह्यासीत्पूर्वं सामर्थ्यवन्धनम् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
सौहृदस्य च वीर्यस्य कुलीनत्वस्य माधव ||
६५ ख
वन पर्व
अध्याय २८१
सावित्र्यु उवाच
सौहृदात्सर्वभूतानां विश्वासो नाम जाय़ते |
४२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०४
जनमेजय़ उवाच
सौहृदाद्वा सुहृत्स्निग्धो भगवान्वा पितामहः ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १२२
द्रुपद उवाच
सौहृदान्यपि जीर्यन्ते कालेन परिजीर्यताम् |
४ क