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शान्ति पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
स राजा पुत्रपौत्राणां सम्वन्धिसुहृदां तथा |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
स राजा भवता दृष्टः कुशली च युधिष्ठिरः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
भीष्म उवाच
स राजा भावितः पूर्वं दैवेन विधिना वसुः |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९१
भीष्म उवाच
स राजा भूय़ एवाथ कृत्वा तत्त्वत आगमम् |
३ क
आदि पर्व
अध्याय १६३
गन्धर्व उवाच
स राजा मन्मथाविष्टस्तद्गतेनान्तरात्मना |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९४
राम उवाच
स राजा महतीं सेनां योजय़ित्वा षडङ्गिनीम् |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय ३७
कृश उवाच
स राजा मृगय़ां यातः परिक्षिदभिमन्युजः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९१
उतथ्य उवाच
स राजा यः प्रजाः शास्ति साधुकृत्पुरुषर्षभः ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
स राजा रतिसक्तत्वादुत्तमस्त्रीगुणैर्हृतः |
४२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
स राजा राजधर्मांश्च व्रह्मोपनिषदं तथा |
२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
स राजा राजमार्गेण नृनारीसङ्कुलेन च |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६४
भीष्म उवाच
स राजा राजशार्दूल मान्धाता परमेष्ठिनः |
१२ क
सभा पर्व
अध्याय ११
नारद उवाच
स राजा वलवानासीत्सम्राट्सर्वमहीक्षिताम् |
५३ क
वन पर्व
अध्याय १९०
वैशम्पाय़न उवाच
स राजा वाढमित्युक्त्वा तां समागम्य तय़ा सहास्ते ||
१८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८३
वैशम्पाय़न उवाच
स राजा व्यथितो व्यश्वो विधनुर्हतसारथिः |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८५
वैशम्पाय़न उवाच
स राजा शकुनेः पुत्रः पाण्डवं प्रत्यवारय़त् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४८
भीष्म उवाच
स राजा शत्रुवशगः पुत्रशोकसमन्वितः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय ९५
वैशम्पाय़न उवाच
स राजा शन्तनुर्धीमान्कालधर्ममुपेय़िवान् ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
स राजा शन्तनुर्धीमान्ख्यातः पृथ्व्यां धनुर्धरः |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
स राजा स शिवो राजन्स पिता स पितामहः |
३० क
उद्योग पर्व
अध्याय ३८
विदुर उवाच
स राजा सर्वतश्चक्षुश्चिरमैश्वर्यमश्नुते ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
स राजा सिंहविक्रान्तो युवा विषय़गोचरः |
६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
स राजा सुमहातेजा वृद्धः कुरुकुलोद्वहः |
१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २४
वैशम्पाय़न उवाच
स राजाग्नीन्पर्युपास्य हुत्वा च विधिवत्तदा |
१८ क
वन पर्व
अध्याय २८७
वैशम्पाय़न उवाच
स राजानं कुन्तिभोजमव्रवीत्सुमहातपाः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय ५१
सूत उवाच
स राजानं प्राह पृष्टस्तदानीं; यथाहुर्विप्रास्तद्वदेतन्नृदेव ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय ६४
वृहदश्व उवाच
स राजानमुपातिष्ठद्वाहुकोऽहमिति व्रुवन् |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९६
अष्टक उवाच
स राजास्त्वकृतप्रज्ञः कामवृत्तिश्च पापकृत् |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय १९६
कर्ण उवाच
स राज्ञ उपभोग्यानि स्त्रिय़ो रत्नधनानि च |
२० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
स राज्ञा धर्मशीलेन भ्रात्रा वीभत्सुना तथा |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
स राज्ञा स्वय़माचार्यो भृशमाक्रन्दितोऽर्जुन |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय १२०
वैशम्पाय़न उवाच
स राज्ञे दर्शय़ामास मिथुनं सशरं तदा ||
१५ ग
वन पर्व
अध्याय १०७
लोमश उवाच
स राज्यं सचिवे न्यस्य हृदय़ेन विदूय़ता |
३ क
विराट पर्व
अध्याय ६३
कङ्क उवाच
स राज्यं सुमहत्स्फीतं भ्रातॄंश्च त्रिदशोपमान् ||
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय १६५
गन्धर्व उवाच
स राज्यं स्फीतमुत्सृज्य तां च दीप्तां नृपश्रिय़म् |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७२
भीष्म उवाच
स राज्यमृद्धिमत्प्राप्य धर्मेण परिपालय़न् |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३
नारद उवाच
स रामं प्राञ्जलिर्भूत्वा वभाषे पूर्णमानसः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय २६६
मार्कण्डेय़ उवाच
स रामं सहसुग्रीवो माल्यवत्पृष्ठमास्थितम् |
२१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २९
समुद्र उवाच
स रामप्रतिकूलानि चकार सह वन्धुभिः |
९ क
वन पर्व
अध्याय २६३
मार्कण्डेय़ उवाच
स राममभिसम्प्रेक्ष्य कृष्यते येन तन्मुखम् |
२७ क
वन पर्व
अध्याय २७२
मार्कण्डेय़ उवाच
स राममुद्दिश्य शरैस्ततो दत्तवरैस्तदा |
२१ क
वन पर्व
अध्याय २६२
मार्कण्डेय़ उवाच
स रामवाणाभिहतः कृत्वा रामस्वरं तदा |
२२ क
वन पर्व
अध्याय २६२
मार्कण्डेय़ उवाच
स रामस्य पदं गृह्य प्रससार धनुर्धरः ||
२९ ग
वन पर्व
अध्याय २६४
मार्कण्डेय़ उवाच
स रामस्य हितान्वेषी त्वदर्थे हि स मावदत् ||
५५ ख
वन पर्व
अध्याय २७४
मातलिरु उवाच
स रामाय़ महाघोरं विससर्ज निशाचरः |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
स राहुश्छादय़त्येतौ यथाकालं महत्तय़ा |
४५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
स रुक्मपक्षो निचितस्त्रिगुणो गरुडाकृतिः ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६६
भीष्म उवाच
स रुदन्नगमत्पुत्रो राक्षसेन्द्रस्य धीमतः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
स रुद्रः संहरन्कृत्स्नं जगत्स्थावरजङ्गमम् |
१८४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
स रुद्रो दानवान्हत्वा कृत्वा धर्मोत्तरं जगत् |
६२ क