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आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
स कदाचित्तमुपाध्याय़माहोत्तङ्कः |
९७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
भीष्म उवाच
स कदाचित्परिपतञ्श्वपचानां निवेशनम् |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११३
भीष्म उवाच
स कदाचित्प्रसार्यैवं तां ग्रीवां शतय़ोजनाम् |
९ क
सभा पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
स कदाचित्सभामध्ये धार्तराष्ट्रो महीपतिः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
स कदाचित्समुद्रान्ते कस्मिंश्चिद्गिरिगह्वरे |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०
शल्य उवाच
स कदाचित्समुद्रान्ते तमपश्यन्महासुरम् |
३३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
स कदाचित्समुद्रान्ते वसन्द्रारवतीमनु |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
स कदाचित्समुद्रान्ते विचरन्नाश्रमान्तिके |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २९
व्राह्मण उवाच
स कदाचित्समुद्रान्ते विचरन्वलदर्पितः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय १६०
गन्धर्व उवाच
स कदाचिदथो राजा श्रीमानुरुय़शा भुवि |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
स कदाचिदरण्ये क्षुधार्तोऽर्कपत्राण्यभक्षय़त् ||
५१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
स कदाचिदृषिस्तात यज्ञं कर्तुमनास्तदा |
२० क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
स कदाचिद्याज्यकार्येणाभिप्रस्थित उत्तङ्कं नाम शिष्यं निय़ोजय़ामास |
८६ क
आदि पर्व
अध्याय १३
सूत उवाच
स कदाचिद्वनं गत्वा विप्रः पितृवचः स्मरन् |
३० क
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
स कदाचिद्वनं यातो यमुनामभितो नदीम् |
४१ क
आदि पर्व
अध्याय १६६
गन्धर्व उवाच
स कदाचिद्वनं राजा मृगय़ां निर्ययौ पुरात् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय ९
सूत उवाच
स कदाचिद्वनं विप्रो रुरुरभ्यागमन्महत् |
२० क
आदि पर्व
अध्याय ४५
सूत उवाच
स कदाचिद्वनचरो मृगं विव्याध पत्रिणा |
२१ क
वन पर्व
अध्याय ६२
वृहदश्व उवाच
स कदाचिद्वने वीरः कस्मिंश्चित्कारणान्तरे |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय २५३
भीष्म उवाच
स कदाचिन्निराहारो वाय़ुभक्षो महातपाः |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय ८२
वैशम्पाय़न उवाच
स कदाचिन्नृपश्रेष्ठो यय़ातिः शक्रमागमत् |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०१
भीष्म उवाच
स कदाचिन्मनुं विप्रो ददर्शोपससर्प च |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५३
भीष्म उवाच
स कदाचिन्महातेजा जलवासो महीपते |
४ क
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
स कदाचिन्महाराज ददर्श परमस्त्रिय़म् |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
स कदाचिन्महावाहुः प्रभूतवलवाहनः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४०
भीष्म उवाच
स कदाचिन्महेष्वास देवराजालय़ं गतः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
स कदाचिन्मृगं विद्ध्वा गङ्गामनुसरन्नदीम् |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय ३६
सूत उवाच
स कदाचिन्मृगं विद्ध्वा वाणेन नतपर्वणा |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
कृष्ण उवाच
स कदाचिन्मृगाँल्लिप्सुर्नान्वविन्दत्प्रय़त्नवान् |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
स कदाचिन्मृगय़ां यातः पारिक्षितो जनमेजय़ः कस्मिंश्चित्स्वविषय़ोद्देशे आश्रममपश्यत् |
११ क
वन पर्व
अध्याय ७७
वृहदश्व उवाच
स कम्पय़न्निव महीं त्वरमाणो महीपतिः |
३ क
सभा पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
स कम्पय़न्निव महीं वलेन चतुरङ्गिणा |
१७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय २
कृप उवाच
स करोत्यात्मनोऽनर्थान्नैष वुद्धिमतां नय़ः ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
स कर्णं कर्णिना कर्णे पीतेन निशितेन च |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
स कर्णं कर्णिना कर्णे पीतेन निशितेन च |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
स कर्णं कर्णिना कर्णे पुनर्विव्याध फाल्गुनिः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५३
सञ्जय़ उवाच
स कर्णं त्वं समुत्सृज्य राक्षसेन्द्रमलाय़ुधम् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
स कर्णं दशभिर्विद्ध्वा वृषसेनं च सप्तभिः |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
स कर्णं पञ्चविंशत्या नाराचानां समार्पय़त् |
४९ क
सभा पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
स कर्णं युधि निर्जित्य वशे कृत्वा च भारत |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
स कर्णचापप्रभवानिषूनाशीविषोपमान् |
३५ क
विराट पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
स कर्णमभ्युदीक्ष्याथ दुर्योधनमभाषत ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
स कर्णमाकर्णविकृष्टसृष्टैः; शरैः शरीरान्तकरैर्ज्वलद्भिः |
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
स कर्णवाणाभिहतः किरीटी; भीमं तथा प्रेक्ष्य जनार्दनं च |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
स कर्णिकारप्रवरोच्छ्रितध्वजः; सुवर्णवर्मार्जुनिरर्जुनाद्वरः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६३
सञ्जय़ उवाच
स कर्णे साय़कानष्टौ व्यसृजत्क्रोधमूर्छितः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२५
सञ्जय़ उवाच
स कर्णो निर्जितः सङ्ख्ये सैन्धवश्च निपातितः ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२५
सञ्जय़ उवाच
स कर्णो निर्जितः सङ्ख्ये हतश्चैव जय़द्रथः ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३१
नारद उवाच
स कर्ता कारणं चैव कार्यं चातिवलद्युतिः ||
४३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १७४
भीष्म उवाच
स कर्म कलुषं कृत्वा क्लेशे महति धीय़ते ||
२ ख