आदि पर्व
अध्याय
१०१
वैशम्पाय़न उवाच
स वध्यघातैरज्ञातः शूले प्रोतो महातपाः ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
स वध्यमानः सङ्क्रुद्धः समुत्तस्थौ महावलः |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानः समरे कृतास्त्रेण वलीय़सा |
९० क
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानः समरे गौतमेन महात्मना |
५१ क
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानः समरे पदातिगणसंवृतः |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानः समरे पाण्डवैर्जितकाशिभिः |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानः समरे भारद्वाजेन सात्यकिः |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानः समरे भीमचापच्युतैः शरैः |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानः समरे रथं द्रोणस्य मारिष |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानः समरे शैनेय़स्य शरोत्तमैः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
२३४
वैशम्पाय़न उवाच
स वध्यमानस्तैरस्त्रैरर्जुनेन महात्मना |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६३
सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानेष्वस्त्रेषु दिव्येष्वपि यथाविधि |
३१ क
वन पर्व
अध्याय
२६३
मार्कण्डेय़ उवाच
स वध्यमानो गृध्रेण रामप्रिय़हितैषिणा |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानो भीमेन निमेषाद्रथमास्थितः |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५४
सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानो रक्षसा वै निशीथे; दृष्ट्वा राजन्नश्यमानं वलं च |
५१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
११
वासुदेव उवाच
स वध्यमानो वज्रेण तस्मिन्नमिततेजसा |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
११
वासुदेव उवाच
स वध्यमानो वज्रेण तस्मिन्नमिततेजसा |
१७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
११
वासुदेव उवाच
स वध्यमानो वज्रेण पृथिव्यां भूरितेजसा |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
११
वासुदेव उवाच
स वध्यमानो वज्रेण सलिले भूरितेजसा |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
११
वासुदेव उवाच
स वध्यमानो वज्रेण सुभृशं भूरितेजसा |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानो वहुधा भीमसेनेन राक्षसः |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानो वहुधा राजपुत्रैर्महारथैः |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानो वहुभिः शरैः संनतपर्वभिः |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानो वहुभिः साय़कैस्तैर्महावलः |
५२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
स वध्यस्यावधे दृष्ट इति धर्मविदो विदुः ||
१८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
स वध्योऽस्य पुमाँल्लोके त्वय़ा चोक्तोऽय़मीदृशम् ||
१०८ ख
आदि पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
स वनस्यान्तमासाद्य महदीरिणमासदत् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४५
भीष्म उवाच
स वनानि विचित्राणि तीर्थानि च सरांसि च |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४२
भीष्म उवाच
स वने विजने तात ददर्श मिथुनं नृणाम् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१३
जनक उवाच
स वनेऽग्नीन्यथान्याय़मात्मन्यारोप्य धर्मवित् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
२५९
मार्कण्डेय़ उवाच
स वभूव महाभागो धर्मगोप्ता क्रिय़ारतिः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
२७१
मार्कण्डेय़ उवाच
स वभूवातिकाय़श्च वहुपादशिरोभुजः |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
स वभौ नरशार्दूलो ललाटे संस्थितैस्त्रिभिः |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
स वभौ भरतश्रेष्ठ ज्वलन्निव हुताशनः ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
स वभौ राक्षसो राजन्भिन्नाञ्जनचय़ोपमः |
३७ क
शल्य पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
स वभौ राजमध्यस्थो नीलवासाः सितप्रभः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
स वभौ राजलिङ्गैस्तैस्तारापतिरिवाम्वरे ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
स वराहध्वजस्तूर्णं गार्ध्रपत्रानजिह्मगान् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
स वरैश्छन्दितस्तेन नृपो वचनमव्रवीत् |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
स वर्जय़ेत मांसानि प्राणिनामिह सर्वशः ||
५२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९६
भीष्म उवाच
स वर्धमानः स्तेय़ेन पापः पापे प्रसज्जति ||
१८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
स वर्धमानद्वारेण निर्ययौ गजसाह्वय़ात् |
३ क
वन पर्व
अध्याय
११५
भृगुरु उवाच
स वर्धमानस्तेजस्वी वेदस्याध्ययनेन वै |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय
१०४
वैशम्पाय़न उवाच
स वर्धमानो वलवान्सर्वास्त्रेषूद्यतोऽभवत् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१६
भीष्म उवाच
स वर्षति स्म वर्षाणि यथाकालमतन्द्रितः |
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१६३
अर्जुन उवाच
स वर्ष्मवान्महाकाय़स्ततो मामभ्यधावत ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
स वर्हिणमहावाजं किङ्किणीशतजालवत् |
५७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
स वलं भीमसेनस्य फल्गुनस्य च लाघवम् |
६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
स वलात्तेन निष्पिष्टः साध्वसेन च भारत |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
१२२
लोमश उवाच
स वल्मीकोऽभवदृषिर्लताभिरभिसंवृतः |
३ क