chevron_left  स्वय़ोनितस्तत्कुरुतेarrow_drop_down
वन पर्व
अध्याय २६
मार्कण्डेय़ उवाच
स्वय़ोनितस्तत्कुरुते प्रभावा; न्नेशे वलस्येति चरेदधर्मम् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय १७०
मातलिरु उवाच
सय़क्षगन्धर्वगणैः पन्नगासुरराक्षसैः ||
८ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २९१
वसिष्ठ उवाच
सय़क्षभूतगन्धर्वे सकिंनरमहोरगे |
३० क
आदि पर्व
अध्याय २१९
वैशम्पाय़न उवाच
सय़क्षरक्षोगन्धर्वनरकिंनरपन्नगैः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
कृप उवाच
सय़क्षराक्षसगणं सभूतभुजगद्विपम् |
४१ ख
वन पर्व
अध्याय १७०
अर्जुन उवाच
सय़क्षासुरगन्धर्वैः सपक्षिगणपन्नगैः ||
६८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२९
व्यास उवाच
सय़ज्ञाः सखिला वेदाः प्रवक्तृभ्यो विनिःसृताः ||
१९ ख