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वन पर्व
अध्याय २४०
वैशम्पाय़न उवाच
रथैर्नागैः पदातैश्च शुशुभेऽतीव सङ्कुला |
४३ क
वन पर्व
अध्याय २४०
वैशम्पाय़न उवाच
रथैर्नानाविधाकारैर्हय़ैर्गजवरैस्तथा |
४७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
रथैर्भग्नैर्ध्वजैश्छिन्नैश्छत्रैश्च सुमहाप्रभैः |
३३ क
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
रथैर्भग्नैर्महाराज वारणैश्च निपातितैः |
७२ क
शल्य पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
रथैर्भग्नैर्युगाक्षैश्च निहतैश्च महारथैः |
३१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
रथैर्वरेषून्मथितैश्च योधैः; संस्यूतसूताश्ववराय़ुधध्वजैः |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
रथैर्विनिर्ययुः सर्वे मृगय़ामरिमर्दनाः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
रथैर्विपरिधावद्भिर्मनुष्यैश्च हय़ैश्च ह |
७२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
रथैर्विमथिताक्षैश्च भग्ननीडैश्च मारिष |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६२
सञ्जय़ उवाच
रथैर्हय़ा हय़ैर्नागाः पादाताश्चापि कुञ्जरैः |
४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
रथैश्च कुञ्जरैश्चैव न प्राज्ञाय़त किञ्चन ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
रथैश्च दशसाहस्रैर्वृतो याहि धनञ्जय़म् ||
६० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
रथैश्च नगराकारैः प्रदीप्तज्वलनोपमैः ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७६
सञ्जय़ उवाच
रथैश्च पादातगजाश्वसङ्घैः; प्रय़ाद्भिराजौ विधिवत्प्रणुन्नैः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
रथैश्च भग्नैर्नागैश्च हतैः कीर्णाभवन्मही ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
रथैश्च वहुधा छिन्नैर्ध्वजैश्चैव विशां पते |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
रथैश्च वहुधा भग्नैः समास्तीर्यत मेदिनी ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
रथैश्च वहुभिर्भग्नैः किङ्किणीजालमालिभिः |
६३ क
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
रथैश्चतुःशतैर्वीरो मां चाभ्यद्रवदाहवे ||
४९ ख
विराट पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
रथैश्चतुर्भिर्गजपादरक्षैः; कुन्तीसुतं जिष्णुमथाभ्यधावत् ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
रथैश्चापि नरव्याघ्र हय़ैश्चापि समन्ततः ||
३८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
रथैश्चावगतैर्मार्गे पर्यस्तीर्यत मेदिनी ||
५५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
रथैस्ते नगराकारैः पताकाध्वजशोभितैः |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६३
भीष्म उवाच
रथो मम मतस्तात दृढवेगपराक्रमः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
रथो मातलिसंय़ुक्त आगन्ता त्वत्कृते महीम् |
३८ क
वन पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
रथो मातलिसंय़ुक्त आजगाम महाप्रभः ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८०
भीष्म उवाच
रथो मे मेदिनी भीष्म वाहा वेदाः सदश्ववत् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
रथो मे युज्यतां काल्यमिति राजन्महावलः ||
३९ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
रथो वेदी कामगो युद्धमग्नि; श्चातुर्होत्रं चतुरो वाजिमुख्याः ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५७
दुर्योधन उवाच
रथो वेदी स्रुवः खड्गो गदा स्रुक्कवचं सदः |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
रथोपकरणैः सर्वैरुपाय़ान्तु त्वरान्विताः ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
रथोपस्थं समासाद्य मुमोह गतचेतनः ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५५
सञ्जय़ उवाच
रथोपस्थगतो भीमं प्राणदत्पुनरच्युतः ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
रथोपस्थान्समीक्ष्यापि विव्यथे नैव सौवलः |
२४ क
विराट पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
रथोपस्थाभिपतितैरास्तृता मानवैर्मही |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६२
भीष्म उवाच
रथोपस्थे गजस्कन्धे गदाय़ुद्धेऽसिचर्मणि ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
रथोपस्थे प्राय़गतं विशस्तं; तदा नाशंसे विजय़ाय़ सञ्जय़ ||
१४३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
रथोऽर्जुनस्याग्निरिवार्चिमाली; विभ्राजते श्वेतहय़ः सुचक्रः ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
रथौ च तौ श्वेतहय़ौ युक्तकेतू महास्वनौ ||
६१ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १६५
भीष्म उवाच
रथौ तव दुराधर्षौ शत्रून्विध्वंसय़िष्यतः ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६३
भीष्म उवाच
रथौ तौ रथशार्दूल मतौ मे रथसत्तमौ |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
रथौघतुमुलावर्तः प्रवभौ सैन्यसागरः ||
६१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
रथौघानवमृद्नन्तः सध्वजान्परिचक्रमुः ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
रथौघाश्च हय़ौघाश्च नरौघाश्च समन्ततः |
२ क
मौसल पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
रथ्यास्रोतोजलावर्तां चत्वरस्तिमितह्रदाम् ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
देवा ऊचुः
रथय़ष्टिं विय़त्कृष्टां स्थापय़ामास गोवृषम् ||
७८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६४
भीष्म उवाच
रथय़ूथपय़ूथानां यूथपः स नरर्षभः |
१४ क
सभा पर्व
अध्याय ४५
दुर्योधन उवाच
रथय़ोषिद्गवाश्वस्य शतशोऽथ सहस्रशः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
रन्तिदेवं च साङ्कृत्यं मृतं शुश्रुम सृञ्जय़ |
११३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२६
व्यास उवाच
रन्तिदेवश्च साङ्कृत्यो वसिष्ठाय़ महात्मने |
१७ क