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भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
स नागलोके संवृद्धो मात्रा च परिरक्षितः |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
स नागैर्वहुशो राजन्सर्वतः संवृतो रणे |
६७ क
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
स नादान्विनदन्घोरान्राक्षसः पुरुषादकः |
९२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३४
विदुर उवाच
स नाप्नोति रसं तेभ्यो वीजं चास्य विनश्यति ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७६
अर्जुन उवाच
स नाम सम्यग्वर्तेत पाण्डवेष्विति माधव |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
भीष्म उवाच
स नामृष्यत तं क्षेपमवैक्षत च पावकिम् |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
स नाराचगणैः पार्थान्द्रौणिर्विद्ध्वा महावलः ||
१२५ ख
वन पर्व
अध्याय ३०
युधिष्ठिर उवाच
स नाशय़ित्वा क्लेष्टारं परलोके च नन्दति ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
स नाहुषः प्रेक्षमाण उदपानं गतोदकम् |
१५ क
मौसल पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
स निःशेषं तदा चक्रे शार्ङ्गचक्रगदाधरः ||
४४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
स निःशेषानरीन्कृत्वा विरराज जनक्षय़े |
१३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
स निकृत्तं धनुर्दृष्ट्वा खं जवेन समाविशत् |
५७ क
वन पर्व
अध्याय ४९
वृहदश्व उवाच
स निकृत्या जितो राजा पुष्करेणेति नः श्रुतम् |
४० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३१
व्राह्मण उवाच
स निगृह्य महादोषान्साधून्समभिपूज्य च |
६ क
वन पर्व
अध्याय ७२
वृहदश्व उवाच
स निगृह्यात्मनो दुःखं दह्यमानो महीपतिः |
२४ क
वन पर्व
अध्याय ५६
वृहदश्व उवाच
स नित्यमन्तरप्रेक्षी निषधेष्ववसच्चिरम् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय १२१
वैशम्पाय़न उवाच
स नित्यमाश्रमं गत्वा द्रोणेन सह पार्षतः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय १५४
व्राह्मण उवाच
स नित्यमाश्रमं गत्वा द्रोणेन सह पार्षतः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
स निनीषति दुर्वुद्धिर्मां किलैकं यमक्षय़म् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
स निमज्जति कालस्य यदैकत्वं न वुध्यते |
७३ क
वन पर्व
अध्याय १३६
भरद्वाज उवाच
स निमित्ते विनष्टे तु ममार सहसा शिशुः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०
भीम उवाच
स निराशो निवर्तेत कर्मेदं नस्तथोपमम् ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
स निरीक्ष्य महावाहुः सर्वतो रङ्गमण्डलम् |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
स निर्भिद्य भुजं सव्यं माधवस्य महात्मनः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
स निर्भिद्य भुजं सव्यं माधवस्य महारणे |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
स निर्भिद्य रणे पार्थं सूतपुत्रधनुश्च्युतः |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
स निर्भिन्नः शरैर्घोरैर्भुजगैः कोपितैरिव |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
स निर्भिन्नो रणे भीमो नाराचैर्मर्मभेदिभिः |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
स निर्ययौ केतुमता रथेन; नरर्षभः श्वेतहय़ेन वीरः |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
स निर्ययौ गजपुराद्याजकैः परिवारितः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६७
भीष्म उवाच
स निर्ययौ महातेजा वलेन महता वृतः |
२९ क
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
स निर्ययौ महावाहुः पुण्डरीकेक्षणस्ततः |
२८ क
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
स निर्ययौ महासेनो महत्या सेनय़ा वृतः |
५६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
स निर्ययौ रथानीकं पिता देवव्रतस्तव |
५ क
वन पर्व
अध्याय २७९
द्युमत्सेन उवाच
स निर्वर्ततु मेऽद्यैव काङ्क्षितो ह्यसि मेऽतिथिः ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
स निर्विण्णस्ततो राजंस्तपस्तेपे महातपाः |
५ क
वन पर्व
अध्याय १९
वासुदेव उवाच
स निवर्त रथेनाशु पुनर्दारुकनन्दन |
३० क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
स निवार्य महावाणांस्तव पुत्रेण प्रेषितान् |
४२ क
वन पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
स निवासोऽभवद्विप्र विष्णोर्जिष्णोस्तथैव च |
२० क
विराट पर्व
अध्याय ६४
उत्तर उवाच
स निवृत्तो नरव्याघ्रो मुञ्चन्वज्रनिभाञ्शरान् |
२६ क
वन पर्व
अध्याय २६१
मार्कण्डेय़ उवाच
स निश्चित्य ततः कृत्यं स्वसारमुपसान्त्व्य च |
५२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६३
भीष्म उवाच
स निश्चय़मथो कृत्वा पूजय़ामास देवताः |
४ क
सभा पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
स निश्चय़ार्थं कार्यस्य कृष्णमेव जनार्दनम् |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय २८
श्रीभगवानु उवाच
स निश्चय़ेन योक्तव्यो योगोऽनिर्विण्णचेतसा ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
स निषण्णो रथोपस्थे मूर्छामभिजगाम ह ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
भीष्म उवाच
स निष्पत्य ददौ युद्धं तेभ्यो राजा महावलः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
स निहत्य वहूञ्शूरानश्वत्थामा व्यरोचत |
५३ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
स निय़तं कुपितः |
५३ ग
आदि पर्व
अध्याय ९९
वैशम्पाय़न उवाच
स निय़ुक्तो मय़ा व्यक्तं त्वय़ा च अमितद्युते |
१५ ख
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
स नीचैः प्रश्रितो भूत्वा वहुरत्नपुरोगमः |
४० क