भीष्म पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
स भवान्सर्वसैन्येन परिवार्य पितामहम् |
६ क
वन पर्व
अध्याय
२९८
युधिष्ठिर उवाच
स भवान्सुहृदस्माकमथ वा नः पिता भवान् ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
देवा ऊचुः
स भविष्यति देवेश सारथिस्ते न संशय़ः ||
९५ ख
वन पर्व
अध्याय
२१३
व्रह्मो उवाच
स भविष्यति सेनानीस्त्वय़ा सह शतक्रतो |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६३
भीष्म उवाच
स भवेदचिराद्राजा न मिथ्या वाग्भवेन्मम ||
३९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
स भारत महानासीद्योधानां सुमहात्मनाम् |
४१ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
स भारतफलं प्राप्य परं व्रह्माधिगच्छति ||
५१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
स भारतरथश्रेष्ठः सर्वभारतहर्षणः |
५१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
स भित्त्वा तु शरो राजन्पाञ्चाल्यं कुलनन्दनम् |
३४ क
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
स भित्त्वा स्तम्भितं तोय़ं स्कन्धे कृत्वाय़सीं गदाम् |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
स भित्त्वा हृदय़ं तस्य राक्षसस्य महाशरः |
१३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
स भित्त्वा हृदय़ं तस्य राक्षसस्य शरोत्तमः |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
स भिन्नकवचः शूरस्तोत्त्रार्दित इव द्विपः |
५१ क
शल्य पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
स भिन्नकुम्भः सहसा विनद्य; मुखात्प्रभूतं क्षतजं विमुञ्चन् |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
स भिन्नमर्मा स्रस्ताङ्गः प्रभ्रष्टमुकुटाङ्गदः |
६८ क
वन पर्व
अध्याय
२६४
मार्कण्डेय़ उवाच
स भिन्नमर्माभिहतो वक्त्राच्छोणितमुद्वमन् |
३७ क
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
स भिन्नवर्मा रुधिरं वमन्वित्रस्तमानसः |
५४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
स भिन्नहृदय़ो राजा भगदत्तः किरीटिना |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
स भिन्नहृदय़ो वाहादपतन्मेदिनीतले ||
६२ ख
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
स भिन्नहृदय़ो वीरो वक्त्राच्छोणितमुद्वमन् |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
स भीमं छादय़न्वाणैः सूतपुत्रः पृथग्विधैः |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
स भीमं नवभिर्वाणैरश्वानष्टभिरर्दय़त् |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३०
सञ्जय़ उवाच
स भीमं पञ्चभिर्विद्ध्वा पुनर्विव्याध सप्तभिः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
स भीमं पञ्चभिर्विद्ध्वा राधेय़ः प्रहसन्निव |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
स भीमं पञ्चभिर्विद्ध्वा शरैः संनतपर्वभिः |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
स भीमं शरधाराभिस्ताडय़ामास पार्थिवः |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
१७५
वैशम्पाय़न उवाच
स भीमं सहसाभ्येत्य पृदाकुः क्षुधितो भृशम् |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
स भीमः कारय़ामास धर्मराजस्य शासनात् ||
२८ ख
विराट पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
स भीमधन्वानमुदग्रवीर्यं; धनञ्जय़ं शत्रुगणे चरन्तम् |
२ क
वन पर्व
अध्याय
७१
वृहदश्व उवाच
स भीमवचनाद्राजा कुण्डिनं प्राविशत्पुरम् |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
स भीमसेनं च जनार्दनं च; किरीटिनं चाप्यमनुष्यकर्मा |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
स भीमसेनं दशभिर्माद्रीपुत्रौ त्रिभिस्त्रिभिः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२८
सञ्जय़ उवाच
स भीमसेनं दशभिर्माद्रीपुत्रौ त्रिभिस्त्रिभिः |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
स भीमसेनः कुपितो वलवान्सत्यविक्रमः |
५४ क
विराट पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
स भीमसेनः प्राकारादारुज्य तरसा द्रुमम् |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
स भीमसेनः शुशुभे तोमरैरङ्गमाश्रितैः |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
स भीमसेनः सहितो यमाभ्यां; वृकोदरो वीररथस्य गोप्ता |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५२
सञ्जय़ उवाच
स भीमसेनरक्षार्थं हैडिम्वं प्रत्यचोदय़त् ||
४७ ख
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
स भीमसेनस्तं श्रुत्वा सम्प्रहृष्टतनूरुहः |
६३ क
वन पर्व
अध्याय
१७६
वैशम्पाय़न उवाच
स भीमसेनस्तेजस्वी तथा सर्पवशं गतः |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
स भीमसेनस्य रथं हताश्वो; माद्रीसुतः कर्णसुताभितप्तः |
३१ क
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
स भीमसेनाभिहतस्तवात्मजः; पपात सङ्कम्पितदेहवन्धनः |
६१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
स भीमसेनाभिहतो सूतपुत्रः कुरूद्वह |
४० क
वन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
स भीमसेने निष्क्रान्ते मृगय़ार्थमरिन्दमे |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
स भीमसेनेन निकृत्तवर्मा; मद्राधिपश्चर्म सहस्रतारम् ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
स भीमसेनोऽर्हति गर्हणां मे; न त्वं नित्यं रक्ष्यसे यः सुहृद्भिः ||
७७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
स भीमस्त्रिभिराय़स्तः सूतपुत्रं पतत्रिभिः |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
स भीमस्त्वरय़ा युक्तो याहि यत्र धनञ्जय़ः |
६२ क
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
स भीमेन परामृष्टो दुर्वलो वलिना रणे |
६० क
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैश्रवण उवाच
स भीमेन महाराज भ्रात्रा तव विमोक्षितः ||
५९ ख