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वन पर्व
अध्याय ११०
लोमश उवाच
स व्राह्मणान्पर्यपृच्छत्तपोय़ुक्तान्मनीषिणः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय ११०
लोमश उवाच
स व्राह्मणैः परित्यक्तस्तदा वै जगतीपतिः ||
२० ख
विराट पर्व
अध्याय ५५
वैशम्पाय़न उवाच
स शक्तिं प्राहिणोत्तस्मै तां पार्थो व्यधमच्छरैः ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
स शक्त्यस्त्रेण सङ्ग्रामे जघान भगवान्प्रभुः |
६४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
स शक्त्या सात्यकिं विद्ध्वा स्वर्णपुङ्खैः शिलाशितैः |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
स शक्र इव विक्रान्तः शक्रसूनोः सुतो वली |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
स शक्रचापप्रतिमेन धन्वना; भृशाततेनाधिरथिः शरान्सृजन् |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३०
महेश्वर उवाच
स शक्रलोकगो नित्यं सर्वकामपुरस्कृतः |
५५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९८
भीष्म उवाच
स शक्रलोके वसति पूज्यमानो द्विजातिभिः |
१९ क
वन पर्व
अध्याय ९९
लोमश उवाच
स शक्रवज्राभिहतः पपात; महासुरः काञ्चनमाल्यधारी |
१४ क
वन पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
स शक्रवद्दानवदैत्यसङ्घा; न्विक्रम्य जित्वा च रणेऽरिसङ्घान् |
२१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८५
वैशम्पाय़न उवाच
स शक्रसमकर्माणमवाकिरत साय़कैः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२४
श्रीरु उवाच
स शक्रो व्रह्मचारी च यस्त्वय़ा चोपशिक्षितः |
५८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
कृप उवाच
स शङ्कमानस्तन्मिथ्या धर्मराजमपृच्छत |
११४ क
वन पर्व
अध्याय १६५
अर्जुन उवाच
स शङ्खी कवची वाणी प्रगृहीतशरासनः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२९
श्रीभगवानु उवाच
स शच्यैवमभिहितो नहुषो जगाम ||
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २४८
भीष्म उवाच
स शत्रुभिर्हतः सङ्ख्ये सवलः सपदानुगः ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
स शत्रुभुजनिर्मुक्तैर्ललाटस्थैस्त्रिभिः शरैः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६८
सञ्जय़ उवाच
स शत्रुर्निहतः सङ्ख्ये मय़ा धर्मेण पाण्डव |
३७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २४८
भीष्म उवाच
स शत्रुवशमापन्नः सङ्ग्रामे क्षीणवाहनः ||
७ ख
विराट पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
स शत्रुसेनां तरसा प्रणुद्य; गास्ता विजित्याथ धनुर्धराग्र्यः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६५
भीष्म उवाच
स शत्रूणामुपरि च सन्तिष्ठति युधिष्ठिर ||
२ ग
वन पर्व
अध्याय १५९
वैश्रवण उवाच
स शन्तनुर्महातेजाः पितुस्तव पितामहः |
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
स शरः पण्डितं हत्वा विवेश धरणीतलम् |
२४ क
शल्य पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
स शरः प्रेषितस्तेन क्रोधदीप्तेन धन्विना |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
स शरः प्रेषितस्तेन गरुत्मानिव वेगवान् |
५० क
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
स शरक्षय़मासाद्य दुःखशोकसमाहतः |
६० क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
स शरक्षय़मासाद्य पुत्रशोकेन चार्दितः |
१२० क
द्रोण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
स शरार्दितसर्वाङ्गः क्रुद्धः शक्रात्मजात्मजः |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
स शरार्पितसर्वाङ्गः क्रुद्धो विव्याध पाण्डवम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय ९८
लोमश उवाच
स शरीरं समुत्सृज्य स्वान्यस्थीनि प्रदास्यति ||
९ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
स शरैः क्षतसर्वाङ्गः सात्वतः सत्त्वकोविदः |
२५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
स शरैः समवच्छन्नो ददृशे पाण्डवर्षभः |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
स शरैः सर्वतो विद्धः प्रहृष्ट इव पाण्डवः |
२४ क
विराट पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
स शरैरर्पितः क्रुद्धः शितैरग्निशिखोपमैः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
स शरैराचितस्तेन राक्षसो रणमूर्धनि |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
स शरैश्चित्रितो राजंश्चित्रमाल्यधरो युवा |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
स शरौघार्दितो नागो भीमसेनेन संय़ुगे |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
स शल्य इति विख्यातो जज्ञे वाह्लीकपुङ्गवः ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
स शल्यं पञ्चविंशत्या कृपं च नवभिः शरैः |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
स शल्यमभिवाद्याथ कृत्वा चाभिप्रदक्षिणम् |
७२ क
कर्ण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
स शल्यमाभाष्य जगाद वाक्यं; पार्थस्य कर्माप्रतिमं च दृष्ट्वा |
४१ क
कर्ण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
स शल्यसङ्गृहीताश्वे रथे कर्णः स्थितोऽभवत् |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
स शव्दः पृथिवीं सर्वां पूरय़ामास सर्वशः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
स शव्दः प्रदिशः सर्वा दिशः खं च समावृणोत् |
३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
स शव्दः प्रेरितो राजन्भूतसङ्घैर्मुदा युतैः |
८८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
स शव्दः सुमहान्राजन्दिशः सर्वा व्यनादय़त् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय २८२
पराशर उवाच
स शव्दमात्रफलभाग्राजा भवति तस्करः ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६६
सञ्जय़ उवाच
स शव्दस्तुमुलः खं द्यां पृथिवीं च व्यनादय़त् ||
५८ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
स शव्दो भरतश्रेष्ठ दिशः सर्वा व्यनादय़त् ||
२० ग