chevron_left  स्तूय़मानस्यarrow_drop_down
आदि पर्व
अध्याय ७५
देवय़ान्यु उवाच
स्तूय़मानस्य दुहिता कथं दासी भविष्यसि ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
स्तूय़माना यय़ू राजन्रथैर्मणिविभूषितैः ||
५७ ख
सभा पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
स्तूय़मानाश्च विश्रान्ताः काले निद्रामथात्यजन् ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
स्तूय़मानो जय़ाशीभिरारुरोह महारथम् ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७९
भीष्म उवाच
स्तूय़मानो जय़ाशीर्भिर्निष्क्रम्य गजसाह्वय़ात् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
स्तूय़मानो द्विजाग्र्यैस्तैर्मरुद्भिरिव वासवः ||
६१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
स्तूय़मानो महादेवः प्रीय़ते चात्मनामभिः |
१५५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
स्तूय़मानो महाराज भीष्मस्याग्नीननुव्रजन् ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
स्तूय़मानो यय़ौ राजा नगरं नागसाह्वय़म् ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४
व्यास उवाच
स्तेनं मां त्वं विदित्वा च स्वधर्ममनुपालय़ |
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
स्तेनाश्च पतिताश्चैव राजन्नार्हन्ति केतनम् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
स्तेनो वा यदि वा पापो यदि वा पापकृत्तमः |
५० क
उद्योग पर्व
अध्याय २९
वासुदेव उवाच
स्तेनो हरेद्यत्र धनं ह्यदृष्टः; प्रसह्य वा यत्र हरेत दृष्टः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३५
व्यास उवाच
स्तेय़ं कुर्वंस्तु गुर्वर्थमापत्सु न निवध्यते |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३६
व्यास उवाच
स्तेय़ं तु यस्यापहरेत्तस्मै दद्यात्समं वसु |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २४
व्यास उवाच
स्तेय़ं त्वय़ा कृतमिदं फलान्याददता स्वय़म् |
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३७
व्रह्मो उवाच
स्तैन्यं हिंसा परीवादः परितापः प्रजागरः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३२
महेश्वर उवाच
स्तैन्यान्निवृत्ताः सततं सन्तुष्टाः स्वधनेन च |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
स्तोकं ह्यपि न पश्यामि फलं जीवितधारणे ||
१६१ ख
वन पर्व
अध्याय १७९
वैशम्पाय़न उवाच
स्तोककाः शिखिनश्चैव पुंस्कोकिलगणैः सह |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९१
भीष्म उवाच
स्तोतव्या चेह पृथिवी निवापस्येह धारिणी |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२५
भीष्म उवाच
स्तोत्रं जगौ स विश्वाय़ निर्गुणाय़ महात्मने ||
३ ख
विराट पर्व
अध्याय ३६
अर्जुन उवाच
स्तोत्रेण चैव सैरन्ध्र्यास्तव वाक्येन तेन च |
२३ क
वन पर्व
अध्याय १८३
गौतम उवाच
स्तोष्यसेऽभ्युदय़प्रेप्सुस्तस्य दर्शनसंश्रय़ात् ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय २९३
वैशम्पाय़न उवाच
स्तौति मध्यन्दिने प्राप्ते प्राञ्जलिः सलिले स्थितः ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय ७३
शर्मिष्ठो उवाच
स्तौति वन्दति चाभीक्ष्णं नीचैः स्थित्वा विनीतवत् ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय ११०
लोमश उवाच
स्त्रिय़ आदाय़ काश्चित्सा जगाम वनमञ्जसा ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९०
भीष्म उवाच
स्त्रिय़ं मत्वा तदा चिन्तां प्रपेदे सह भार्यया ||
३ ख
सभा पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़ं समाभाषसि दुर्विनीत; विशेषतो द्रौपदीं धर्मपत्नीम् ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७१
भीष्म उवाच
स्त्रिय़ं सेवेत नात्यर्थं मृष्टं भुञ्जीत नाहितम् ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
वृहस्पतिरु उवाच
स्त्रिय़ं हत्वा तु दुर्वुद्धिर्यमस्य विषय़ं गतः |
९१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५८
भीष्म उवाच
स्त्रिय़ं हत्वा मातरं च को हि जातु सुखी भवेत् |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७४
कश्यप उवाच
स्त्रिय़ं हत्वा व्राह्मणं वापि पापः; सभाय़ां यत्र लभतेऽनुवादम् |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३८
पञ्चचूडो उवाच
स्त्रिय़ं हि यः प्रार्थय़ते संनिकर्षं च गच्छति |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
विदुर उवाच
स्त्रिय़ः कामितकामिन्यो लोकः पूजितपूजकः ||
५१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
स्त्रिय़ः काश्चित्प्रजाय़न्ते चतस्रः पञ्च कन्यकाः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
स्त्रिय़ः कुमुदवर्णाश्च सुन्दर्यः प्रिय़दर्शनाः ||
१५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़ः कुरुपतिर्धीमान्भ्रातुः प्रेम्णा युधिष्ठिरः ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़ः कौरवनाथस्य भीष्मं कुरुकुलोद्भवम् |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८२
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़ः पथि समागम्य सर्वभूतहिते रतम् ||
१४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
स्त्रिय़ः परिपतिष्यन्ति यथैता भरतस्त्रिय़ः ||
४२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४६
भीष्म उवाच
स्त्रिय़ः पुंसां परिददे मनुर्जिगमिषुर्दिवम् |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
श्रीरु उवाच
स्त्रिय़ः पुरुषवेषेण पुंसः स्त्रीवेषधारिणः |
६७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३८
विदुर उवाच
स्त्रिय़ः श्रिय़ो गृहस्योक्तास्तस्माद्रक्ष्या विशेषतः ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४३
भीष्म उवाच
स्त्रिय़ः साध्व्यो महाभागाः संमता लोकमातरः |
१९ क
मौसल पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़ः स्वप्नेषु मुष्णन्ती द्वारकां परिधावति ||
१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़श्च कुरुमुख्यानां पद्भिरेवान्वय़ुस्तदा ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय १८६
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़श्च तां कौरवराजपत्नीं; प्रत्यर्चय़ां चक्रुरदीनसत्त्वाः ||
९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़श्च ते सुगुप्ताः स्युर्वृद्धैराप्तैरधिष्ठिताः |
१९ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़श्च द्विजमुख्येभ्यो गवां शतसहस्रशः ||
१२ ख