विराट पर्व
अध्याय
६६
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यकक्ष्यः सङ्ग्रामे दन्ताभ्यामगमन्महीम् ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
२९४
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यकण्ठीः प्रमदा ग्रामान्वा वहुगोकुलान् |
२ क
वन पर्व
अध्याय
२९४
व्राह्मण उवाच
हिरण्यकण्ठ्यः प्रमदा यच्चान्यत्प्रीतिवर्धनम् |
३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
हिरण्यकवचं देवं चन्द्रमौलिविभूषितम् |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यकवचाः सर्वे सर्वे चोत्तमधन्विनः ||
९९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
हिरण्यकशिपुर्योऽभूद्दानवो मेरुकम्पनः |
५२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
हिरण्यकशिपुश्चैव कैटभश्चैव दानवः |
५३ क
शल्य पर्व
अध्याय
३०
श्रीवासुदेव उवाच
हिरण्यकशिपुश्चैव क्रिय़यैव निषूदितौ |
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यकशिपुश्चैव हिरण्याक्षो विरोचनः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यगर्भं त्वामाहुः स्वधा स्वाहा च केशव ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
हिरण्यगर्भः शत्रुघ्नो व्याप्तो वाय़ुरधोक्षजः ||
५७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
हिरण्यगर्भप्रमुखा देवाः सेन्द्रा महर्षय़ः |
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९६
भीष्म उवाच
हिरण्यगर्भादृषिणा वसिष्ठेन महात्मना |
४४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
हिरण्यगर्भेण यथा वद्धं विष्णोः पुरा रणे ||
६९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
हिरण्यगर्भो द्युतिमानेष यश्छन्दसि स्तुतः |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
हिरण्यगर्भो भगवानेष छन्दसि सुष्टुतः |
६५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९१
वसिष्ठ उवाच
हिरण्यगर्भो भगवानेष वुद्धिरिति स्मृतः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
हिरण्यगर्भो भगवान्सर्वलोकपितामहः ||
१८ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
हिरण्यगर्भो भूगर्भो माधवो मधुसूदनः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३७
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यगर्भो योगस्य वेत्ता नान्यः पुरातनः ||
६० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
हिरण्यगर्भो लोकादिश्चतुर्वक्त्रो निरुक्तगः |
४७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
हिरण्यचित्राय़ुधवैद्युतं च; महारथैरावृतशव्दवच्च ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
२१८
मार्कण्डेय़ उवाच
हिरण्यचूडमुकुटं हिरण्याक्षं महाप्रभम् ||
१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
हिरण्यदण्ड्या वध्याश्च कर्तव्या देशकालतः ||
४ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
५८
भीष्म उवाच
हिरण्यदानं गोदानं पृथिवीदानमेव च |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
हिरण्यदानैर्गोदानैर्भूमिदानैश्च सर्वशः |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
हिरण्यनाभः सुतपाः पद्मनाभः प्रजापतिः ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यनिष्कान्वसनानि गाश्च; प्रदाय़ शिक्षाक्षरमन्त्रविद्भ्यः ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४५
सनत्सुजात उवाच
हिरण्यपर्णमश्वत्थमभिपत्य अपक्षकाः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
१७०
अर्जुन उवाच
हिरण्यपुरघातं च माय़ानां च निवारणम् |
६३ क
वन पर्व
अध्याय
१७०
अर्जुन उवाच
हिरण्यपुरमारुज्य निहत्य च महासुरान् |
६१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९८
नारद उवाच
हिरण्यपुरमित्येतत्ख्यातं पुरवरं महत् |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१७०
मातलिरु उवाच
हिरण्यपुरमित्येतत्ख्याय़ते नगरं महत् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
हिरण्यपुष्पाश्चौषध्यः कुशकाञ्चनशाड्वलाः |
८८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यमवहन्नद्यस्तस्मिञ्जनपदेश्वरे ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
हिरण्यमूर्तिर्भगवानेष एव च पावकिः |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०६
भगीरथ उवाच
हिरण्यरत्ननिचितानददं रत्नपर्वतान् |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
हिरण्यरत्नसञ्चय़ाः शुभाशुभेन सञ्चिताः |
५१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५
व्यास उवाच
हिरण्यरेतसोऽम्भः स्यात्परिवर्तेत मेदिनी |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८४
गङ्गो उवाच
हिरण्यरेता इति वै ऋषिभिर्विवुधैस्तथा |
७४ ख
आदि पर्व
अध्याय
२२३
द्रोण उवाच
हिरण्यरेतास्त्वरितो ज्वलन्नाय़ाति नः क्षय़म् |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यलोम्नो नृपतेः साक्षादिन्द्रसखस्य वै ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
२१८
मार्कण्डेय़ उवाच
हिरण्यवर्ण भद्रं ते लोकानां शङ्करो भव |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यवर्णं यं गर्भमदितिर्दैत्यनाशनम् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यवर्णः शकुनिस्तस्मै हंसात्मने नमः ||
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७८
वसिष्ठ उवाच
हिरण्यवर्णां पिङ्गाक्षीं सवत्सां कांस्यदोहनाम् |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९०
भीष्म उवाच
हिरण्यवर्मणः कन्या ज्ञात्वा तां तु शिखण्डिनीम् |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
हिरण्यवर्मणे दूतं व्राह्मणं वेदपारगम् ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९०
भीष्म उवाच
हिरण्यवर्मा दुर्धर्षो महासेनो महामनाः ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
हिरण्यवर्मा निशितैः पृषत्कै; स्तवात्मजानामनिलात्मजो वै |
१४ क