अनुशासन पर्व
अध्याय
३९
युधिष्ठिर उवाच
स्त्रिय़श्च पुरुषेष्वेव प्रत्यक्षं लोकसाक्षिकम् ||
१ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
३७
विदुर उवाच
स्त्रिय़श्च योऽरक्षति भद्रमस्तु ते; यश्चाय़ाच्यं याचति यश्च कत्थते ||
३ ख
सभा पर्व
अध्याय
५७
विदुर उवाच
स्त्रिय़श्च राजञ्जडपङ्गुकांश्च; पृच्छ त्वं वै तादृशांश्चैव मूढान् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
स्त्रिय़श्च विविधाकारा यान्ति रुद्रस्य पृष्ठतः |
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
१९
वासुदेव उवाच
स्त्रिय़श्च वृष्णीवीराणां किं मां वक्ष्यन्ति सङ्गताः ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़श्च सर्वा या राज्ञः सप्रेष्याः सपरिच्छदाः |
१४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़श्चान्या नृसिंहानां वभूवुर्हृष्टमानसाः ||
६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़श्चान्यास्तथान्याभिः सहोपविविशुस्ततः ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
स्त्रिय़श्चापुरुषा मार्गं सर्वालङ्कारभूषिताः |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३४
महेश्वर उवाच
स्त्रिय़श्चैव विशेषेण स्त्रीजनस्य गतिः सदा |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़श्चोत्पलपत्राभाः सर्वाः सुप्रिय़दर्शनाः ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३५
व्यास उवाच
स्त्रिय़स्तथापचारिण्यो निष्कृतिः स्याददूषिका |
३० क
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़स्ता वृष्णिवीराणां रुदत्यः शोककर्शिताः |
३३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
स्त्रिय़स्तु राजन्वित्रस्ता भारद्वाजं निरीक्ष्य तम् |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३६
व्यास उवाच
स्त्रिय़स्तेन विशुध्यन्ति इति धर्मविदो विदुः ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७
भीष्म उवाच
स्त्रिय़स्त्रिषवणं स्नात्वा वाय़ुं पीत्वा क्रतुं लभेत् ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़स्त्रिषवणस्नानाद्वाय़ुं पीत्वा क्रतुं लभेत् ||
१३ ख
विराट पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़स्त्वदोषास्तां वक्तुमतस्त्वां प्रव्रवीम्यहम् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३६
व्यास उवाच
स्त्रिय़स्त्वाशङ्किताः पापैर्नोपगम्या हि जानता |
२७ क
वन पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़ा मूढेन लुव्धेन वालेन लघुना तथा |
४४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३१
भीष्म उवाच
स्त्रिय़ा मोषः परिस्थानं दस्युष्वेतद्विगर्हितम् ||
१५ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
स्त्रिय़ा हि परमो भर्ता दैवतं परमं स्मृतम् |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
भीष्म उवाच
स्त्रिय़ां स्त्रीनामधेय़े च विकले चैकपुत्रके |
७३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
स्त्रिय़ां स्त्रीपूर्वके चापि स्त्रीनाम्नि स्त्रीस्वरूपिणि ||
६२ ख
सभा पर्व
अध्याय
६१
कश्यप उवाच
स्त्रिय़ाः पत्या विहीनाय़ाः सार्थाद्भ्रष्टस्य चैव यत् |
७४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
स्त्र्यु उवाच
स्त्रिय़ाः पुरुषसंय़ोगे प्रीतिरभ्यधिका सदा |
४७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
स्त्रिय़ाश्च मे पुत्रशतं तापसेन महात्मना |
३३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४७
भीष्म उवाच
स्त्रिय़ास्तु यद्भवेद्वित्तं पित्रा दत्तं युधिष्ठिर |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
स्त्र्यु उवाच
स्त्रिय़ास्त्वभ्यधिकः स्नेहो न तथा पुरुषस्य वै |
४२ क
आदि पर्व
अध्याय
१६
सूत उवाच
स्त्रिय़ै दानवदैतेय़ाः सर्वे तद्गतमानसाः ||
४० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८३
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़ो गन्धानलङ्कारान्सूक्ष्माणि वसनानि च ||
१४ ख
विराट पर्व
अध्याय
६३
विराट उवाच
स्त्रिय़ो गावो हिरण्यं च यच्चान्यद्वसु किञ्चन |
३२ क
विराट पर्व
अध्याय
१८
द्रौपद्यु उवाच
स्त्रिय़ो गीतस्वनं तस्य मुदिताः पर्युपासते ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८७
भीष्म उवाच
स्त्रिय़ो द्वितीय़ां जाय़न्ते तृतीय़ाय़ां तु वन्दिनः |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़ो भरतसिंहानां नावं लव्ध्वेव पारगाः ||
५ ख
मौसल पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़ो भवान्रक्षतु नः समग्रा; धनञ्जय़स्यागमनं प्रतीक्षन् |
७ ख
मौसल पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़ो भवान्रक्षतु यातु शीघ्रं; नैता हिंस्युर्दस्यवो वित्तलोभात् ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४६
भीष्म उवाच
स्त्रिय़ो माननमर्हन्ति ता मानय़त मानवाः ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
२२०
मार्कण्डेय़ उवाच
स्त्रिय़ो मानुषमांसादा वृद्धिका नाम नामतः |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
नकुल उवाच
स्त्रिय़ो रक्ष्याश्च पोष्याश्च नैवं त्वं वक्तुमर्हसि ||
२१ ख
विराट पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़ो रत्नानि वासांसि पृथक्पृथगनेकशः |
२५ ख
विराट पर्व
अध्याय
८
सुदेष्णो उवाच
स्त्रिय़ो राजकुले पश्य याश्चेमा मम वेश्मनि |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३९
युधिष्ठिर उवाच
स्त्रिय़ो वा तेषु रज्यन्ते विरज्यन्तेऽथ वा पुनः ||
२ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
८३
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रिय़ो वालाश्च वृद्धाश्च कथय़न्ति गृहे गृहे ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
स्त्रिय़ो वालाश्च वृद्धाश्च प्राय़ः क्रीडागता जनाः |
७१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
स्त्रिय़ो वालास्तथा वृद्धाः प्रेक्षकाश्च पृथग्जनाः |
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
स्त्रिय़ो वृद्धा भारतानां जनन्यो; महानस्यो दासभार्याश्च सूत |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३१
श्रीभगवानु उवाच
स्त्रिय़ो वैश्यास्तथा शूद्रास्तेऽपि यान्ति परां गतिम् ||
३२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१९
वासुदेव उवाच
स्त्रिय़ो वैश्यास्तथा शूद्रास्तेऽपि यान्ति परां गतिम् ||
५६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३८
पञ्चचूडो उवाच
स्त्रिय़ो हि मूलं दोषाणां तथा त्वमपि वेत्थ ह ||
१२ ख