आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
८
व्यास उवाच
अहमप्येतदेव त्वां व्रवीमि कुरु मे वचः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
अहमप्येवमेव त्वां कुर्वाणः शल्मले रुषा |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
१९३
धृतराष्ट्र उवाच
अहमप्येवमेवैतच्चिन्तय़ामि यथा युवाम् |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
अहमप्येवमेवैनं जानामि स्वय़मात्मजम् ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
अहमप्येवमेवैनं लोकं जानाम्यशाश्वतम् |
९२ क
वन पर्व
अध्याय
१७०
अर्जुन उवाच
अहमस्त्रैर्वहुविधैः प्रत्यगृह्णं नराधिप ||
२५ ख
विराट पर्व
अध्याय
३९
अर्जुन उवाच
अहमस्म्यर्जुनः पार्थः सभास्तारो युधिष्ठिरः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
अहमस्य करोम्यद्य सदृशीं वैरय़ातनाम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
३९
महेश्वर उवाच
अहमस्य विजानामि सङ्कल्पं मनसि स्थितम् ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३२
श्रीभगवानु उवाच
अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशय़स्थितः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२८
श्रीभगवानु उवाच
अहमात्मा हि लोकानां विश्वानां पाण्डुनन्दन |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३४२
व्राह्मण उवाच
अहमात्मानमात्मस्थमेक एवात्मनि स्थितः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३४९
व्राह्मण उवाच
अहमात्मानमात्मस्थो मार्गमाणोऽऽत्मनो हितम् |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३२
श्रीभगवानु उवाच
अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वशः ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३२
श्रीभगवानु उवाच
अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च ||
२० ख
विराट पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
अहमापत्सु चापि त्वां मोक्षय़ामि पुनः पुनः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३९
विश्वामित्र उवाच
अहमापद्गतः क्षुव्धो भक्षय़िष्ये श्वजाघनीम् ||
६७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
अहमामन्त्र्य सुस्निग्धमश्वत्थामानमव्रुवम् ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
अहमावारय़िष्यामि द्रोणपुत्रास्त्रमाशुगैः ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
धृष्टद्युम्न उवाच
अहमावारय़िष्यामि द्रोणमद्य सहानुगम् ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
अहमावारय़िष्यामि पाण्डवानामनीकिनीम् ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
अहमावारय़िष्यामि पार्थं तिष्ठ सुय़ोधन ||
७० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
अहमावारय़िष्यामि वेलेव मकरालय़म् ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
अहमावारय़िष्यामि वेलेव मकरालय़म् ||
५७ ग
विराट पर्व
अध्याय
४३
कर्ण उवाच
अहमावारय़िष्यामि वेलेव मकरालय़म् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
अर्जुन उवाच
अहमावारय़िष्यामि सर्वसैन्यानि केशव |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७३
भीष्म उवाच
अहमासं पण्डितको हैतुको वेदनिन्दकः |
४५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
अहमासं पुरा चेति मनसापि न वुध्यसे ||
१०१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११८
कीट उवाच
अहमासं मनुष्यो वै शूद्रो वहुधनः पुरा |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
अहमासं यथाद्य त्वं भविता त्वं यथा वय़म् |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
अहमासादिता राजन्कुमारी पितुराश्रमे ||
६६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४१
व्रह्मो उवाच
अहमित्येव तत्सर्वमभिमन्ता स उच्यते ||
३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४१
व्रह्मो उवाच
अहमित्येव सम्भूतो द्वितीय़ः सर्ग उच्यते ||
१ ख
विराट पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
अहमिन्द्रस्य वचनात्सङ्ग्रामेऽभ्यहनं पुरा |
९ क
विराट पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
अहमिन्द्राद्दृढां मुष्टिं व्रह्मणः कृतहस्तताम् |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
९
इन्द्र उवाच
अहमिन्द्रो देवराजस्तक्षन्विदितमस्तु ते |
२९ क
वन पर्व
अध्याय
२१८
शक्र उवाच
अहमिन्द्रो भविष्यामि तव वाक्यान्महावल ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११
शल्य उवाच
अहमिन्द्रोऽस्मि देवानां लोकानां च तथेश्वरः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
५२
वृहदश्व उवाच
अहमिन्द्रोऽय़मग्निश्च तथैवाय़मपाम्पतिः |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३१
राजो उवाच
अहमिष्टिं करोम्यद्य पुत्रार्थं ते विशां पते |
२७ क
शल्य पर्व
अध्याय
३०
दुर्योधन उवाच
अहमुत्थाय़ वः सर्वान्प्रतिय़ोत्स्यामि संय़ुगे ||
३८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
अहमुत्थाय़ वः सर्वान्प्रतिय़ोत्स्यामि संय़ुगे |
१६ क
विराट पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
अहमुत्पाटय़िष्यामि वैराटे व्येतु ते भय़म् ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३१
राजो उवाच
अहमेकः परिद्यूनो भवन्तं शरणं गतः ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
अहमेकः परिद्यूनो विरथो हतवाहनः ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
अहमेकः समादास्ये तिमिर्मत्स्यानिवौदकान् ||
४९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८९
भीष्म उवाच
अहमेकस्तु चारेण वचनान्नारदस्य च |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
अहमेको विमुक्तस्तु भाग्ययोगाद्यदृच्छय़ा |
७७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
अहमेको हनिष्यामि जोषमास्स्व कुदेशज ||
७० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
अहमेको हनिष्यामि पाण्डवान्नात्र संशय़ः |
२५ क