शान्ति पर्व
अध्याय
५६
भीष्म उवाच
व्राह्मणेभ्यो नमस्कृत्य धर्मान्वक्ष्यामि शाश्वतान् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६०
भीष्म उवाच
व्राह्मणेभ्यो नमस्कृत्वा धर्मान्वक्ष्यामि शाश्वतान् ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३२
विदुरो उवाच
व्राह्मणेभ्यो नमेन्नित्यं धर्माय़ैव च सञ्जय़ ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणेभ्यो नमो नित्यं येषां युद्धे न जीविका ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
१२६
लोमश उवाच
व्राह्मणेभ्यो महाराज दत्तानीति प्रचक्षते ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६७
अर्जुन उवाच
व्राह्मणेभ्यो महार्हेभ्यः सोऽश्वत्थामैष गर्जति ||
२८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणेभ्यो महार्हेभ्यो ददौ वित्तान्यनेकशः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१९०
मार्कण्डेय़ उवाच
व्राह्मणेभ्यो मृगय़न्ती सूनृतानि; तथा व्रह्मन्पुण्यलोकं लभेय़म् ||
७९ ग
आदि पर्व
अध्याय
१२१
राम उवाच
व्राह्मणेभ्यो मय़ा दत्तं सर्वमेव तपोधन ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३४
भीष्म उवाच
व्राह्मणेभ्यो हविर्दत्तं प्रतिगृह्णन्ति देवताः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
व्राह्मणेभ्योऽतिरिक्तं च भुञ्जीरन्नितरे जनाः |
२ क
वन पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणेभ्योऽथ मेधावी वुद्धिपर्येषणं चरेत् |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३०
शक्र उवाच
व्राह्मणेभ्योऽनुतृप्यन्ति पितरो देवतास्तथा ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६५
विश्वामित्र उवाच
व्राह्मणेषु कुतो वीर्यं प्रशान्तेषु धृतात्मसु ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०९
सुपर्ण उवाच
व्राह्मणेषु च यत्कृत्स्नं स्वन्तं कृत्वा धनं महत् |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
विदुर उवाच
व्राह्मणेषु च ये शूराः स्त्रीषु ज्ञातिषु गोषु च |
५९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणेषु च यो धर्मः स नित्यो वेदनिश्चितः ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४७
भीष्म उवाच
व्राह्मणेषु च वृत्तिर्या पितृपैतामहोचिता |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३४
भीष्म उवाच
व्राह्मणेषु तु तुष्टेषु प्रीय़न्ते पितरः सदा |
८ क
वन पर्व
अध्याय
२३८
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणेषु सदा वृत्तिं कुर्वीथाश्चाप्रमादतः |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२९
महेश्वर उवाच
व्राह्मणेषु हि यो धर्मः स धर्मः परमो मतः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणेषूत्तमा वृत्तिस्तव नित्यं युधिष्ठिर |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६२
नारद उवाच
व्राह्मणेष्वक्षय़ं दानमन्नं शूद्रे महाफलम् |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
व्राह्मणेष्वार्जवं यच्च स्थैर्यं च धरणीतले |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२८७
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणेष्विह सर्वेषु गुरुवन्धुषु चैव ह ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
व्राह्मणेष्वृणभूतं स्यात्पार्थिवस्य पुरन्दर |
७४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५८
भीष्म उवाच
व्राह्मणेष्वेव शाम्यन्ति तेजांसि च तपांसि च ||
३५ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
३४
भीष्म उवाच
व्राह्मणेष्वेव शाम्यन्ति तेजांसि च वलानि च ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
व्राह्मणैः कथिताः पूर्वं यथावद्राजसंनिधौ |
७२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
व्राह्मणैः कारय़िष्यन्ति वृषलाः पादधावनम् |
११२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
व्राह्मणैः क्षत्रिय़ैर्वैश्यैः शूद्रैश्च कृतलक्षणैः |
३८ क
आदि पर्व
अध्याय
१८१
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणैः प्राविशत्तत्र जिष्णुर्व्रह्मपुरस्कृतः ||
४० ख
आदि पर्व
अध्याय
११७
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणैः सह निर्जग्मुर्व्राह्मणानां च योषितः ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणैः सहिता जग्मुः पाञ्चालानां पुरं ततः ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
व्राह्मणैः सहिता यान्ति तस्मात्परतरं पदम् |
४० क
वन पर्व
अध्याय
२४४
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणैः सहिता राजन्ये च तत्र सहोषिताः |
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणैः सहिता वीरा न्यवसन्पुरुषर्षभाः ||
४२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४८
भीष्म उवाच
व्राह्मणैरप्रतिग्राह्यस्तक्षा स वनजीवनः ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३८
वाय़ुरु उवाच
व्राह्मणैरभिशप्तः सँल्लवणोदः कृतो विभो ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणैरभ्यनुज्ञातः प्रय़यौ नगरं प्रति ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
६२
विदुर उवाच
व्राह्मणैर्देवकल्पैश्च विद्याजम्भकवातिकैः ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३३
भीष्म उवाच
व्राह्मणैर्यः पराक्रुष्टः पराभूय़ात्क्षणाद्धि सः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणैर्वहुभिः सार्धं पुण्यं द्वैतवनं सरः ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणैर्विप्रहीणस्य क्षत्रस्य क्षीय़ते वलम् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणैर्वेदवेदाङ्गपारगैश्च सहाच्युतः ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५०
भीष्म उवाच
व्राह्मणैश्च तपःसिद्धैस्तापसैः श्रमणैरपि |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
व्राह्मणैश्च महाभागैः सूर्यज्वलनसंनिभैः |
८ क
वन पर्व
अध्याय
७८
वृहदश्व उवाच
व्राह्मणैश्च महाभागैर्वेदवेदाङ्गपारगैः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
व्राह्मणैश्चापि ते सार्धं यात्रा भवतु पाण्डव |
२०८ क
विराट पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणैश्चारकैः सिद्धैर्ये चान्ये तद्विदो जनाः ||
१० ख